कौन थे बेंगलुरु के 'संस्थापक' केम्पेगौड़ा ? जिनकी मूर्ति के लिए आई 4,000 किलो की तलवार
बेंगलुरु, 4 मई: बेंगलुरु हवाई अड्डे पर एक बहुत ही भव्य प्रतिमा का निर्माण हो रहा है, जिसकी भव्यता का अंदाजा मूर्ति के हाथ में थमाई जाने वाली तलवार की विशालता से लगाया जा सकता है। 35 फीट लंबी यह तलवार 4,000 किलो की है, जिसे दिल्ली से बेंगलुरु एयरपोर्ट तक पहुंचाने के लिए स्पेशल ट्रक का इंतजाम करना पड़ा है। यह प्रतिमा केम्पेगौड़ा की बन रही है, जिनका सीधा संबंध बेंगलुरु और भारतीय इतिहास में अपने ऐश्वर्य और उन्नति के लिए पहचाने जाने वाले गौरवशाली विजयनगर साम्राज्य से है। विजयनगर साम्राज्य के शासकों ने 14वीं से 17वीं शताब्दी तक शासन किया था; और इस दौरान कई ऐतिहासिक मंदिरों का निर्माण कराया गया था।

केम्पेगौड़ा की प्रतिमा के लिए मंगवाई गई 4,000 किलो की तलवार
बेंगलुरु एयरपोर्ट पर एक प्रतिमा की शान बढ़ाने के लिए 4,000 किलो की तलवार मंगवाई गई है। 108 फीट की यह प्रतिमा केम्पेगौड़ा की है, जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने ही कर्नाटक की आज की राजधानी बेंगलुरु की नींव डाली थी। उनकी ये भव्य मूर्ति बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लगाई जा रही है। 4,000 किलो की विशाल तलवार दिल्ली से एक विशेष ट्रक से बेंगलुरु एयरपोर्ट तक लाई गई है, जिसे कर्नाटक के मंत्री सीएन अश्वथ नारायण ने रिसिव किया है।

85 करोड़ की लागत आने का अनुमान
बेंगलुरु एयरपोर्ट परिसर में 23 एकड़ के हेरिटेज पार्क में बन रही इस प्रतिमा के लिए जो तलवार मंगवाई गई है, वह 35 फीट लंबी है। एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री नारायण की मौजूदगी में इसकी 'शक्ति पूजा' की गई। केम्पेगौड़ा की 511वीं जयंती के मौके पर कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने 2020 के जून में इस प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी थी। उनकी मूर्ति के निर्माण का कार्य बहुत ही तेज गति से चल रहा है और अनुमान है कि इसपर लगभग 85 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस भव्य प्रतिमा उनके नाम पर बने बेंगलुरु हवाई अड्डे पर इस मकसद से बनायी जा रही है, ताकि केम्पेगौड़ा के जीवन और उनकी उपलब्धियों को दुनिया तक पहुंचाया जा सके।

प्रसिद्ध मूर्तिकार राम वी सुतार के हाथों निर्माण
इस प्रतिमा का निर्माण भी पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित राम वी सुतार की निगरानी में हो रहा है, जिन्होंने गुजरात की प्रसिद्ध स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को डिजाइन किया है। जानकारी के मुताबिक सुतार ने ही बेंगलुरु के विधान सौधा स्थित गांधी जी की मूर्ति को भी आकार दिया है। प्रसिद्ध मूर्तिकार सुतार महाराष्ट्र के धुलिया जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने जेजे स्कूल ऑफ आर्ट, बॉम्बे से ग्रैजुएशन किया है, जिसमें उन्हें गोल्ड मेडल मिला था। देश में स्मारकीय मूर्तियां बनाने वाली बड़ी कंपनियों में से एक राम सुतार की कंपनी फाइन आर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड भी है।

कौन थे बेंगलुरु के 'संस्थापक' केम्पेगौड़ा ?
केम्पेगौड़ा को व्यापक रूप में बेंगलुरु के संस्थापक के रूप में स्वीकार किया जाता है। वे विजयनगर साम्राज्य के तहत एक सामंत थे। इतिहासकार उन्हें न्यायप्रिय और मानवीय शासक होने का श्रेय देते हैं। कर्नाटक सरकार की योजना केम्पेगौड़ा की प्रतिमा को बेंगलुरु एयरपोर्ट के मुख्य आकर्षण का केंद्र बनाना है। ताकि, देश के अलग-अलग हिस्सों और दुनिया भर से आने वाले पर्यटकों और प्रोफेशनल को वास्तु कला के चमत्कार को देखने का मौका मिले।












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