Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

दिल्ली के साइकिल दुकानदार असलम भूरे कौन थे, रामजन्मभूमि-बाबरी विध्वंस दोनों केस से है कनेक्शन

नई दिल्ली- अयोध्या में दशकों तक चले रामजन्मभूमि विवाद और बाबरी मस्जिद विध्वंस दोनों मामलों में एक शख्स का नाम याचिकाकर्ता के रूप में जुड़ा था, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। वो थे मोहम्मद असलम भूरे, जिन्होंने इस केस को लड़ने के लिए अपनी सारी जमा-पूंजी लगा दी। 30 सितंबर, 2010 को जब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रामजन्मभूमि के पक्ष में अपना फैसला सुनाया था, उसके कुछ दिन बाद ही भूरे की मौत हो गई थी। भूरे ने इन दोनों केस को जिंदा रखने के लिए अपने परिवार की बातों को भी नजरअंदाज किया। क्योंकि, वह मुकदमेबाजी छोड़ना चाहते भी थे, लेकिन उनके सामने ऐसी मजबूरी आ गई थी कि वह चाहकर भी इस कानूनी लफड़े से खुद को अलग नहीं कर पाए।

भूरे जिंदा रहने तक बाबरी मस्जिद के लिए कानूनी लड़ाई लड़े

भूरे जिंदा रहने तक बाबरी मस्जिद के लिए कानूनी लड़ाई लड़े

अयोध्या विवाद से जुड़े दोनों मामलों में, रामजन्मभूमि पर मालिकाना हक और बाबरी मस्जिद विध्वंस में कई पक्षकार थे। लेकिन, दिल्ली के रहने वाले एक सामान्य से शख्स जो किसी मामले में भी पार्टी नहीं थे, उनका नाम भी इन दोनों मामलों को लेकर खूब चर्चित रहा है। वह अदालतों में याचिकाएं डालते हुए एक तरह से दिवालिया हो गए, लेकिन 20 साल तक वह इन मामलों से जुड़ी कानूनी लड़ाई लड़ते रहे। वह शख्स थे दिल्ली की जामा मस्जिद से सटे दरियागंज इलाके में एक साइकिल दुकान के मालिक मोहम्मद असलम भूरे। मुकदमेबाजी में माली हालत बिगड़ते जाने के चलते परिवार का भी दबाव था कि वह यह सब छोड़ दें, लेकिन जब तक जिंदा रहे कानून जंग जारी रखा।

Recommended Video

    Babri Verdict: Asaduddin Owaisi ने पूछा, किसने गिराई मेरी मस्जिद, जादू से गिर गई ? | वनइंडिया हिंदी
    बाबरी विध्वंस केस में भी निभाई बड़ी भूमिका

    बाबरी विध्वंस केस में भी निभाई बड़ी भूमिका

    अगर, बाबरी विध्वंस का मुकदमा लगातार 28 वर्षों तक चला तो उसका बहुत बड़ा श्रेय असमल भूरे को भी जाता है। उन्होंने रामजन्मभूमि की टाइटल सूट और बाबरी विध्वंस मामले में सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप करवाने में अहम किरदार अदा किया। जब भी उन्हें लगा कि निजली अदालतों किसी तरह की कोई बाधा उत्पन्न हो रही है, उसने अपने वकीलों को सक्रिय किया। खुद अदालतों में बाबरी मस्जिद केस की पैरवी करने वाले और कानून के जानकार जफरयाब जिलानी का कहना है, 'असलम भूरे धर्म के लिए लड़ने वाला एक योद्धा था, जो बिना किसी निजी या वैचारिक मतभेदों के एक धर्म स्थल की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध था।'

    आडवाणी की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लगाई थी गुहार

    आडवाणी की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लगाई थी गुहार

    बाबरी विध्वंस केस में रायबरेली और लखनऊ दो जगहों पर मुकदमा चलाने को लेकर यूपी सरकार की ओर से जारी दो अधिसूचनाओं वाले तर्क के खिलाफ उन्होंने ही जनहित याचिका दायर की थी। सीबीआई ने भी लखनऊ में ही दोनों ट्रायल चलाने की भूरे की अर्जी का समर्थन किया। फिर जब रायबरेली कोर्ट ने लालकृष्ण आडवाणी और दूसरे आरोपियों को बरी कर दिया तो भूरे ने ही सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की गुहार लगाई। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने बरी किए गए सभी अभियुक्तों को नोटिस जारी किया था। बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बरी किए जाने के आदेश को रद्द कर दिया।

    एक वक्त मुकदमेबाजी छोड़ना चाहते थे भूरे

    एक वक्त मुकदमेबाजी छोड़ना चाहते थे भूरे

    असलम भूरे की दशकों की उम्मीदों पर तब पानी फिर गया, जब 30 सितंबर, 2010 को अयोध्या रामजन्मभूमि विवाद पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का बहुमत से ऐतिहासिक फैसला आया। संयोग ऐसा हुआ कि हाई कोर्ट के इस फैसले के दो दिन बाद ही उनकी मौत हो गई। मौत से तकरीबन 7 साल पहले ही भूरे ने एक विदेशी मीडिया को दिए इंटरव्यू में इस केस को लेकर अपनी दुविधा जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि बीवी मुकदमेबाजी छोड़ने को कहती है, लेकिन उन्हें लगता है कि, 'इतनी दूर तक आने के बाद यदि मैं पीछे हटता हूं तो मुझपर बिक जाने का संदेह किया जाएगा, लेकिन मेरे पास साधन नहीं हैं, इसे जारी रखने के लिए शरीर में ताकत भी नहीं रह गई है।'

    कुछ अराजक तत्वों ने गिराई बाबरी मस्जिद

    कुछ अराजक तत्वों ने गिराई बाबरी मस्जिद

    लखनऊ की एक विशेष सीबीआई अदालत ने बुधवार को बाबरी मस्जिद विध्वंस केस के सभी 32 आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया है। इसमें भगवा विचारों से जुड़े पूर्व उप प्रधानमंत्री एलके आडवाणी, पूर्व यूपी सीएम कल्याण सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, पूर्व एमपी सीएम उमा भारती, बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार और बीजेपी के 3 सांसद शामिल हैं। स्पेशल जज सुरेंद्र कुमार यादव ने 2,300 पन्नों के फैसले में कहा कि बाबरी मस्जिद पूर्वनियोजित साजिश के तहत नहीं गिराई गई और इस घटना के पीछे कार सेवकों के बीच मौजूद कुछ अराजक तत्वों का हाथ था। अदालत ने यह भी कहा कि सीबीआई यह साबित नहीं कर पाई कि 16वीं शताब्दी के ढांचे को गिराने के पीछे संघ परिवार के लोगों की कोई साजिश थी।

    इसे भी पढ़ें- कल्याण सिंह ने बचाव में क्या किया, जो आडवाणी-जोशी कोई नहीं कर सके

    More From
    Prev
    Next
    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+