'मरकर' कैसे जिंदा हो गया था उत्तर भारत का 'सबसे बड़ा डॉन' धनंजय सिंह, अचानक अच्छा भला देख पुलिस को लगा था सदमा
Dhananjay Singh Story: पूर्वांचल के माफिया-डॉन और बाहुबली नेता धनंजय सिंह एक बार फिर से चर्चा में हैं। वजह है, धनंजय सिंह का जेल से बाहर आ जाना। इलाहाबाद हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद धनंजय सिंह जेल से रिहा हो गए हैं।
लोकसभा चुनाव-2024 के दौरान धनंजय सिंह की जमानत याचिका को मंजूर किए जाने पर विपक्षी पार्टी मुद्दा बना रही है। हालांकि धनंजय सिंह लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे।

धनंजय सिंह अभी भले ही जेल से बाहर आ गए हैं। लेकिन उनकी सजा जारी रहेगी...जिसकी वजह से वह लोकसभा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें फौरी राहत दी है।
सपा विधायक बोले- धनंजय सिंह 'उत्तर भारत का सबसे बड़ा डॉन'
इसी बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक अभय सिंह ने धनंजय सिंह को 'उत्तर भारत का सबसे बड़ा डॉन' बताया है।
यूपी विधायक अभय सिंह ने कहा है, ''धनंजय सिंह आज की तारीख में उत्तर भारत का सबसे बड़ा डॉन है। राजस्थान, पंजाब, यूपी, में उससे बड़ा डॉन कोई और नहीं है। उसे किसी से खतरा नहीं है बल्कि उससे सबको खतरा है।''
इसी बीच हम आपको पूर्वांचल से दो बार विधायक और एक बार सांसद चुने गए बाहुबली नेता धनंजय सिंह से जुड़ी एक ऐसी घटना बताने जा रहे हैं, जब उन्हें सब लोगों ने मरा समझ लिया था। यहां तक कि पुलिस ने भी उन्हें मृत घोषित कर दिया था। आइए जानें क्या है पूरा वाक्या...

कैसे धनंजय सिंह 'मरकर' हो गए थे जिंदा!
ये घटना है, 1998 के भदोही फेक एनकाउंटर की। बीबीसी के मुताबिक 17 अक्टूबर 1998 का दिन था। पुलिस को अपने मुखबिरों से सूचना मिली कि, '50 हजार का ईनामी मोस्ट वांटेड अपराधी धनंजय सिंह 3 अन्य लोगों के साथ भदोही मिर्जापुर रोड पर एक पेट्रोल पंप पर डकैती करने वाले हैं।'
पुलिस ने इस सूचना पर एक्शन लेते हुए दोपहर 11.30 बजे पेट्रोल पंप पर अचानक छापेमारी की। इस एनकाउंटर में उस वक्त 4 लोगों के मारे जाने की सूचना दी गई। मुठभेड़ में मारे गए 4 लोगों में एक को धनंजय सिंह बताकर मृत घोषित कर दिया गया था।
इलाके में खबर आग की तरह फैली की धनंजय सिंह नहीं रहें। लेकिन सच्चाई ये थी कि धनंजय जिंदा और फरार थे। लेकिन उन्होंने कई महीनों तक अपनी जिंदा होने की सच्चाई सबसे छिपाकर रखी और गुमनाम रहें।

ऐसे सामने आया धनंजय सिंह के जिंदा होने का सच!
धनंजय सिंह के जिंदा होने का सच फरवरी 1999 में उस वक्त सामने आया, जब वो पुलिस के सामने पेश हुए। धनंजय सिंह के पुलिस के सामने आते ही भदोही फेक एनकाउंटर का भी राज खुल गया।
धनंजय सिंह के जिंदा होने की बात जैसे ही सामने आई, इस मामले में मानवाधिकार आयोग की जांच बैठाई गई। फेक एनकाउंटर में शामिल 34 पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज किया गया था। इस केस की सुनवाई अभी भी भदोही की स्थानीय अदलात में अब भी जारी है।

धनंजय सिंह के ऊपर कितने आपराधिक केस दर्ज हैं?
2017 के चुनावी शपथपत्र में धनंजय ने जानकारी दी थी कि उनके खिलाफ 3 गंभीर केस दर्ज हैं। जिसमें हत्या, सबूत मिटाने और अपराध के लिए उकसाने का मुकदमा है।
लेकिन साल 2018 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य पुलिस से पूछा था कि 24 से ज्यादा आपराधिक मामले वाले नेता को 'वाई सिक्योरिटी' क्यों दी गई है? इस जनहित याचिका में जानकारी दी गई थी कि धनंजय सिंह पर 24 आपराधिक मुकदमें दर्ज हैं। जिसमें से 7 हत्या के केस हैं।












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