पीएम मोदी के सामने भर आया चीफ जस्टिस का गला लेकिन क्यों
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तो आपने कुछ मौकों पर भावुक होते हुए देखा है लेकिन रविवार को उनके सामने देश के मुख्य न्यायधीश जस्टिस टीएस ठाकुर का गला भर आया।

न्यायपालिका पर बढ़ा बोझ
न्यायपालिका के वर्तमान हालातों की चर्चा करते हुए उनकी आंखों में नमी थी और आवाज भर्रा गई थी। पीएम मोदी की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि आज देश में न्यायपालिका पर बोझ पहले की अपेक्षा काफी ज्यादा है। उन्होंने अपने संबोधन में भारत और अमेरिका के बीच न्यायपालिका का अंतर भी बयां किया।
मेक इन इंडिया और न्यायपालिका
जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा कि जब तक न्यायपालिका के बोझ को कम नहीं किया जाता तब तक मेक इन इंडिया कारगर नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया और विदेशी निवेश बढ़ाना सरकार की कोशिश है, लेकिन जब तक न्यायपालिका पर काम के बोझ को आप हल्का नहीं करेंगे ये सब कारगर नहीं होगा।
सिर्फ 21,000 जज कर रहे हैं सुनवाई
जस्टिस टीएस ठाकुर ने दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की ज्वाइंट कॉन्फ्रेंस में यह बात कही। उन्होंने कहा कि आज देश में सिर्फ 21,000 जज ही हैं जो अलग-अलग केसों की सुनवाई कर रहे हैं। जबकि यह संख्या 40,000 होनी चाहिए।
अमेरिका और भारत का अंतर
टीएस ठाकुर ने भारत और विदेशों में काम करने के तरीके और दबाव का जिक्र भी सबके सामने किया। उन्होंने कहा कि आप इतना तनाव न्याय व्यवस्था पर नहीं डाल सकते। दूसरे देशों के जज से तुलना करने पर भारत के जज काफी आगे हैं।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में हर साल 81 केसों का निपटारा होता है, लेकिन भारत में हर साल 2600 केसों का निपटारा होता है।
झगड़े में पिसती न्यायपालिका
चीफ जस्टि ने अदालतों की अनदेखी पर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच झगड़े का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि केंद्र किसी बात को लेकर हामी भरता है और कहता है कि वे तैयार हैं, लेकिन ये राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है।
राज्य सरकारें कहती हैं कि ठीक है तो केंद्र फंड मुहैया कराए। उन्होंने कहा कि ये सभी चीजें पहले भी हो चुकी हैं। पीएम मोदी ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि सरकार न्यायपालिका के साथ मिलकर इस समस्या का हल तलाशेगी।












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