Sandeep Pathak कौन हैं, जिन्होंने BJP का दामन थाम कर Arvind Kejriwal को दिया झटका! पंजाब चुनाव 2027 में सेंध?
Sandeep Pathak Joined BJP: पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले आम आदमी पार्टी (AAP) में भूचाल आ गया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) और पंजाब से राज्यसभा सांसद डॉ. संदीप पाठक ने आज(शुक्रवार, 24 अप्रैल) BJP का दामन थाम लिया। वे अकेले नहीं राघव चड्ढा, अशोक मित्तल भी बीजेपी में शामिल हो गए।
इनके साथ ही, दिल्ली में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव ने दावा किया कि AAP के लगभग दो-तिहाई राज्यसभा सांसदों ने सामूहिक रूप से पार्टी छोड़कर BJP में विलय कर लिया। इस ऐलान ने पूरे राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा दी।

Who Is Sandeep Pathak: डॉ. संदीप पाठक कौन हैं? IIT प्रोफेसर से राजनेता तक का अनोखा सफर
डॉ. संदीप कुमार पाठक (जन्म: 4 अक्टूबर 1979) छत्तीसगढ़ के छोटे से गांव बटाहा के रहने वाले हैं। एक साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कमाल किया। शुरुआती पढ़ाई बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से पूरी की। स्कूल, ग्रेजुएशन और मास्टर्स डिग्री सब यहीं से। आगे की पढ़ाई के लिए वे हैदराबाद के भारतीय रासायनिक प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT) और पुणे की नेशनल केमिकल लेबोरेटरी (NCL) पहुंचे। 2011 में उन्होंने यूके की प्रतिष्ठित कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से पीएचडी पूरी की।
उनका रिसर्च सफर और भी शानदार रहा। उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और अमेरिका के MIT (मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) में रिसर्च एसोसिएट के रूप में काम किया। IIT दिल्ली में असिस्टेंट प्रोफेसर रह चुके पाठक ने 43 रिसर्च पेपर प्रकाशित किए। 2011 से 2021 तक वे 490 रिसर्च वर्क में सहायक लेखक रहे। वैज्ञानिक दिमाग वाला यह शख्स राजनीति में आया तो AAP ने उन्हें 'चाणक्य' की उपाधि दी।
2020 में राजनीति में रखा कदम
2020 में उन्होंने IIT दिल्ली की स्थायी नौकरी छोड़कर पूर्णकालिक राजनीति में कदम रखा। 2022 में पंजाब से राज्यसभा सांसद बने और जल्द ही AAP के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बन गए। पंजाब और गुजरात चुनाव में वे पार्टी के चुनाव प्रभारी रहे। 2022 पंजाब विधानसभा चुनाव में AAP की भारी जीत के पीछे उनका रणनीतिक योगदान सबसे अहम था। डेटा-ड्रिवन कैंपेन, बूथ स्तर की तैयारी और युवा-किसान वोट बैंक को जोड़ने में उन्होंने कमाल किया। केजरीवाल उन्हें खुलकर 'मेरा अमित शाह' कहते थे।
अरविंद केजरीवाल के थिंक टैंक BJP में गया
अरविंद केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार माने जाने वाले संदीप पाठक का जाना AAP के लिए दोहरा झटका है। एक तरफ संगठन का मजबूत खंभा टूटा, दूसरी तरफ पंजाब में पार्टी की जड़ें हिल गई हैं। केजरीवाल के लिए पाठक ठीक वैसे ही थे, जैसे नरेंद्र मोदी के लिए अमित शाह। चुनावी रणनीति बनाने वाले, जमीन तैयार करने वाले, थिंक टैंक और संगठन को वैज्ञानिक ढंग से मजबूत करने वाले। अब यही शख्स BJP के साथ खड़ा है। 'राइट मैन, रॉन्ग पार्टी' कहकर पाठक और चड्ढा ने PM मोदी का समर्थन किया और BJP जॉइन कर लिया। यह AAP की आंतरिक कलह, सत्ता के केंद्र में तनाव और 2027 के पंजाब चुनाव से पहले की सबसे बड़ी बगावत है।
AAP में संदीप पाठक का योगदान: संगठन को नई ऊंचाई दी
AAP में शामिल होने से पहले पाठक एक मेधावी प्रोफेसर थे, लेकिन राजनीति में उन्होंने पार्टी को वैज्ञानिक और पेशेवर ढांचा दिया। राष्ट्रीय संगठन महासचिव के रूप में उन्होंने बूथ स्तर तक की संरचना को मजबूत किया। पंजाब में AAP की सरकार बनने के बाद वे संगठन विस्तार के प्रमुख चेहरे बने। दिल्ली, पंजाब, गुजरात और हरियाणा जैसे राज्यों में पार्टी की रणनीति उनके दिमाग से निकली।
वे हमेशा कहते थे कि AAP का एजेंडा साफ है: अस्पताल और स्कूल। संसद में भी उन्होंने CAPF बिल, रेलवे संशोधन बिल और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर BJP सरकार को घेरा। लेकिन हाल के महीनों में AAP के अंदरूनी तनाव बढ़े। राघव चड्ढा को राज्या सभा में डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने के बाद कलह खुलकर सामने आई। पाठक और चड्ढा ने 24 अप्रैल को संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पार्टी में आवाज दबाई जा रही थी, लेकिन हम हार नहीं मानेंगे। उन्होंने PM मोदी की नीतियों का समर्थन करते हुए BJP जॉइन करने का फैसला लिया।
2027 पंजाब चुनाव से पहले AAP पर क्यों पड़ा यह झटका?
पंजाब में AAP की सरकार है, लेकिन 2027 चुनाव से पहले पार्टी में दरारें दिखने लगी हैं। संदीप पाठक जैसे बौद्धिक और जमीनी नेता का जाना पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाएगा। पंजाब AAP की सबसे मजबूत सीटों में से एक है। 2022 में 92 सीटों पर जीत दर्ज कर AAP ने इतिहास रचा था। लेकिन अब किसान आंदोलन, बेरोजगारी, ड्रग्स और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर विपक्ष हमलावर है।
BJP के लिए यह बड़ा गेन है। एक IIT-कैंब्रिज पढ़ा हुआ, रिसर्च बैकग्राउंड वाला, वैज्ञानिक सोच रखने वाला नेता अब उनके संगठन में शामिल हो गया। BJP पंजाब में AAP के वोट बैंक को तोड़ने के लिए इस विद्रोह का फायदा उठाएगी। सूत्रों के मुताबिक, यह सामूहिक विद्रोह AAP की आंतरिक कलह का नतीजा है कि सत्ता के केंद्र में तनाव, फैसलों में एकाधिकार और युवा नेताओं की उपेक्षा। दिल्ली में भी AAP की सरकार पर सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के साथ टकराव जारी है। ऐसे में यह झटका केजरीवाल की रणनीति को और कमजोर करेगा।
AAP का भविष्य क्या होगा?
AAP 2012 में केजरीवाल द्वारा शुरू की गई एक आंदोलन-जनित पार्टी थी। 'आम आदमी' का नारा लेकर उसने दिल्ली, पंजाब और गुजरात में सरकार बनाई। लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार के साथ अंदरूनी कलह भी बढ़ी। 2025 दिल्ली चुनावों के बाद से पार्टी में बगावत के संकेत मिल रहे थे। संदीप पाठक का जाना दिखाता है कि अब सिर्फ छोटे-मोटे नेता नहीं, बल्कि कोर टीम के सदस्य पार्टी छोड़ रहे हैं।
BJP की रणनीति साफ है कि विपक्षी दलों को तोड़कर मजबूत करना। 2024 लोकसभा के बाद अब राज्य स्तर पर AAP को निशाना बनाया जा रहा है। पाठक जैसे नेता BJP को पंजाब में नई ऊर्जा देंगे। वे किसान, युवा और शिक्षित वर्ग को जोड़ सकते हैं। दूसरी तरफ AAP के पास अब चुनौतियां कई हैं कि संगठन को संभालना, पंजाब में सरकार चलाना और 2027 चुनाव की तैयारी। केजरीवाल को अब नए 'अमित शाह' की तलाश करनी होगी।
एक विद्रोह जो बदल सकता है पंजाब की सियासत
डॉ. संदीप पाठक का BJP में शामिल होना सिर्फ एक नेता का जाना नहीं, बल्कि AAP के अंदरूनी टूटने का संकेत है। छत्तीसगढ़ के एक छोटे गांव से निकलकर कैंब्रिज, ऑक्सफोर्ड, MIT और IIT तक पहुंचने वाला यह वैज्ञानिक अब राजनीति के बड़े मैदान में BJP के साथ नई भूमिका निभाएगा। 2027 पंजाब चुनाव में यह विद्रोह कितना असर डालेगा, यह समय बताएगा। लेकिन आज का दिन AAP के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो रहा है। क्या पार्टी इस झटके से उभरेगी या और दरारें आएंगी?













Click it and Unblock the Notifications