भारत पर हमले के बावजूद नेहरू की बहन ने किया था चीन का समर्थन

नई दिल्‍ली। वर्ष 1962 में भारत और चीन जंग के मैदान में आमने-सामने थे और इस मैदान-ए-जंग में भारत को शिकस्‍त का सामना करना पड़ा था। लेकिन इस लड़ाई और इसमें मिली शिकस्‍त के बाद भी भारत ने एक मौके पर चीन का समर्थन किया था।

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वर्ष 1963 की घटना

वर्ष 1963 में भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की बहन विजय लक्ष्‍मी पंडित यूनाइटेड नेशंस में भारत के प्रतिनिधि दल का नेतृत्‍व कर रही थीं।

इस समय उन्‍होंने चीन को यूएनएससी यानी यूनाइटेड नेशंस सिक्‍योरिटी काउंसिल में मिलने वाली स्‍थायी सदस्‍यता का समर्थन किया था।

क्‍या कहा था लक्ष्‍मी पंंडित ने

उस समय विजय लक्ष्‍मी पंडित ने कहा कि भारत, इस संघ में चीन की स्‍थायी सदस्‍यता का समर्थन करता है। विजय लक्ष्‍मी ने उस समय मीडिया को एड्रेस करते हुए कहा था, 'यह सिद्धांत से जुड़ा मामला है। इसका उनके देश भारत और चीन की सरकार से कोई लेना देना नहीं है।'

उन्‍होंने कहा था कि उन्‍हें समझ नहीं आता कि कैसे एक वैश्विक संस्‍था दुनिया के एक बड़े हिस्‍से को बाहर रख सकती है।

1971 में मिली चीन को सदस्‍यता

वर्ष 1971 में चीन को यूएनएससी की स्‍थायी सदस्‍यता हासिल हुई थी। वर्ष 1945 में यूएनएससी की शुरुआत हुई थी और अमेरिका इसका पहला सदस्‍य बना था।

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