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9 गोलियां लगने के बावजूद आतंकियों पर कहर बनकर टूटा CRPF का जख्‍मी 'शेर' चेतन कुमार चीता

बांदीपोर के हाजिन में 14 फरवरी को हुए एनकाउंटर में बुरी तरह से घायल हुए सीआरपीएफ कमांडेंट चेतन चीता। शरीर के अलग-अलग हिस्‍सों में लगी हैं नौ गोलियां। जख्‍मी होने से पहले लश्‍कर के आतंकी को किया ढेर।

नई दिल्‍ली। आपने सुना होगा कि जख्‍मी शेर अक्‍सर खतरनाक होता है सीआरपीएफ कमांडेंट चेतन चीता ने इस बात को सही साबित कर दिया है। आतंकवादियों की लाख कोशिशों के बावजूद चीता ने उनके मंसूबों को सफल नहीं होने दिया और एक आतंकी को मार कर ही सांस ली। शनिवार को सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत उन्‍हें देखने के लिए एम्‍स पहुंचे थे।

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लश्‍कर के आतंकियों से अकेले ही भिड़ गए

अगर आप पहली बार चेतन चीता का नाम सुन रहे हैं तो आपको बता दें कि चेतन 14 फरवरी को बांदीपोर मे हुए एनकाउंटर में बुरी तरह से जख्‍मी हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग और बॉक्‍सर विजेंद्र सिंह जैसे लोग उनकी जिंदगी के लिए दुआएं मांग रहे हैं। सीआरपीएफ चीफ के दुर्गा की मानें तो चेतन ने अपने ट्रूप्‍स का इंतजार भी नहीं किया था और वह आतंकियों से लड़ने के लिए सेना के साथ अकेले ही चले गए थे। बांदीपोर के हाजिन में हुआ यह वही एनकाउंटर है जिसमें इंडियन आर्मी के तीन जवान शहीद हो गए थे। सीआरपीएफ के 45वीं बटालियन के कमांडेंट चेतन कुमार चीता का इलाज इस समय दिल्‍ली के एम्‍स में चल रहा है और उनकी स्थिति काफी नाजुक है। चेतन ने जख्‍मी होने से पहले बहादुरी की जो मिसाल पेश की है उसे कभी कोई नहीं भुला पाएगा। पिछले दो माह में बांदीपोर के हाजिन में चार एनकाउंटर हो चुके हैं। मंगलवार की सुबह भी यहां पर आतंकियों के साथ मुठभेड़ जारी थी। आर्मी, सीआरपीएफ और जम्‍मू कश्‍मीर पुलिस इस एनकाउंटर में शामिल थी। इस एनकाउंटर के खत्‍म होने के बाद चेतन जहां बुरी तरह से घायल हो गए तो वहीं सेना के तीन जवान शहीद हो गए। एनकाउंटर खत्‍म होने के बाद चेतन को एयरलिफ्ट करके दिल्‍ली के एम्‍स में लाया गया था। चेतन के जैसे ही जम्‍मू कश्‍मीर पुलिस से इस बात की जानकारी मिल की दो आतंकवादी गांव में छिपे हैं तो उन्‍होंने बिल्‍कुल भी समय बर्बाद नहीं किया और राष्‍ट्रीय राइफल्‍स के साथ रवाना हो गए।

आतंकियों की नौ गोलियों के बावजूद डटे रहे

ऑपरेशन में जहां आर्मी ने सामने से मोर्चा संभाला तो चेतन चीता जो कि सीआरपीएफ के पैराट्रूपर हैं अकेले ही आतंकियों से भिड़ गए। उन्‍होंने 16 रांउड गोलिया फायर कीं तो आतंकियों ने 30 राउंड गोलियां चलाई। जहां एक आतंकी भाग गया तो दूसरा मारा गया। यह- दूसरा आतंकी लश्‍कर-ए-तैयबा का कमांडर अबु मुसाब था। आतंकियों के पास काफी खतरनाक हथियार थे जिसमें एके-47 के अलावाअलावा यूबीजीएल यानी अंडर बैरेल ग्रेनेड लॉन्‍चर्स भी थे। चीता की बांहों में फ्रैक्‍चर्स हो चुके थे, उनके पेट में गोलियां लगी थीं और एक गोली उनकी आंख को चीरती हुई बाहर निकल गई थी। कहा जा रहा है कि उनकी आंखों की रोशनी नहीं गई है। जब उन्‍हें एयरलिफ्ट किया गया तो किसी को नहीं मालूम था कि कितनी गोलियां उनके शरीर के अंदर थीं। उन्‍हें नौ गोलियां लगी थीं जिसमें बांह, पेट, पेट का निचला हिस्‍सा और जांघ जैसे हिस्‍से शामिल हैं। घायल होने के बाद भी इस शेर चेतन कुमार चीता ने आतंकियों पर कहर बरपाया।

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