कौन थे गुरु गोलवलकर जी? जिन पर टिप्पणी करके बुरे फंसे दिग्विजय सिंह
Who Was MS Golwalkar: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह एक बार फिर से विवादों में आ गए हैं। दिग्विजय सिंह आरएसएस के पूर्व सरसंघचालक एमएस गोलवलकर पर विवादित ट्वीट करने के बाद बुरी तरह घिर गए हैं। उनके खिलाफ इंदौर में एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। दिग्विजय पर फेसबुक पर गोलवलकर के नाम और तस्वीर वाला विवादास्पद पोस्टर साझा कर समाज में वैमनस्य पैदा करने का आरोप लगा है।
दिग्विजय ने किया विवादित ट्वीट
दिग्विजय सिंह ने जो पोस्टर शेयर किया, उसमें दावा किया गया कि एमएस गोलवलकर (MS Golwalkar) ने एक बार कहा था कि मैं सारी जिंदगी अंग्रेजों की गुलामी करने के लिए तैयार हूं लेकिन जो दलित पिछड़ों और मुसलमानों को बराबरी का अधिकार देती हो ऐसी आजादी मुझे नहीं चाहिए। पोस्टर को शेयर करते हुए दिग्विजय ने लिखा था कि गुरु गोलवलकर के दलितों पिछड़ों और मुसलमानों के लिए और राष्ट्रीय जल जंगल और जमीन पर अधिकार पर क्या विचार थे, जरूर जानिए।

कौन थे माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर?
माधव सदाशिवराव गोलवलकर (MS Golwalkar) आरएसएस के दूसरे और सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले सरसंघचालक थे। वे सबसे लंबे समय तक गुरुजी गोलवलकर के नाम से लोकप्रिय थे और 1940 से लेकर 1973 तक 33 वर्षों तक आरएसएस के प्रमुख रहे थे। हिन्दुत्व की विचारधारा का प्रवर्तन करने वालों उनका नाम प्रमुख है। वे संघ के कुछ आरम्भिक नेताओं में से एक हैं।
गोलवलकर का जन्म महाराष्ट्र में हुआ था
गोलवलकर का जन्म महाराष्ट्र के रामटेक में हुआ था। उनका बचपन में नाम माधव रखा गया पर परिवार में वे मधु के नाम से ही पुकारे जाते थे। गोलवलकर ने संघ की वैचारिक सोच को शाखाओं की मदद से गली- मोहल्लों तक पहुंचाया। अपने जीवन में गोलवलकर कई भूमिका में नजर आए। कई संघर्षों का सामना किया।
गोलवलकर सियासत के विरोधी थे
एस एस गोलवलकर (MS Golwalkar) सियासत के विरोधी थे। गोलवलकर का मानना था कि गवर्नेंस वेश्याओं का धर्म है। गोलवलकर ने आरएसएस को संन्यास आश्रम की छाया में ढाला। संघ के अब तक जितने भी सरसंघचालक हुए हैं उनमें से सबसे अधिक प्रभाव एमसएस गोलवलकर का ही रहा।
गोलवलकर से पीएम नेहरू, शास्त्री जी से लेकर वाजपेयी भी प्रभावित थे
गोलवलकर से देश के तीन-तीन प्रधानमंत्री प्रभावित हुए थे। जवाहर लाल नेहरू उस समय प्रभावित हुए जब चीन के साथ युद्ध के दौरान गोलवलकर जी ने नागरिक प्रशासन में अहम भूमिका अदा की थी। इसके बाद पंडित नेहरू ने आरएसएस की एक टुकड़ी को पूरी यूनिफॉर्म और बैंड के साथ 1963 की गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होने का मौका दिया। 1965 के युद्ध के दौरान गोलवलकर के साथ उस समय के पीएम लाल बहादुर शास्त्री ने सलाह मशविरा किया था। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी भी गोलवलकर से काफी प्रभावित थे। गोलवलकर की उपस्थिति में अटल बिहारी वाजपेयी हमेशा शिष्टाचार में रहते थे और उनसे कई बातें सीखते थे।












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