मैगी को प्लेट से हटाने वाले पांडे जी ‘फंसे’
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) नेस्ले जैसी नामवर मल्टीनेशनल कंपनी पस्त हो गई वी.के.पांडे से। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए काम कर रही सरकारी लैब से जुड़े पांडे जी को क्रेडिट मिल रहा है कि उन्होंने नेस्ले की मैगी को खाने के योग्य नहीं पाया।
पर आगरा में कार्यरत उत्तर प्रदेश सरकार के फूड इंस्पेक्टर संजय सिंह का दावा है कि उन्होंने सबसे पहले नेस्ले की मैगी खिलाफ मोर्चा खोला, पर उनके वरिष्ठ अधिकारी वी.के.पांडे सारा क्रेडिट ले गए कि उन्होंने मैगी को खाने लायक नहीं पाया।
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1998 से कार्यरत
संजय सिंह 1998 से उत्तर प्रदेश में फूड इंस्पेक्टर के रूप में काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने सबसे पहले मैगी के सैंपलों की जांच की। जांच में गड़बड़ पाई तो उन्होंने अपने विभाग के आला अफसरों को इसकी सूचना दी। तब डी.के. पांडे ने सारा क्रेडिट ले लिया।
नाराज पांडे से
संजय सिंह ने आगरा में कुछ पत्रकारों से कहा भी कि वे इस सारे केस की जानकारी अपने विभाग के शिखर अफसरों को देकर पांडे को एक्सपोज करेंगे।
मैगी के बुरे दिन
बता दें कि बाराबंकी की सरकारी खाद्य गुणवत्ता प्रयोगशाला से जुड़े जिला फूड आफिसर पांडे को इस बात का क्रेडिट मिल रहा है कि उन्होंने नेस्ले की मैगी के खिलाफ अभियान चलाया। उनका दावा है कि उन्होंने सबसे पहले नेस्ले की मैगी की गुणवत्ता की जांच की।
उसके बाद ही मैगी के बुरे के बुरे दिन आए। इस बीच, उत्तर सूचना केन्द्र के एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि राज्य सरकार इस बात की जांच करेगी कि नेस्ले की मैगी के खिलाफ सबसे पहले अभियान किसने छेड़ा।













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