नीति आयोग के आने के बाद कहां चले गए मोंटेक सिंह अहलूवालिया?
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। योजना आयोग के नीति आयोग बनते ही बहुत से लोगों को मोंटेक सिंह अहलूवालिया की याद आ गई। केन्द्र में एनडीए सरकार के सत्तासीन होने से पहले लगभग नौ साल तक वे लगातार योजना आयोग के उपाध्यक्ष के तौर पर देश के लिए नीतियां निर्धारित करने में अहम भूमिका अदा कर रहे थे।

एनडीए सरकार के गठन के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। वे उसके बाद से खबरों से पूरी तरह से गायब हैं। उनका कहीं किसी को कुछ पता नहीं। वरिष्ठ पत्रकार अशोक शर्मा कहते हैं कि जितनी मोंटेक सिंह से देश को उम्मीदें थी, वे उस लिहाज से असफल ही रहे।
क्या कर रहे हैं?
अब वे कहां गए ? वे क्या कर रहे हैं ? इन सवालों के जवाब किसी के पास राजधानी में नहीं है। पहले तो वे सेमिनार सर्किट में दिख भी जाते थे, अब वे वहां पर भी नहीं दिखते । योजना भवन,जो अब नीति भवन बन गया है, में उनके निवास की जानकारी मांगी गई तो किसी ने नहीं दी। वहां पर फोन करने पर यही बताया गया कि हमें मोंटेक सिंह के घर या फोन की कोई जानकारी नहीं है।
विवादों में रहे
मोंटेक सिंह अहलूवालिया कई बार अपने बयानों को लेकर विवादों में भी रहे हैं एक बार उन्होंने कहा था कि शहरी क्षेत्र में हर महीने 859.6 रुपए और ग्रामीण क्षेत्र में 672.8 रुपए खर्च करने वाले गरीब नहीं हैं । उनके इस बयान पर बहुत बवाल मचा था।
आपको याद होगा कि योजना आयोग के दो शौचालयों की मरम्मत पर 35 लाख रुपए के खर्च को लेकर भी उनकी काफी खिंचाई हुई थी। मोंटेक सिंह अहलूवालिया को 2011 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। वे वर्ल्ड बैंक के साथ भी काम करते रहे। वे 1979 में वित्त मंत्रालय के सलाहकार के तौर पर भारत सरकार से जुड़े। जानकारों का कहना है कि हो सकता है कि कुछ दिनों के बाद मालूम चले कि वे राजधानी के किसी रिसर्च संस्थान से जुड़ गए हैं।












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