पीएम केयर्स फंड का कहां और किस तरह हो रहा इस्तेमाल, देश को होनी चाहिए जानकारी: राहुल गांधी
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर पीएम केयर्स फंड में दान में मिली राशि को लेकर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार देर रात पीएम केयर्स फंड को लेकर एक ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, पीएम को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पीएम केयर्स फंड के पैसे को ऑडिट किया जाए। राहुल गांधी ने कहा, पीएम केयर्स फंड में बड़े पैमाने पर योगदान किया गया है, यह महत्वपूर्ण है कि लोगों को पता चले कि सरकार इस फंड को कहां,किस तरह खर्च करेगी।

गौरतलब है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पहले भी कोरोना से निपटने को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं। अपने एक बयान में उन्होंने कहा था कि मोदी सरकार को बताया चाहिए कि पीएम केयर्स फंड में किसने कितनी राशि का दान दिया है। इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए। शनिवार को एक ट्वीट के माध्यम से राहुल गांधी ने फिर से फंड को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है।
राहुल गांधी ने ट्वीट में लिखा, पीएम केयर्स फंड को पीएसयू और रेलवे जैसे सार्वजनिक उपक्रमों से भारी मात्रा में सहयोग मिला है। पीएम को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस पैसे को ऑडिट किया जाए। उन्होंने आगे लिखा कि यह महत्वपूर्ण है कि पीएम सुनिश्चित करें कि फंड का ऑडिट किया गया है और जनता को प्राप्त और खर्च किए गए धन का रिकॉर्ड उपलब्ध हो। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस से जंग में देशवासियों से आर्थिक मदद की मांग करते हुए प्राइम मिनिस्टर सिटीजन असिस्टेंस एंड रिलीफ इन इमरजेंसी सिचुएशन फंड (PM CARES Fund) की शुरूआत की है। इसमें कोई भी छोटी से छोटी धनराशि भी दान कर सकता है।
बता दें कि शुक्रवार को भी राहुल गांधी ने कहा था कि केंद्र के स्तर पर ही सारे फैसले होंगे तो हम कोरोना से लड़ाई हार जाएंगे। जरूरत इस बात की है कि राज्य ही नहीं बल्कि जिले के स्तर पर डीएम स्थिति को देखें और लॉकडाउन को लेकर रणनीति बनाएं। अभी देश में सामान्य हालात नहीं हैं, इस लड़ाई को जिले तक ले जाना जरूरी है। अगर पीएमओ में ये लड़ाई लड़ी जाएगी, तो लड़ाई हारी जाएगी। हमें कोरोना से लड़ने के लिए मजबूत सीएम, स्थानीय नेता, डीएम की जरूरत है। उन्होंने रेड, ग्रीन, ऑरेंज जोन की लिस्ट केंद्र से बनने पर भी सवाल किया और कहा कि इससे सही स्थिति नहीं पता चलती, इसकी जिम्मेदारी राज्य को दी जाए।
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