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जानिए, कौन हैं 2G केस में फैसला सुनाने वाले जस्टिस ओपी सैनी

जस्टिस ओपी सैनी हरियाणा के रहने वाले हैं। उन्होंने अपना करियर दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के तौर पर शुरू किया था।

नई दिल्ली। देश की सियासत में भूचाल मचाने वाले बहुचर्चित 2जी केस में दिल्ली की सीबीआई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ए राजा और राज्यसभा सांसद कनिमोई समेत 17 आरोपियों को बरी कर दिया है। सीबीआई कोर्ट के जज ओपी सैनी ने इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि आरोपियों को दोषी सिद्ध करने में सीबीआई पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाई। जस्टिस ओपी सैनी दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर भी रह चुके हैं। आइए जानते हैं इस मामले में फैसला सुनाने वाले जस्टिस ओपी सैनी के बारे में।

6 साल तक पुलिस सेवा में रहे

6 साल तक पुलिस सेवा में रहे

बिजनेस स्टैंडर्ड में छपे आर्टिकल के मुताबिक जस्टिस ओम प्रकाश सैनी हरियाणा के रहने वाले हैं। उन्होंने अपना करियर दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के तौर पर शुरू किया था। दिल्ली पुलिस में 6 साल नौकरी करने के बाद उन्होंने ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की परीक्षा दी और उसमें सफल होकर जज के तौर पर न्यायिक सेवा में अपना करियर शुरू किया। जस्टिस ओपी सैनी इससे पहले कॉमनवेल्थ गेम्स मामले की भी सुनवाई कर चुके हैं।

खारिज की थी कनिमोई की जमानत याचिका

खारिज की थी कनिमोई की जमानत याचिका

जस्टिस ओपी सैनी अपने सख्त स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। 2जी मामले की सुनवाई के दौरान नवंबर 2011 में अटकलें थी कि जस्टिस सैनी कनिमोई को जमानत दे देंगे। दरअसल कोर्ट में दी गई जमानत याचिका में कहा गया था कि कनिमोई महिला हैं और काफी समय जेल में काट चुकी हैं। इसपर जस्टिस सैनी ने यह कहते हुए कि वो एक बड़ी राजनेता हैं और गवाहों की सुरक्षा को खतरे में नहीं डाला जा सकता, उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके अलावा एक मामले की सुनवाई दौरान उन्होंने आपस में बातचीत करने पर एक बड़े बिजनेसमैन के परिवार के सदस्यों को भी भरी कोर्ट में डांट दिया था।

सुनील मित्तल, असीम घोष और रवि रुइया को समन

सुनील मित्तल, असीम घोष और रवि रुइया को समन

2जी केस में ही जस्टिस ओपी सैनी ने मार्च 2017 में सीआरपीसी के सेक्शन 19 के अंतर्गत अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए भारती सेलुलर लिमिटेड के चेयरमैन और प्रबंधन निदेशक सुनील मित्तल, हचीसन मैक्स के असीम घोष और स्टर्लिंग सेलुलर के निदेशक रवि रुइया को समन जारी कर दिया था। जस्टिस ओपी सैनी ने 2जी केस के अलावा नेशनल एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (नाल्को) के रिश्वत घोटाले की भी सुनवाई की थी। इस केस में उन्होंने नाल्को के चेयरमैन एके श्रीवास्तव को जमानत देने से इंकार कर दिया था।

आतंकी हमले में फांसी की सजा

आतंकी हमले में फांसी की सजा

जस्टिस सैनी को अपने बड़े फैसलों के लिए जाना जाता है। दिसंबर 2000 में लाल किले पर हुए आतंकी हमले में जस्टिस सैनी ने मुख्य आरोपी मोहम्मद आरिफ को फांसी की सजा सुनाते हुए अन्य 6 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जस्टिस ओपी सैनी के इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी कायम रखा था। इस हमले में 3 जवान शहीद हुए थे।

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