Video: 'खुदा से अच्छे तो मोदी हैं', जावेद अख्तर की बात सुन मौलाना को क्यों लगी मर्ची? कौन हैं मुफ्ती नदवी?
Javed Akhtar On PM Narendra modi: ''खुदा से अच्छे तो अपने प्राइम मिनिस्टर (मोदी) हैं'' ये बयान मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने एक बहस के दौरान इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती शमाइल नदवी को जवाब देते हुए कहा।जिसपर सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा हो रही है। अब सवाल उठता है कि पीएम नरेंद्र मोदी के लिए आखिर जावेद अख्तर ने ऐसा क्यों कहा और मुफ्ती शमाइल नदवी कौन हैं। ऐसे में आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला।
दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में '' Does God Exist'' (क्या भगवान हैं) पर चर्चा हो रही थी, मंच पर आमने-सामने थे जावेद अख्तर और मुफ्ती शमाइल नदवी। शुरुआत में शांति और तर्क के साथ चल रही चर्चा एक वक्त पर इतनी तीखी हो गई कि हॉल के बाहर तक इसकी गूंज सुनाई देने लगी।

बहस का सवाल यही था कि 'अगर खुदा या भगवान सर्वशक्तिमान हैं और उनकी मर्जी के बिना कुछ भी नहीं होता, तो फिर दुनिया में रेप, हत्या और युद्ध जैसी घटनाएं क्यों हो रही हैं' जावेद अख्तर ने खास तौर पर गाजा की स्थिति का जिक्र किया और कहा कि वहां हजारों बच्चों की जान जा चुकी है। सवाल सीधा था - अगर भगवान सब देख रहे हैं, तो वो इसे रोक क्यों नहीं रहे?
मौलाना मुफ्ती नदवी का तर्क: इंसान को मिली है 'फ्री विल'
मौलाना मुफ्ती शमाइल नदवी ने जवाब में कहा, ''भगवान ने इंसानों को स्वतंत्र इच्छा यानी फ्री विल दी है। अगर कोई इंसान बुरा काम करता है, तो उसकी जिम्मेदारी इंसान की है, खुदा की नहीं।''
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे डॉक्टर बच्चे को इंजेक्शन लगाता है, बच्चे को दर्द होता है लेकिन बड़े नजरिए से वो इलाज के लिए जरूरी है। इंसान सीमित नजरिए से देखता है, जबकि खुदा की योजना कहीं ज्यादा व्यापक होती है। नदवी ने यह भी कहा कि गाजा में जो लोग पीड़ित हैं, उन्हें आगे चलकर मुआवजा मिलेगा, जिसे इंसान अभी नहीं देख पा रहा।
जावेद अख्तर का पलटवार और 'मोदी' का जिक्र
मुफ्ती के इस तर्क पर जावेद अख्तर ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा, ''अगर खुदा रोजमर्रा की जिंदगी में दखल देता है, लोगों की दुआएं सुनता है, तो फिर बच्चों की भूख और मौत क्यों नहीं रोकता? उन्होंने कालाहांडी जैसे इलाकों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां आज भी बच्चे बीमारी और कुपोषण से मरते हैं।''
इसी दौरान जावेद अख्तर ने हल्के तंज में कहा - "अरे यार, इससे अच्छे तो हमारे प्राइम मिनिस्टर हैं। कुछ तो ख्याल करते हैं।" हालांकि उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी का नाम नहीं लिया, लेकिन इशारा साफ था। इस टिप्पणी पर हॉल में हंसी गूंज उठी, लेकिन माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया।
कौन हैं मुफ्ती नदवी? (Who is mufti shamail nadwi)
🔹मुफ्ती शमाइल नदवी का पूरा नाम शमाइल अहमद अब्दुल्ला है। उनका जन्म 7 जून 1998 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुआ। उनके पिता मौलाना अबु सईद कोलकाता के जाने-माने इस्लामिक स्कॉलर माने जाते हैं। धार्मिक माहौल में पले-बढ़े शमाइल का रुझान बचपन से ही धर्म और दर्शन की ओर रहा और शुरुआती इस्लामिक शिक्षा उन्हें अपने पिता से ही मिली।
🔹कुरान की बुनियादी तालीम के बाद साल 2014 में उन्होंने लखनऊ स्थित दारुल उलूम नदवतुल उलेमा में दाखिला लिया। यहां छह साल की गहन पढ़ाई के दौरान उन्होंने कुरान, हदीस, फिक़्ह और इस्लामी धर्मशास्त्र का अध्ययन किया और मुफ्ती की डिग्री हासिल की। नदवा से शिक्षा लेने के कारण उन्होंने अपने नाम के साथ 'नदवी' जोड़ लिया।
🔹नदवतुल उलेमा से पढ़ाई पूरी करने के बाद मुफ्ती शमाइल नदवी ने उच्च शिक्षा के लिए मलेशिया का रुख किया, जहां वे इस्लामिक स्टडीज में पीएचडी कर रहे हैं। शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ वे मरकज़-अल-वहयैन नामक ऑनलाइन शैक्षिक संस्थान के संस्थापक और प्रधानाचार्य भी हैं। साल 2024 में उन्होंने वाहियान फाउंडेशन की स्थापना की, जिसके जरिए इस्लामिक शिक्षा और समाजसेवा से जुड़े कार्य किए जाते हैं।
🔹मुफ्ती शमाइल नदवी एक चर्चित इस्लामिक स्कॉलर और वक्ता हैं। यूट्यूब और सोशल मीडिया पर वे इस्लाम, विज्ञान, आस्था और नास्तिकता जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा करते हैं। अपनी साफ-सुथरी और तर्कपूर्ण शैली के कारण खासकर मुस्लिम युवाओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।
दो घंटे चली बहस, आस्था बनाम तर्क
करीब दो घंटे चली इस चर्चा का संचालन द लल्लनटॉप के एडिटर सौरभ द्विवेदी कर रहे थे। बहस में आस्था, तर्क, विज्ञान और नैतिकता जैसे मुद्दे बार-बार टकराते दिखे। जावेद अख्तर ने कहा कि धर्म के नाम पर दुनिया में हिंसा फैलाई जाती है और यही बात उन्हें ईश्वर की अवधारणा पर सवाल उठाने को मजबूर करती है।
मुफ्ती नदवी ने कहा कि न तो विज्ञान और न ही धर्मग्रंथ, भगवान को पूरी तरह साबित या खारिज कर सकते हैं। विज्ञान भौतिक दुनिया तक सीमित है, जबकि भगवान उससे परे हैं। वहीं जावेद अख्तर ने जवाब दिया कि वो खुद को सर्वज्ञानी नहीं मानते, बल्कि सवाल करना ही इंसान की सबसे बड़ी ताकत है। उनका कहना था कि नैतिकता इंसान द्वारा बनाई गई चीज है, न कि ईश्वर द्वारा दी गई कोई तय व्यवस्था।
क्यों अहम है ये बहस?
यह बहस सिर्फ जावेद अख्तर और मुफ्ती नदवी के बीच की नोकझोंक नहीं थी, बल्कि आस्था और तर्क के बीच चल रही उस बड़ी लड़ाई की झलक थी, जो आज भी समाज में मौजूद है। 'खुदा से अच्छे तो मोदी हैं' वाली टिप्पणी ने इसे राजनीतिक रंग भी दे दिया, जिसने सोशल मीडिया से लेकर बौद्धिक हलकों तक नई बहस छेड़ दी। यही वजह है कि यह वीडियो और यह चर्चा अब सिर्फ एक बहस नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय बहस बन चुकी है।
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