कौन हैं सपा महिला नेता गार्गी पटेल? जिन्हें बेरहमी से घर में घुसकर पीटा गया, समाजवादी नेता पर ही लगे आरोप
उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में इन दिनों कानून-व्यवस्था को लेकर भारी उबाल है। अमेठी में सपा विधायक के आवास पर हुए हंगामे की गूंज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि चंदौली जिले से एक बेहद खौफनाक और रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है। यहां समाजवादी पार्टी (सपा) की महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष गार्गी सिंह पटेल पर उनके ही घर में घुसकर जानलेवा हमला किया गया है।
इस घटना का एक सीसीटीवी (CCTV) फुटेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर किसी के भी होश उड़ जाएं। वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे एक महिला नेता गार्गी पटेल को बालों से पकड़कर करीब 10 मीटर तक जमीन पर बेरहमी से घसीटा गया, उन पर लात-घूसे बरसाए गए और सिर पर भारी टेबल दे मारी गई। इस बर्बर हमले में गार्गी पटेल गंभीर रूप से घायल हो गई हैं और फिलहाल अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही हैं। ऐसे में आइए जानें कौन हैं समाजवादी पार्टी की महिला नेता गार्गी पटेल।

कौन हैं गार्गी सिंह पटेल, जिन पर हुआ यह जानलेवा हमला? (Who Is SP Leader Gargi Singh Patel?)
गार्गी सिंह पटेल उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले की एक उभरती हुई और सक्रिय महिला राजनीतिज्ञ हैं। वह समाजवादी पार्टी के पिछड़ा वर्ग (OBC) के पटेल समाज से ताल्लुक रखती हैं। पार्टी संगठन में उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए उन्हें सपा महिला सभा का जिलाध्यक्ष बनाया गया था। वह लगातार पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय रहती थीं और हाल ही में लखनऊ में आयोजित सपा की एक बड़ी बैठक में भी शामिल हुई थीं।
राजनीति के साथ-साथ गार्गी पटेल पिछले 15 सालों से बड़े स्तर पर जमीन की खरीद-बिक्री यानी प्रॉपर्टी का कारोबार भी करती हैं। उनका यह बिजनेस वाराणसी के काशी विद्यापीठ ब्लॉक के पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख और सूजाबाद के रहने वाले प्यारेलाल यादव (प्यारे मामा) के साथ पार्टनरशिप में चल रहा था।
रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात: 2 मिनट में 15 से ज्यादा लातें
यह पूरी वारदात चंदौली जिले के मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र के तहत आने वाले मड़िया पड़ाव इलाके की है। गुरुवार (28 मई) की दोपहर को गार्गी पटेल अपने घर में सो रही थीं। तभी उनके बिजनेस पार्टनर प्यारेलाल यादव जमीन के एक रास्ते के विवाद के सिलसिले में स्थानीय प्रधान से मिलने के लिए उनके घर आए। दोनों के बीच बातचीत चल ही रही थी कि अचानक प्यारेलाल के पीछे-पीछे उनके परिवार के लोग- पत्नी उर्मिला देवी, दो बेटे (सपा नेता मनोज यादव और अमित यादव) और बेटी डाली (मोनी) भी घर का दरवाजा पीटते हुए अंदर घुस आए।
घर में दाखिल होते ही इन लोगों ने गार्गी पटेल की बेटी को भद्दी गालियां देना शुरू कर दिया। जब गार्गी पटेल ने इसका विरोध किया, तो सभी उन पर टूट पड़े। हमलावरों ने गार्गी पटेल के बाल पकड़े और उन्हें कमरे से बाहर खींचते हुए जमीन पर करीब 10 मीटर तक घसीटा। लगभग दो मिनट तक चले इस तांडव में महिला नेता पर 15 से ज्यादा लातें और अनगिनत घूंसे बरसाए गए। जब गार्गी पटेल को बचाने के लिए उनकी बहन और एक बुजुर्ग सामने आए, तो हमलावरों ने उन्हें भी धक्का देकर गिरा दिया। इसके बाद हमलावरों ने गार्गी पटेल के सिर पर लकड़ी की भारी टेबल दे मारी, जिससे उनकी आंख और सिर पर गंभीर चोटें आईं। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।

गार्गी पटेल ने लगाए सपा-भाजपा पर आरोप
होश में आने के बाद जिला अस्पताल से गार्गी सिंह पटेल का एक बयान सामने आया है, जिसने इस मामले को और ज्यादा पेचीदा बना दिया है। गार्गी पटेल का कहना है कि यह हमला अचानक नहीं हुआ, बल्कि यह एक प्री-प्लान्ड (सोची-समझी) साजिश थी।
गार्गी पटेल ने आरोप लगाया कि उन्होंने कई जमीनों में करोड़ों रुपये लगा रखे हैं। उनके बिजनेस पार्टनर के परिवार की नीयत उनके पैसे हड़पने की थी। उन्होंने इस साजिश में समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कुछ स्थानीय नेताओं की मिलीभगत का दावा भी किया।
गार्गी पटेल के मुताबिक, बीजेपी का एक लड़का मुखबिरी कर रहा था और हमलावरों को पल-पल की लोकेशन दे रहा था कि वह कब कहां जाती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी ही पार्टी के एक नेता सिद्धांत जायसवाल ने कुछ दिन पहले पार्टी कार्यालय में उन्हें मजाक-मजाक में धमकी दी थी और उन्होंने ही प्यारेलाल के घरवालों को उनके खिलाफ भड़काया था।
सपा नेता सिद्धांत जायसवाल का पलटवार: छवि खराब करने का षड्यंत्र
इस मामले में नाम सामने आने के बाद मुगलसराय विधानसभा (380) से सपा के टिकट के तगड़े दावेदार सिद्धांत जायसवाल ने मीडिया के सामने आकर अपनी सफाई दी है। उन्होंने इस मारपीट की घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि कारण चाहे जो भी हो, किसी महिला के साथ ऐसी बर्बरता बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
हालांकि खुद पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सिद्धांत जायसवाल ने कहा कि इस मारपीट से उनका दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। वह घटना के वक्त मौके पर भी मौजूद नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि चूंकि वह मुगलसराय सीट से विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे हैं और उनकी दावेदारी बहुत मजबूत है, इसलिए राजनीतिक द्वेष के तहत उनकी साफ-सुथरी छवि को बदनाम करने के लिए साजिश के तहत एफआईआर (FIR) में उनका नाम घसीटा गया है।
क्या कहती है चंदौली पुलिस और राजनीतिक दल?
घटना के बाद चंदौली के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। सपा के जिला अध्यक्ष सत्यनारायण राजभर ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह घटना किसी व्यापारिक और जमीनी विवाद से जुड़ी हुई लग रही है। पार्टी इसकी पूरी आंतरिक जानकारी जुटा रही है। उन्होंने सूबे की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर एक महिला नेता अपने ही घर के भीतर सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा?
इस मामले में कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस भी अब एक्शन मोड में है। चंदौली के अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) अनंत चंद्रशेखर और क्षेत्राधिकारी (CO) अरुण कुमार सिंह ने बताया कि पीड़ित पक्ष की तरफ से मिली तहरीर और व्हाट्सएप शिकायत के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। मुगलसराय कोतवाली में सपा नेता सिद्धांत जायसवाल, उर्मिला देवी, अमित यादव, मनोज यादव और मोनी यादव समेत कुल 5 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस की कई टीमें फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।












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