कौन हैं जस्टिस एके पटनायक, जिनकी निगरानी में होगी सीबीआई मामले की जांच

नई दिल्ली। सीबीआई के दो शीर्ष अधिकारियों को रिश्वत के आरोपों के बाद छुट्टी पर भेज दिया गया है, जिसके खिलाफ सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा सुप्रीम कोर्ट चले गए हैं। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई की है। सुप्रीम कोर्ट ने सीवीसी को रिटायर्ड जस्टिस एके पटनायक के नेतृत्व में जांच कर दो हफ्ते में रिपोर्ट देने को कहा है। इसके बाद जस्टिस पटनायक का नाम भी चर्चा में है। आइए जानते हैं कौन हैं जस्टिस एके पटनायक।

ओडिशा से वकालत की शुरुआत

ओडिशा से वकालत की शुरुआत

एके पटनायक 2009-14 के दौरान सुप्रीम कोर्ट में जज रहे हैं। 69 साल के जस्टिस पटनायक ओडिशा से आते हैं। जस्टिस पटनायक का जन्म 1949 में ओडिशा में हुआ। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से राजनीति शास्त्र में स्नातक और कटक से कानून की पढ़ाई की है। वकालत की शुरुआत उन्होंने ओडिशा से ही की। 1974 में वो ओडिशा बार एसोसिशन के सदस्य बने। दो दशक की वकालत के बाद 1994 में वो ओडिशा हाईकोर्ट के अतिरिक्त सेशन जज बने।

2009 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने

2009 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने

ओडिशा हाईकोर्ट में अतिरिक्त सेशन जज रहने के बाद उनको गुवाहाटी भेज दिया गया। जस्टिस पटनायक सात साल तक गुवाहाटी हाईकोर्ट में जज रहे। 2002 में उन्हें वापस ओडिशा भेज दिया गया। 2005 में जस्टिस एके पटनायक को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया। छह माह बाद वो मध्‍य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बनाए गए।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में बतौर चीफ जस्टिस कुछ माह के उनके कार्यकाल ने सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रमेश चंद्र लाहोटी का ध्यान खींचा था। जस्टिस लोहानी ने उनकी तारीफ भी की थी। नवंबर 2009 में जस्टिस एके पटनायक सुप्रीम कोर्ट के जज बने। पांच साल के कार्यकाल के बाद 2014 में जस्टिस एके पटनायक सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए।

कई चर्चित केस से जुड़े रहे जस्टिस पटनायक

कई चर्चित केस से जुड़े रहे जस्टिस पटनायक

जस्टिस पटनायक अपने कार्यकाल के दौरान कलकत्‍ता हाईकोर्ट के जस्टिस सौमित्र सेन के चर्चित केस से जुड़े। जस्टिस सौमित्र सेन के खिलाफ पैसे की हेराफेरी के आरोपों के मद्देनजर इन हाउस कमेटी का गठन किया गया था, जस्टिस पटनायक उस कमेटी में शामिल थे। कमेटी ने जस्टिस सेन को दोषी पाया और उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

जस्टिस पटनायक 2जी स्पेक्ट्रम मामले की सुनवाई के लिए मार्च 2016 में बनाई गई दो जजों की बेंच में शामिल थे। इसके अलावा मतदान के दौरान नोटा का वैकल्पिक प्रावधान देने के मामले, आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग मामले की सुनवाई में भी जस्टिस पटनायक सुप्रीम कोर्ट की बेंच में शामिल रहे।

जस्टिस पटनायक उस बेंच में भी शामिल थे, जिसने विधायक या सांसद के आपराधिक मामले में दोषी करार दिया जाने पर छह साल तक चुनाव नहीं लड़ सकने का फैसला दिया था।

जस्टिस एके पटनायक ने कोर्ट में जजों की नियुक्ति पर कॉलेजियम सिस्टम पर सवाल उठाए थे। इसके चलते वह सुर्खियों में रहे। 2016 में पटनायक कहा था कि कॉलेजियम सिस्टम की वजह से जजों की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा।

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