जस्टिस अरुणा जगदीशन कौन हैं? एक्टर विजय की करूर रैली में मची भगदड़ घटना की करेंगी जांच
Who Is Justice Aruna Jagadeesan? करूर में तमिलनाडु वेत्री कड़गम के अध्यक्ष विजय की चुनावी रैली में हुए भगदड़ से जुड़ी एक दुखद खबर सामने आई है। इस हादसे में 36 लोगों की मौत हो गई, जिसने पूरे तमिलनाडु को झकझोर कर रख दिया है।तमिलनाडु के करूर जिले में एक्टर से नेता बने विजय की रैली जहां 36 लोगों के जीवन के लिए काल बन गई वहीं कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
इस घटना की जांच के लिए, मुख्यमंत्री स्टालिन ने सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश अरुणा जगदीसन की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग के गठन की घोषणा की है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना जिसमें 30 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। इस हादसे की सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण में हुई चूक की तत्काल जांच के लिए गठित किए आयोग की की प्रमुख नियुक्ति की गई रिटायर्ड न्यायमूर्ति अरुणा जगदीशन कौन हैं?

बता दें मुख्यमंत्री स्टालिन ने बताया कि 27 सितंबर, 2025 को करूर में तमिलनाडु वेत्री कड़गम की राजनीतिक रैली में हुई भगदड़ में 8 बच्चों और 16 महिलाओं सहित कुल 36 लोगों के मारे जाने की खुद पुष्टि की है। इसके बाद उन्होंने ये जांच आयोग गठित किया है।
कौन हैं न्यायमूर्ति जगदीशन?
न्यायमूर्ति जगदीशन का ट्रैक रिकॉर्ड राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों को संभालने में साबित हुआ है। अरुणा जगदीसन वही न्यायाधीश हैं, जिन्होंने तूतीकोरिन स्टरलाइट गोलीबारी कांड की जांच की थी। उनकी पहचान स्पष्ट रिपोर्ट देने वाली न्यायाधीश के रूप में है, जिसे अक्सर "स्पष्टवादी" बताया जाता है।
थोथुकुडी आयोग और कई न्यायिक मामलों से जुड़े उनके विवादास्पद अतीत के बावजूद, उन्हें इस उच्च-दांव वाली जांच का नेतृत्व करने के लिए चुना गया है।
जनता उन्हें 2018 में थोथुकुडी में स्टरलाइट विरोधी प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फायरिंग की जांच करने वाले एक-सदस्यीय आयोग की अध्यक्ष के रूप में जानती है। इस घटना में 13 नागरिकों की मौत हुई थी। उनकी अंतिम रिपोर्ट में पुलिस कार्रवाई को "अनुचित" और "अंधाधुंध" बताया गया था, जिसके परिणामस्वरूप कई पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर आरोप लगे थे। थोथुकुडी रिपोर्ट की गंभीरता ने उन्हें एक आधिकारिक प्रशासनिक जांचकर्ता के रूप में स्थापित किया।
इन प्रशासनिक भूमिकाओं से पहले, न्यायमूर्ति अरुणा जगदीशन ने मार्च 2015 में अपनी सेवानिवृत्ति तक 2009 से मद्रास हाई कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में कार्य किया। हालांकि, उनके न्यायिक कार्यकाल में कई विवादास्पद निर्णय शामिल हैं, जिन्होंने कानूनी कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार समूहों से अलोचना मिली।
इनमें 2015 का वेलाचेरी "फर्जी मुठभेड़" मामला सबसे उल्लेखनीय है। एक हाई कोर्ट बेंच के हिस्से के रूप में, उन्होंने बैंक डकैती के संदिग्ध पांच लोगों की मौत के संबंध में चेन्नई पुलिस को क्लीन चिट दी थी। उन्होंने सीबीआई जांच की याचिकाओं को खारिज करते हुए पुलिस कार्रवाई को न्यायोचित ठहराया था।
इसी तरह, उन्होंने 2002 में दलित महिला करूपी की हिरासत में हुई मौत की अपील पर सुनवाई की। पीड़िता पर कथित यातना को लेकर सार्वजनिक आक्रोश के बावजूद, न्यायमूर्ति जगदीशन ने निचले अदालत के दोषसिद्धि को पलट दिया और अपर्याप्त सबूतों के कारण आठ पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया। वह पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के वित्तीय लेनदेन से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामलों में भी शामिल थीं।
इन विवादास्पद न्यायिक निर्णयों के बावजूद, न्यायमूर्ति अरुणा जगदीशन तमिलनाडु के प्रशासनिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण और सक्रिय व्यक्ति बनी हुई हैं। वह सरकारी चयन पैनलों की अध्यक्षता करना जारी रखती हैं, जिसमें 2025 में डॉ. अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय के कुलपति की सिफारिश के लिए गठित पैनल भी शामिल है।












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