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कौन हैं MIT की भारतीय मूल की छात्रा Megha Vemuri? जिसके 'प्रो-पैलेस्टाइन' भाषण से सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस

Megha Vemuri MIT speech: अमेरिका की मशहूर यूनिवर्सिटी मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) में पढ़ने वाली भारतीय मूल की छात्रा मेघा विमुरी इस समय सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं।

मेघा, जो MIT की क्लास ऑफ 2025 की अध्यक्ष (President) भी हैं, ने हाल ही में दीक्षांत समारोह (Graduation Ceremony) के दौरान एक फिलिस्तीन-समर्थक भाषण दिया, जिसके बाद उन्हें सोशल मीडिया पर भारी आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है।

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Who is Megha Vemuri: कौन हैं मेघा विमुरी

मेघा भारतीय मूल की एक अमेरिकी छात्रा हैं जिन्होंने प्रतिष्ठित मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है। वह MIT की ग्रेजुएटिंग क्लास 2025 की अध्यक्ष भी रही हैं। मेघा अमेरिका के जॉर्जिया के अल्फारेटा शहर में पैदा हुई और वहीं से अपनी स्कूली शिक्षा अल्फ़ारेटा हाई स्कूल से पूरी की। 2021 में हाई स्कूल से ग्रेजुएशन की डिग्री ली और इसी साल MIT में प्रवेश लिया। जहाँ उन्होंने कंप्यूटर साइंस, न्यूरोसाइंस और लिंग्विस्टिक्स से अपनी पढ़ाई पूरी की।

MIT में पढ़ाई के साथ-साथ मेघा विभिन्न सामाजिक और वैचारिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहीं। वे "Written Revolution" नामक एक छात्र संगठन से जुड़ी हुई हैं, जो क्रांतिकारी विचारों को मंच देने का कार्य करता है। यह संगठन MIT के छात्रों द्वारा संचालित होता है और सामाजिक, राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर विचार रखने को प्रोत्साहित करता है।

मेघा वेमुरी का अकादमिक और सामाजिक अनुभव अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हुआ है। MIT में दाखिला लेने से पहले वे दक्षिण अफ्रीका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ केपटाउन (UCT) न्यूरोसाइंस इंस्टीट्यूट में रिसर्च इंटर्न के रूप में भी कार्य कर चुकी हैं।

Megha Vemuri MIT speech: क्या कहा था मेघा विमुरी ने?

मेघा ने अपने भाषण में MIT और इजरायल (Israel) के बीच हो रहे अनुसंधान सहयोग (research ties) की आलोचना की और कहा कि इस सहयोग के जरिए इजरायल की सेना को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, "इजरायली सेना वो एकमात्र विदेशी सैन्य ताकत है जिससे MIT के अनुसंधान संबंध हैं। इसका मतलब है कि इज़रायल द्वारा फिलिस्तीनी लोगों पर किया जा रहा हमला न सिर्फ हमारे देश द्वारा समर्थित है, बल्कि हमारा स्कूल भी इसमें शामिल है।"

यह बयान उन्होंने उस भाषण में दिया जो उन्होंने पहले MIT को जमा नहीं कराया था। MIT का कहना है कि यह भाषण पहले से स्वीकृत नहीं था और मंच से यह बयान देकर मेघा ने नियमों का उल्लंघन किया।

MIT ने उठाया कड़ा कदम

NBC News की रिपोर्ट के अनुसार, MIT ने मेघा को दीक्षांत समारोह के अन्य कार्यक्रमों में शामिल होने से रोक दिया। विश्वविद्यालय की प्रवक्ता किम्बर्ली एलन ने बताया, "उस छात्रा की आज के कार्यक्रम में एक भूमिका तय थी, लेकिन उसे पहले ही सूचित कर दिया गया था कि वह कार्यक्रम में भाग नहीं ले सकती।"

प्रवक्ता ने आगे कहा, "MIT अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन करता है, लेकिन यह कार्रवाई उस छात्रा द्वारा समारोह के आयोजकों को गुमराह करने और मंच से विरोध प्रदर्शन करने के कारण की गई है, जिससे समारोह में बाधा उत्पन्न हुई।"

Megha Vemuri पर इजरायली CEO ने की टिप्पणी

इस विवाद में इज़रायली मूल के एक क्रिप्टो कंपनी के CEO Ouriel Ohayon ने भी हिस्सा लिया और मेघा के खिलाफ एक अपमानजनक पोस्ट किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "इस लड़की को बदनाम करो। मैं चाहता हूं कि इसे कभी कोई नौकरी न मिले और यह जिंदगी भर अपमान झेले। और मेघा, अगर तुम कूल लगना चाहती हो, तो अपने 'rrrrrhaazzzza' लहजे पर काम करो।"

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इसके साथ ही उन्होंने मेघा का लिंक्डइन प्रोफाइल भी शेयर किया, जो अब डिएक्टिवेट हो चुका है।

Megha Vemuri के भाषण से सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा

मेघा के इस भाषण के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें लेकर बहुत नकारात्मक टिप्पणियाँ की जा रही हैं। कुछ लोग उन्हें 'देशद्रोही', 'नाटकबाज' जैसे शब्दों से बुला रहे हैं।

  • एक उपयोगकर्ता ने लिखा, "उसे मंच से उतार कर तुरंत देश से निकाल देना चाहिए था।"
  • दूसरे ने कहा, "अगर उसे फिलिस्तीन की इतनी चिंता है तो गाज़ा जाकर वहां के लोगों की मदद क्यों नहीं करती?"
  • तीसरे ने लिखा, "उसका बयान पूरी तरह से अस्वीकार्य है।"

हालांकि आलोचना के बीच कुछ लोग मेघा के पक्ष में भी खड़े दिखाई दिए। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने , "जब तक मंच पर नफरत नहीं फैलाई जाती, तब तक किसी भी छात्र को उसकी बात कहने से नहीं रोका जाना चाहिए। मेघा ने एक संस्थागत संबंध की बात की है, जिसे छिपाया नहीं जाना चाहिए।"

इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया पर एक बार फिर से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech) बनाम संस्थागत नियमों के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है।

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