मोदी सरकार के लिए TDP कितनी बड़ी चुनौती? चंद्रबाबू नायडू के इस संकेत को समझिए
18वीं लोकसभा में बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार के पास अपने 293 सांसद हैं। लेकिन, फिर भी कांग्रेस नेता राहुल गांधी दावा कर रहे हैं कि मोदी सरकार कमजोर है और कभी भी गिर सकती है। उन्होंने बीजेपी के कुछ सहयोगी दलों के संपर्क में होने के भी दावे कर दिए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में भाजपा के 240 सांसदों के बाद सबसे ज्यादा 16 सांसद आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी के हैं। ऐसे में यह देखना जरूरी है कि क्या टीडीपी पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल के लिए किसी तरह का संकट है?

स्पीकर पद पर दावा नहीं करेगी टीडीपी- रिपोर्ट
सबसे पहली बात ये कि कुछ रिपोर्ट में यह बात सामने आ रही है कि टीडीपी स्पीकर पद पर किसी तरह दावा नहीं करने जा रही है। मतलब, विपक्ष के मंसूबों को इससे बहुत बड़ा झटका लग सकता है। इससे पहले यह भी साफ हो चुका है कि पीएम मोदी ने किसी भी अति-महत्वपूर्ण मंत्रालय के मामले में सहयोगी दलों के साथ किसी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया है।
टीडीपी के लिए आंध्र प्रदेश है प्राथमिकता
अब टीडीपी की ओर से जो जानकारी मिल रही है, उससे यह बात निकल कर आ रही है कि पार्टी केंद्र सरकार से सिर्फ आंध्र प्रदेश से जुड़े मामले पर फोकस चाहती है। जानकारी के मुताबिक आंध्र प्रदेश के नव-निर्वाचित मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की दिलचस्पी सिर्फ राज्य के विशेष प्रोजेक्ट के लिए खास फंड में है और वह उसी पर जोर देना चाहते हैं।
अमरावती को राजधानी बनाने पर फोकस
सूत्रों के अनुसार टीडीपी ने मंत्रालयों के मुताबिक अपनी मांगों की एक लिस्ट तैयार की है, ताकि वह प्रदेश के विकास पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर सके। टीडीपी की इस लिस्ट में सबसे बड़ी प्राथमिकता अमरावती को आंध्र प्रदेश की नई राजधानी के रूप में विकसित करना है।
अमरावती टीडीपी के राजनीतिक एजेंडे में कितना महत्वपूर्ण है, यह इसी से स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले ही चंद्रबाबू नायडू ने यह एलान कर दिया कि अमरावती आंध्र प्रदेश की एकमात्र राजधानी होगी।
पोलावरम सिंचाई परियोजना पर भी है टीडीपी का जोर
नायडू की प्राथमिकताओं की लिस्ट में दूसरे नंबर पर पोलावरम सिंचाई परियोजना है और वह चाहते हैं कि इसके लिए केंद्र सरकार बकाया राशि जल्द से जल्द जारी करे। इस परियोजना को लेकर केंद्र और राज्य के बीच कुछ विवाद रहा है; और जानकारी के अनुसार चंद्रबाबू नायडू अपने इस कार्यकाल में इसे बहुत ही अहमियत देने वाले हैं।
केंद्र से सस्ती बिजली चाहती है टीडीपी
आंध्र प्रदेश में बिजली की कीमत का मसला भी एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है। विधानसभा चुनावों के दौरान नायडू ने यह मसला उठाया कि किस तरह से जगन मोहन रेड्डी की सरकार के कार्यकाल में बिजली की कीमतों में 8 बार बढ़ोतरी की गई। टीडीपी यह वादा करके सत्ता में आई है कि वह इसकी कीमतें कम करेगी। अब चंद्रबाबू नायडू केंद्र सरकार की कंपनियों से सस्ती बिजली देने की मांग करने वाले हैं।
टीडीपी के चुनावी वादों को पूरा करने के लिए केंद्र की मदद की बहुत ज्यादा जरूरत पड़ने वाली है। क्योंकि, चंद्रबाबू साल 2000 का वह दौर भी देख चुके हैं, जब उनकी सरकार ने बिजली की कीमतों में 14.5% का इजाफा कर दिया था। इसके बाद हैदराबाद में ऐसा हिंसक प्रदर्शन हो गया, जिसमें तीन लोगों की जानें चली गईं और लगभग 200 जख्मी हो गए थे।
मोदी सरकार के लिए चुनौती नहीं बनेंगे नायडू!
कुल मिलाकर चंद्रबाबू नायडू फिलहाल मोदी सरकार के लिए किसी तरह की चुनौती बनने वाले हैं, इसकी संभावना दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है। क्योंकि, अपने चुनावी वादों को पूरा करने के लिए उनके लिए मौजूदा केंद्र सरकार से जितनी भी सहायता मिलने की उम्मीद है, वह बदली हुई कथित राजनीतिक परिदृश्य में और भी मुश्किल हो सकती है।
चंद्रबाबू नायडू के इस संकेत को समझिए
चंद्रबाबू नायडू के लिए बीजेपी और मौजूदा केंद्र सरकार कितनी महत्वपूर्ण है, उसका संकेत उनके एक्स (पहले ट्विटर) हैंडल को देखकर समझ में आ सकता है। इसपर नायडू के फॉलोअर्स की संख्या 5.2 मिलियन है, लेकिन वे खुद सिर्फ 11 हैंडल को फॉलो करते हैं।
इनमें उनके बेटे नारा लोकेश, उनकी पार्टी टीडीपी और कलाम सेंटर के अलावा ये सिर्फ ये भारतीय हस्तियां शामिल हैं- राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, नरेंद्र मोदी, पीएमओ, अमित शाह, आंध्र प्रदेश के गवर्नर, जेपी नड्डा और पवन कल्याण। इनके अलावा इसमें किसी भी अन्य राजनेता का नाम शामिल नहीं है।












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