जब झारखंड में कांग्रेस ने ख़ुद वो किया था, जिसका महाराष्ट्र में बीजेपी पर आरोप है

शिबू सोरेन सोनिया गांधी
Getty Images
शिबू सोरेन सोनिया गांधी

महाराष्ट्र में सरकार बनाने की प्रक्रिया में राजनीति के जो नाटकीय मोड़ जनता ने देखे, वो कोई अनोखी घटना नहीं थी. बल्कि ऐसा ही राजनीतिक 'ड्रामा' 2005 में झारखंड में भी हो चुका है.

फ़र्क सिर्फ़ इतना था कि तब कांग्रेस ने बीजेपी की जगह ले ली थी और बीजेपी ने कांग्रेस की. साथ ही सोशल मीडिया का ज़माना नहीं होने की वजह से मीम ग़ायब थे.

झारखंड में पहली बार 2005 में विधानसभा चुनाव हुए थे. केंद्र में यूपीए सरकार थी और झारखंड के गवर्नर सैयद सिब्ते रज़ी.

81 सीटों वाली विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 41 सीटों की ज़रूरत थी. झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था.

लेकिन नतीजों में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था. भारतीय जनता पार्टी 30 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी थी. जेएमएम को 17 सीटें मिली थीं और उसकी सहयोगी कांग्रेस के पास थी नौ सीटें.

बीजेपी की सहयोगी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) को 6 सीटें मिली थीं. इसके अलावा बीजेपी पांच निर्दलीय विधायकों के समर्थन का दावा कर रही थी. कुल मिलाकर बीजेपी सरकार बनाने के सबसे क़रीब थी. एक मार्च 2005 को बीजेपी 41 विधायकों की लिस्ट लेकर राज्यपाल से मिली.

लिस्ट में शामिल पांच निर्दलीय विधायक थे- सुदेश महतो, चंद्र प्रकाश चौधरी, मधु कोड़ा, हरिनारायण राय, एनोस एक्का.

सैयद सिब्ते रज़ी और अर्जुन मुंडा
Getty Images
सैयद सिब्ते रज़ी और अर्जुन मुंडा

'गवर्नर का काम नंबर गिनना नहीं'

गवर्नर ने एनडीए से कहा कि वे निर्दलीय विधायकों से मिलकर उनका स्टैंड जानना चाहेंगे. उसी शाम यूपीए भी गवर्नर से मिलने पहुंची और 42 विधायकों की अपनी लिस्ट दी. दिलचस्प बात ये थी कि उस लिस्ट में शामिल दो विधायकों के नाम एनडीए की लिस्ट में भी थे - हरिनारायण राय और एनोस एक्का. इस लिस्ट में राष्ट्रीय जनता दल के सात विधायकों का नाम था और पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ी थी.

लेकिन 2 मार्च 2005 को गवर्नर ने जेएमएम के शिबू सोरेन को आनन-फ़ानन में मुख्यमंत्री की शपथ दिला दी. साथ ही शिबू सोरेन को बहुमत साबित करने के लिए 21 मार्च की डेडलाइन दी.

शपथ ग्रहण समारोह भी जल्दबाज़ी में राज भवन के छोटे से हॉल में कर दिया गया.

इसके बाद मीडिया से बात करते हुए गवर्नर रज़ी ने कहा, "ये सिर्फ संख्या का सवाल नहीं है, अगर संख्या का ही सवाल होता तो गवर्नर का क्या रोल है. गवर्नर को संविधान से शक्तियां मिली है जिससे वो ये फ़ैसला कर सके कि कौन स्थिर सरकार दे सकता है और किसके पास सदन में बहुमत है. गवर्नर का काम संख्या गिनना नहीं है."

शिबू सोरेन
Getty Images
शिबू सोरेन

उन दिनों एपीजे अब्दुल कलाम राष्ट्रपति थे और उन्होंने इस विवाद के बाद राज्यपाल को बुलाया. इस मुलाकात के बाद राज्यपाल ने फ्लोर टेस्ट की तारीख 15 मार्च रख दी.

लेकिन एनडीए के विधायक दल के नेता अर्जुन मुंडा अपने सीएम पद को ऐसे ही नहीं जाने दे सकते थे. वे गवर्नर के फैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचे.

'संविधान के साथ फ्रॉड'

सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट की तारीख़ 11 मार्च रख दी और इस घटमाक्रम पर काफ़ी तल्ख टिप्पणी की. अर्जुन मुंडा की ओर से कोर्ट में वकील मुकुल रोहतगी पेश हुए और उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने सोरेन को बहुमत साबित करने के लिए लंबा वक़्त दिया है ताकि वे विधायकों की ख़रीद-फरोख्त कर सकें.

याचिका में कहा गया कि एनडीए के पास 36 सीटें थीं लेकिन फिर भी राज्यपाल ने 26 सीटों वाली यूपीए को सरकार बनाने के लिए बुला लिया.

सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने कहा, "अगर अर्जुन मुंडा की याचिका में लिखी बातें सच हैं तो ये संविधान के साथ 'फ्रॉड' हुआ है."

सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट की वीडियो रिकॉर्डिंग का भी आदेश दिया.

शिबू सोरेन
Getty Images
शिबू सोरेन

यूपीए ने सदन की कार्रवाई नहीं चलने दी

11 मार्च को जब सदन इकट्ठा हुआ तो ये साफ़ हो चुका था कि यूपीए के पास संख्या नहीं थी. उसके समर्थक एनसीपी के एकमात्र विधायक उस दिन गैर-हाज़िर थे. एनोस एक्का और हरिनारायण राय, जिनका नाम यूपीए की लिस्ट में था, वे एनडीए के विधायकों के साथ बैठे थे.

एक अनोखी बात ये हुई कि यूपीए के विधायक सदन की कार्रवाई में बाधा डालने लगे. उप-मुख्यमंत्री की शपथ लेने वाले स्टीफन मरांडी कहने लगे कि एनोस एक्का और हरिनारायण को एनडीए गन-प्वाइंट पर किडनैप कर ले गई जबकि वे दोनों खुद इस आरोप से इनकार कर रहे थे.

यूपीए के सदस्य नारे लगाने लगे और वेल में आ गए. प्रोटेम स्पीकर को पांच बार सदन की कार्रवाई स्थगित करनी पड़ी. आखिर में प्रोटेम स्पीकर ने दलील दी कि प्रोटेम स्पीकर विश्वास मत की कार्रवाई को नहीं चला सकता और सुप्रीम कोट के आदेश ने कन्फ्यूज़न की स्थिति पैदा कर दी है. इसके बाद उन्होंने सदन को 15 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया.

अर्जुन मुंडा और शिवराज चौहान
Getty Images
अर्जुन मुंडा और शिवराज चौहान

इसके बाद एनडीए ने धरना प्रदर्शन किए. दिल्ली तक भी जब ये बात पहुंची तो गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने मीडिया से कहा कि मौजूदा मुख्यमंत्री को पद से इस्तीफ़ा देने के लिए कहा गया है और जल्द ही नई सरकार शपथ लेगी.

आधी रात के क़रीब शिबू सोरेन ने इस्तीफ़ा राज्यपाल को सौंपा और प्रेस कांफ्रेस में कहा कि उन्हें इस्तीफ़ा देने के लिए नहीं कहा गया बल्कि वे खुद इस्तीफ़ा दे रहे हैं.

इसके बाद अर्जुन मुंडा ने 12 मार्च को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.

लेकिन इस घटना के बाद गवर्नर के रोल पर जो बहस शुरू हुई वो आज महाराष्ट्र तक आ पहुंची.

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+