कभी 50 रुपये के लिए करते थे मजदूरी, बेचते थे डिटर्जेंट पाउडर, आज 1200 करोड़ के मालिक हैं अरुण सैमुअल
कभी 50 रुपये के लिए करते थे मजदूरी, बेचते थे डिटर्जेंट पाउडर, आज 1200 करोड़ के मालिक हैं अरुण सैमुअल
नई दिल्ली, 21 जुलाई: 17 साल की उम्र में डोर-टू-डोर सेल्समैन का काम कर 50 रुपये के मेहनताना के लिए वाटर प्यूरीफायर बेचने वाले, बेंगलुरु के 55 वर्षीय अरुण सैमुअल आज 1200 करोड़ के मालिक हैं। 11वीं कक्षा तक पढ़ाई करने वाले अरुण सैमुअल की कहानी देश के युवाओं को प्रेरित करने वाली है। पैसे की कमी और घर में तंगी की वजह से अरुण सैमुअल को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी थी। लेकिन कड़ी मेहनत और जुनून ने उन्हें करोड़ों की संपति का मालिक बना दिया। आज अरुण सैमुअल की कंपनी का टर्नओवर 1224 करोड़ रुपये का है। अरुण सैमुअल की कंपनी में आज 8 हजार 500 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं।

विंग्स ग्रुप ऑफ कंपनीज मालिक हैं अरुण सैमुअल
अरुण सैमुअल विंग्स ग्रुप ऑफ कंपनीज के अध्यक्ष और एमडी हैं। ये कंपनी देशभर के टॉप ब्रांडों के लिए एंड-टू-एंड मार्केटिंग, ब्रांडिंग और प्रचार करती है। इस कंपनी का रजिस्ट्रेशन विंग्स ब्रांड एक्टिवेशन प्राइवेट लिमिटेड के नाम से है। 28 साल पहले 1994 में बेंगलुरु में अपने अलावा सिर्फ तीन लोगों के साथ अरुण सैमुअल ने इस कंपनी की शुरुआत की थी। आज इस कंपनी के भारत के हर राज्य में और अन्य देशों में आठ कार्यालय हैं। ये कंपनी आज भारत के 67 प्रतिशत आईटी कंपनियों के लिए काम करती है।

क्या काम करती है अरुण सैमुअल की कंपनी
अरुण सैमुअल की कंपनी विंग्स ग्रुप का मेन बिजनेस ब्रांडिंग करना है। प्रमोशनल इवेंट्स जैसे रोड शो, मेले और विभिन्न प्रचार कार्यक्रम का आयोजन कराती है। इसके अलावा ये कंपनी मीडिया मार्केटिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, फैसिलिटी मैनेजमेंट और कंसल्टिंग का भी काम कराती है। कंपनी बिक्री कर्मियों, टेलीकॉलर्स की भी सुविधा देती है। ये कंपनी अपने आई-कनेक्ट वर्टिकल के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को भारत में अपना व्यवसाय, संचालन और निवेश स्थापित करने में मदद करती है।

बेंगलुरु के मिडिल क्लास फैमिली से हैं अरुण सैमुअल
अरुण का डोर-टू-डोर सेल्समैन से लेकर एक बिजनेस टाइकून बनने तक का सफर काफी प्रेरित करने वाला है। अरुण अब भारतीय कॉरपोरेट जगत के लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। अरुण को इस रास्ते में कई चुनौतियों का सामना जरूर करना पड़ा है लेकिन उनके दृढ़ संकल्प ने इसे संभंव बना दिया। अरुण सैमुअल ने हाल ही में ''द वीकेंड लीडर'' को दिए अपने इंटरव्यू में अपनी कहानी बताई है। अरुण बेंगलुरु के एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड में एक इंजीनियर के रूप में काम करते थे और उनकी मां एक अस्पताल में डाइटिशियन थीं।

तंगी की वजह से नहीं कर पाए अरुण सैमुअल पढ़ाई
अरुण सैमुअल ने 1982 में बेंगलुरु के सेंट जॉन्स हाई स्कूल से अपनी कक्षा 10वीं की पढ़ाई पूरी की और अपने पीयूसी (प्री-यूनिवर्सिटी कोर्स) के लिए क्राइस्ट यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया - जो अन्य राज्यों में कक्षा 11 और 12 के बराबर है। कॉलेज में जाने के बाद अरुण की जिंदगी में काफी बदलाव आए। उनके दोस्त काफी अमीर और संपन्न व्यापारिक परिवारों से आते थे। कॉलेज में शैतानी करने की वजह से अरुण और उनकी पूरी टीम को कॉलेज की परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया। इस बारे में बात करते हुए अरुण सैमुअल ने कहा था, ''सम्मानजनक डिग्री के साथ शिक्षित पेशेवर होने के नाते, मेरे माता-पिता वास्तव में निराश थे कि मुझे परीक्षा देने की अनुमति नहीं दी गई थी। मैं सोचता रहा कि मैंने अपने जीवन का क्या बिगाड़ा है।''

घर-घर जाकर बेचने लगे वाटर प्यूरीफायर
अरुण सैमुअल कहते हैं, ''1984 में एक दिन मैंने शहर के एक कंपनी के डोर-टू-डोर मार्केटिंग नौकरी के बारे में पढ़ा। वहां जाकर मैंने इंटरव्यू दिया और मुझे नौकरी मिल गई। मुझे घर-घर जाकर जीरो-बी वाटर प्यूरीफायर बेचना पड़ा, जिसकी कीमत तब 170 रुपये थी। मुझे अपने वेतन के रूप में प्रतिदिन 50 रुपये मिलते थे। जब मुझे कॉलेज में पढ़ाई करनी चाहिए थी, मैं लोगों के घर जा-जाकर सामान बेचता था।''

'मैंने बहुत शर्मिंदगी झेली...लोगों के कुत्ते मेरे पीछे पड़ जाते थे...'
अरुण सैमुअल ने कहा, ''मैंने बहुत शर्मिंदगी का अनुभव किया है। मैंने बार-बार दरवाजे खटखटाए हैं, बिना कोई जवाब दिए, कई लोगों के कुत्ते मेरे पीछे आ जाते थे।'' अरुण बताते हैं, ''एक दिन मैंने यूरेका फोर्ब्स के सेल्समैन अपना वाटर प्यूरीफायर बेच रहे थे, जिसकी कीमत लगभग 800 रुपये थी। उसके बाद मैंने ऐसी तरकीब लगाई कि मैं रोजाना 6-8 वाटर प्यूरीफायर बेच पा रहा था। हालांकि यह मेरे जीवन का एक चुनौतीपूर्ण समय था, लेकिन इसने मेरा आत्मविश्वास बढ़ा दिया।''

उस दिन लगा अरुण सैमुअल को झटका
अरुण उसी कंपनी के लिए वाशिंग मशीन डिटर्जेंट पाऊडर और अन्य प्रोडक्ट भी बेचते थे। अरुण सैमुअल एक दिन को याद करते हुए कहते हैं, ''मुझे वह दोपहर अच्छी तरह याद है जब मैंने एक घर का दरवाजा खटखटाना शुरू किया।बहुत लंबी देरी के बाद एक आदमी बेहद चिड़चिड़े मूड में दरवाजे से निकला। जब मैंने उसे अपने प्रोडक्ट के बारे में बताया तो वह इतना नाराज हो गया कि उसने मेरे सिर पर डिटर्जेंट के पैकेट को मारा और मुझ पर गुस्से से चिल्लाते हुए कहा,'जा इससे अपना सिर धो ले।' उस दिन, मैं पूरी तरह से टूट गया था। उस दिन मैं एक बेंच पर बैठ गया और भगवान से पूछा, कृपया मुझे दूसरा मौका दें। कुछ समय बाद, मैंने बेहतर महसूस किया, अपनी सारी हिम्मत जुटाई, और अगले घर की ओर चल पड़ा, जहां मैं एक बहुत अच्छी महिला से मिला, जिसने मुझे जूस पिलाया और मेरे उत्पाद खरीदे। मुझे अपना आत्मविश्वास वापस मिल गया है।"

1985 में अरुण ने शुरू की अपनी कंपनी
अरुण को जल्द ही कंपनी में प्रमोशन मिला। बाद में उन्होंने अपने एक सहयोगी के साथ मिलकर 1985 में AERO प्रचार नाम की एक बिक्री और प्रचार कंपनी शुरू की। उनका पहला ग्राहक टीजीएल क्विक फूड्स था, जो इंडियन झटपट डिश बेचते थे। अरुण सैमुअल कहते हैं, ''हम टाटा टी और टॉमको (टाटा ऑयल मिल्स कंपनी) को भी बोर्ड में लाने में कामयाब रहे। टॉमको के लिए हमने जो प्रोडक्ट संभाला, वह था रेवेल वॉशिंग मशीन डिटर्जेंट का था। बाद में हमने हिंदुस्तान यूनिलीवर, मैरिको और आईएफबी बॉश जैसे अन्य प्रसिद्ध ब्रांड को भी अपने ग्राहक बनाए।''

आज हमारे पास भारत में 344 ग्राहक हैं
अरुण अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहे हैं, मैंने 1993 में एक सपना देखा था। मैंने देखा कि मैं एक चट्टान की चोटी पर खड़ा था और एक आवाज सुनी, 'कूदो...तुम गिरोगे नहीं, बल्कि उड़ जाओगे। मैंने देखा कि एक बड़ी चील बेदाग उड़ रही है। अगली सुबह, मैंने अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया और उसे विंग्स का नाम दिया।
अरुण कहते हैं, ''आज हमारे पास पूरे भारत में 344 ग्राहक हैं और भारत में 67% आईटी कंपनियों के लिए हम काम करते हैं। कंपनी की पिछले पांच साल की वृद्धि 50 करोड़ रुपये से 150 करोड़ रुपये, 150 करोड़ से 584 करोड़, 584 करोड़ से 769 करोड़, 769 करोड़ से 824 करोड़ और वित्तीय वर्ष में 824 करोड़ से 1224 करोड़ रही है।''












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