कौन हैं PM मोदी के 5 भरोसेमंद मंत्री, जो विकसित भारत का सपना साकार करने में निभाएंगे बड़ी भूमिका?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हालिया दिए लगभग हर इंटरव्यू में कहा है कि उनका मिशन 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाना है। पीएम नरेंद्र मोदी के लिए ये एनडीए की सरकार चलाना इस बार चुनौती भरा होगा। ऐसे में पीएम मोदी के लिए इस कार्यकाल में विकसित भारत के मिशन के लिए काम करना भी आसान नहीं होगा।
मिली जुली सरकार में भी पीएम मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में कुछ ऐसे केंद्रीय मंत्रियों को फिर से शामिल किया है, जिनपर वो सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं। इनमें से 4 मंत्री तो ऐसे हैं, जो पिछले कार्यकाल में भी पीएम मोदी की टीम का हिस्सा थे। ये मंत्री पीएम मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध भी हैं। आइए जानें वो 5 मंत्री कौन-कौन हैं?

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पीएम मोदी ने मंत्रिपरिषद के चार सबसे अहम मंत्रालयों में कोई बदलाव नहीं किया है। देश की आंतरिक सुरक्षा, सीमाओं की सुरक्षा, विदेशी राजनयिक और आर्थिक नीतियों के मामलों की जो नींव 2014 में रखी गई थी, वो 2019 में और भी मजबूत हुई है और 2024 में भी ये कारवां ऐसे ही जारी रहेगा।
पीएम मोदी इस बार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस जयशंकर को 2019 के जैसे ही 2024 के कैबिनेट में भी वही जगह दी है। इसमें राजनाथ सिंह और निर्मला सीतारमण पीएम मोदी की पिछले दोनों कार्यकाल का हिस्सा रहे हैं। राजनाथ सिंह 2014 की टीम में केंद्रीय गृह मंत्री थे।

वहीं निर्मला सीतारमण सितंबर 2017 में रक्षा मंत्री बनाई गई थीं। अमित शाह मोदी की टीम में साल 2019 सें गृह मंत्री के पद पर हैं। वहीं एस जयशंकर भी पिछले कार्यकाल से विदेश मंत्री के पद पर हैं। ये चारों मंत्री पीएम मोदी के भरोसेमंद मंत्री हैं।
पीएम मोदी की इस कैबिनेट में एक नया चेहरा शिवराज सिंह चौहान का है, जो पीएम मोदी के भरोसमंद मंत्री हो सकते हैं। शिवराज सिंह चौहान को पीएम मोदी ने कृषि मंत्री बनाया है। असल में पिछले कुछ सालों में केंद्र सरकार की किसान आंदोलन की वजह से आलोचनाएं हुई हैं। अब देखने वाली बात ये होगी कि शिवराज सिंह चौहान देश के किसानों के लिए क्या नया करते हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने किसानों की आय दोगुना करने जैसा असंभव लक्ष्य भी हाथ में लिया हुआ था।

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शपथ लेते ही एक्शन में दिखे ये सभी मंत्री
अगर इन पांचों मंत्रियों की बात की जाए तो ये शपथ लेते ही एक्शन में दिख रहे हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन महत्वाकांक्षी लक्ष्य को तय करते हुए पदभार संभालते ही 2028-29 तक पचास हजार करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात को पूरा करने का निर्देश दिया है।
गृह मंत्री अमित शाह जम्मू-कश्मीर से आतंकवादी घटनाओं को कम करने के लिए लगातार मीटिंग कर रहे हैं। NSA अजीत डोभाल के साथ उन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर कई राउंड मीटिंग की है। अमित शाह अपने इस कार्यकाल में इस्लामिक आतंकवाद के साथ नक्सली आतंकवाद को भी खत्म करने की प्लानिंग कर रहे हैं।

वहीं निर्मला सीतारमण भी पदभार संभालते हुए बजट पेश करने की तैयारियों में लग गई हैं। बजट जुलाई के पहले हफ्ते में पेश होने की संभावना है। हालांकि इसको लेकर अधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
वित्त मंत्रालय को संभालते हुए निर्मला सीतारमण के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी है। अगर आंकड़ों की मानें तो 2047 तक देश की इकोनॉमी 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। आंकड़े को सही साबित करने की नींव रखने की जिम्मेदारी निर्मला सीतारमण पर है। फिलहाल यह 3.7 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी (India GDP) के साथ दुनिया का पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
एस जयशंकर भी पदभार संभालते ही G7 में शामिल होने तैयारियों में लगे थे, जो हाल ही में इटली में हुआ है। जयशंकर के पास भी विदेश मंत्रालय के तौर पर काम को लेकर कई चुनैतियां हैं। भारत के रिश्ते इस वक्त कनाडा, चीन, मालदीव से सबसे ज्यादा खराब स्थिति में हैं। हालांकि भारत और पाकिस्तान के संबंध भी बिगड़ते जा रहे हैं। हालांकि पाकिस्तान को लेकर भारत का रुख बहुत साफ है कि वो सीमापार से आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेंगे।












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