नरेंद्र मोदी की सफलता के पीछे किसका हाथ?

नरेंद्र मोदी को अपने भाषण के बाद लोगों की भारी भीड़ और उनकी तालियों की गड़गड़ाहट उनकी और पीछे काम कर रही टीम की मेहनत के बल पर मिलती है। कहने का मतलब है कि हर भाषण, हर जनसभा से पहले मोदी खास तैयारी करते हैं। अगर कहा जाए तो अपनी बढ़ती लोकप्रियता के पीछे खुद मोदी का हाथ है। मोदी को इस बात का इल्म है कि उनके भाषण का श्रोताओं और दर्शकों पर क्या असर होता है। इसे मोदी की सियासी बिसात की चाल कहे या फिर लोगों से जुड़ने की वास्तविक जरूरत, मोदी इसके लिए जोरदार तैयारियां करते हैं। मोदी के पास अपने भाषण को श्रोताओं के मुताबिक ढालने की अद्भुत क्षमता है। विशेषज्ञों की एक पूरी टीम उनके भाषण के लिए तैयारी करती है, बावजूद इसके मोदी हर सभा से खुद वहां के मसले को समझने, वहां के लोगों के स्वभाव को जानने और लोगों की मनोदशा में खुद को उतारने के लिए अथक परिश्रम करते हैं।
मोदी की टीम किसी भी रैली से पहले उन्हें स्थानीय स्तर पर इनपुट मुहैया कराती है। इसके अलावा वह रैली में अपनी बात रखने से पहले ग्रुप डिस्कशन में लोगों की बात सुनते हैं। उनके चुनाव अभियान से जुड़े एक शीर्ष सहयोगी के मुताबिक मोदी हर जगह अलग तरह का शॉट लगाते हैं। वह सभी मतदाताओं को एक जैसा नहीं मानते और ना ही वह सिर्फ एक मुद्दे को लेकर बंधे नहीं हैं।
उदाहरण के तौर पर देखे तो 2 अक्टूबर को छात्रों की सभा में उन्होंने देवालय से पहले शौचालय का नारा दिया। जिसपर काफी बवाल हुआ, लेकिन इस सभा से पहले उन्होंने स्थानीय छात्रों से मुलाकात की। उनकी बातें सुनी और फिर अपनी बात रखी। उसी तरह हैदराबाद में रैली आयोजित करते हुए उन्होंने तेलंगाना के लिबरेशन डे का जिक्र किया। हर जगह उनका मुद्दा अलगहोता है। अगर सारांश को तौर पर देखा जाए तो मोदी की सफलता के पीछे खुद मोदी, उनकी अतक मेहनत और उनकी एक सफल टीम है।












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