'आप मुझसे ऐसे बात नहीं कर सकते', कौन हैं CEC से भिड़ने वाले IAS अनुराग यादव? हो गई ऑब्जर्वर पद से छुट्टी
IAS Anurag Yadav Controversy: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच प्रशासनिक गलियारों में एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी अनुराग यादव (IAS Anurag Yadav) को चुनाव आयोग ने जनरल ऑब्जर्वर (General Observer) के पद से तत्काल हटा दिया है।
यह कार्रवाई एक हाई-प्रोफाइल वर्चुअल मीटिंग में हुई तीखी नोकझोंक के बाद की गई है। 2000 बैच के अधिकारी और वर्तमान में UP में प्रिंसिपल सेक्रेटरी की रैंक संभाल रहे अनुराग यादव का चुनाव आयोग के शीर्ष नेतृत्व से सीधा टकराव चर्चा का विषय बन गया है।

वो एक सवाल जिस पर अटके IAS, क्या है पूरा मामला?
घटना उस वक्त की है जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (CEC Gyanesh Kumar) पश्चिम बंगाल (West Bengal Assembly Election 2026) के लिए तैनात ऑब्जर्वर्स के साथ समीक्षा बैठक कर रहे थे। मीटिंग के दौरान अधिकारियों से उनके आवंटित क्षेत्रों की बुनियादी जानकारियां पूछी जा रही थीं।
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जब कूच बिहार साउथ के ऑब्जर्वर अनुराग यादव की बारी आई, तो उनसे उनके क्षेत्र में कुल पोलिंग स्टेशनों की संख्या पूछी गई। सूत्रों के मुताबिक, यादव इस सामान्य से सवाल का तुरंत जवाब नहीं दे पाए और डेटा चेक करने के लिए वक्त मांगने लगे। आयोग ने इसे गंभीरता से लिया क्योंकि एक ऑब्जर्वर से अपने क्षेत्र की पूरी भौगोलिक और सांख्यिकीय जानकारी कंठस्थ होने की उम्मीद की जाती है।
'मुझसे ऐसे बात नहीं कर सकते', IAS-CEC के बीच बहस
तैयारी में कमी देख जब मुख्य चुनाव आयुक्त ने सख्त लहजे में टिप्पणी की, तो अनुराग यादव ने भी अपनी वरिष्ठता का हवाला देते हुए मोर्चा खोल दिया। उन्होंने दो टूक कहा, "आप मुझसे इस तरह बात नहीं कर सकते, मैंने भी इस सेवा में 25 साल बिताए हैं।" इस अचानक हुए पलटवार ने मीटिंग में सन्नाटा पसर गया। हालांकि बैठक आगे बढ़ी, लेकिन चुनाव आयोग ने अनुशासन और चुनावी गंभीरता के मद्देनजर तत्काल कड़ा फैसला सुनाते हुए उन्हें जनरल ऑब्जर्वर के पद से हटा दिया।
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कौन हैं IAS अनुराग यादव? (IAS Anurag Yadav Profile)
अनुराग यादव उत्तर प्रदेश के अनुभवी अफसरों में गिने जाते हैं। 2000 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के IAS अनुराग यादव वर्तमान में UP सरकार के समाज कल्याण और सैनिक कल्याण विभाग में प्रिंसिपल सेक्रेटरी हैं। कृषि स्नातक और MBA की डिग्री रखने वाले यादव ने अपने 24-25 सालों के करियर में जिलाधिकारी और IT विभाग जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। उनकी छवि अब तक एक शांत और नीतियों पर चलने वाले अधिकारी की रही है, लेकिन बंगाल चुनाव की इस घटना ने उनके रिकॉर्ड में एक नया विवाद जोड़ दिया है।
चुनाव आयोग ने बताई IAS अधिकारी को पद से हटाने की वजह
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई का आधार केवल बहस नहीं, बल्कि काम के प्रति तैयारी की कमी है। आयोग के अनुसार, चुनाव ड्यूटी पर तैनात जनरल ऑब्जर्वर आयोग के 'आंख और कान' होते हैं। कूच बिहार जैसे संवेदनशील जिलों में, जहां सुरक्षा और शांतिपूर्ण मतदान एक बड़ी चुनौती है, वहां का ऑब्जर्वर अगर बुनियादी आंकड़ों से अनभिज्ञ है, तो यह पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है। इसी तर्क के साथ यादव की जगह तुरंत दूसरे अधिकारी को कमान सौंप दी गई।
क्या होती है चुनाव में ऑब्जर्वर की अहमियत
यह पूरा मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। संवेदनशील बूथों की सुरक्षा से लेकर वहां की बुनियादी सुविधाओं तक की रिपोर्ट सीधे ऑब्जर्वर ही तैयार करते हैं। आयोग का मानना है कि यदि कोई सीनियर अधिकारी कई दिनों तक फील्ड पर रहने के बाद भी बेसिक जानकारी नहीं दे पाता, तो यह उसकी चुनावी सक्रियता पर संदेह पैदा करता है। इस सख्त कार्रवाई के जरिए आयोग ने देशभर के अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया है कि चुनावी ड्यूटी में अनुभव से ज्यादा महत्व जवाबदेही और तैयारी का है।
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