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जब कतर में एक भारतीय हिंदू की मौत पर नहीं मिली दाह संस्कार की आजादी

नई दिल्ली, 11 जून। मुस्लिम देश अपने धर्म के लिए तो सम्मान की ख्वाहिश रखते हैं लेकिन क्या वे अन्य धर्म के प्रति भी सम्मान की भावना रखते हैं ? इसका जवाब है नहीं। अरब देशों में अगर सऊदी अरब और कतर की बात करें तो यहां हिंदू ताउम्र असमानता तो झेलते ही हैं मौत के बाद भी इज्जत नसीब नहीं होती। कतर और सउदी अरब में अगर किसी हिंदू की मौत हो गयी तो उसको दाह संस्कार की अनुमति नहीं है। हिंदुओं को अपने धार्मिक परम्परा के निर्वाह का अधिकार नहीं है।

When an Indian Hindu did not get permission cremation in Qatar

हिंदू व्यक्ति के शव को दफनाने के लिए बाध्य किया जाता है या फिर शव को भारत ले जाकर दाह संस्कार करना पड़ता है। हाल ही में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के साथ गेबान, सेनेगल और कतर की यात्रा पर गये थे। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कतर के प्रधानमंत्री से आग्रह किया था कि वे हिंदुओं को दाहसंस्कार के लिए जमीन मुहैया कराएं। कितने दुख की बात है कि एक हिंदू को मौत के बाद भी मुस्लिम देशों में जिल्लत झेलनी पड़ती है। इस मामले में सऊदी अरब की एक घटना काबिले जिक्र है।

जब सऊदी अरब में एक हिंदू के शव को दफनाया गया

जब सऊदी अरब में एक हिंदू के शव को दफनाया गया

हिमाचल के प्रदेश के रहने वाले संजीव कुमार सऊदी अरब में नौकरी कर रहे थे। उनकी नौकरी के 23 साल हो चुके थे। लेकिन जनवरी 2021 में अचानक उनकी मौत हो गयी। सऊदी अरब प्रशासन ने संजीव के शव को दाहसंस्कार की मंजूरी नहीं दी। उनके शव को दफना दिया गया। तब संजीव कुमार की पत्नी अंजु शर्मा ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की। उन्होंने अदालत से दरख्वास्त की कि उनके पति के शरीर के अवशेषों को भारत लाने का निर्देश दिया जाय ताकि वे हिंदू रीति रिवाजों के मुताबिक उनका अंतिम संस्कार कर सकें। जस्टिस प्रतिभा सिंह की कोर्ट में जब यह मामला आया तो उन्होंने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने विदेश मंत्रालय के उप सचिव को अदालत में पेश होने का आदेश दिया। विदेश मंत्रालय के उप सचिव ने 10 दिनों की मोहलत मांगी लेकिन कोर्ट ने यह मांग खारिज कर दी। कोर्ट ने विदेश मंत्रालय को कहा कि आप इस मामले की गंभीरता को समझें और त्वरित निर्णय लें। तब विदेश मंत्रालय के वकील ने कहा कि हमें इस मामले में लंबा प्रयास करना होगा।

क्या ऐसी भी गलती होती है ?

क्या ऐसी भी गलती होती है ?

कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया था कि दिल का दौरा पड़ने के कारण संजीव कुमार की 24 जनवरी 2021 को मौत हो गयी थी। दिल्ली में परिजन उनके शव के आने का इंतजार कर रहे थे। लेकिन उन्हें निराश होना पड़ा। 18 फरवरी 2021 को भारतीय वाणिज्य दूतावास ने अंजु शर्मा को बताया कि संजीव कुमार के शव को सऊदी अरब में गलती से दफना दिया गया है। भूल से संजीव कुमार को मुस्लिम समझ लिया गया और उनका मुस्लिम धर्म की परम्परा के अनुसार अंतिम संस्कार कर दिया गया। भारतीय वाणिज्य दूतावास ने इस गलती के लिए माफी मांगी। लेकिन अंजु शर्मा और उनके परिजनों का कहना था कि दूतावास ने संजीव कुमार के अंतिम संस्कार के लिए परिवार से कोई सहमति नहीं ली थी। क्या ऐसी भी गलती हो सकती है ? क्या संजीव कुमार के सहयोगियों ने प्रशासन को उनके हिंदू होने की बात नहीं बतायी होगी ?

लोकसभा में उठ चुका है यह मामला

लोकसभा में उठ चुका है यह मामला

मतलब सऊदी अरब और कतर में रहने वाले हिंदू समुदाय को धार्मिक आजादी हासिल नहीं है। जब कि भारत में रहने वाले मुस्लिम समुदाय को एक भारतीय नागरिक के रूप में सभी अधिकार प्राप्त हैं। अगर किसी मुस्लिम देश में हिंदू निवास करते हैं तो उन्हें न्यूतम आजादी भी क्यों नहीं मिलती ? अगर किसी हिंदू को दफना दिया जाय तो क्या यह सनातन धर्म का अपमान नहीं है ? अब सवाल ये है कि मुस्लिम देश जिस तरह इस्लाम के प्रति ही आदर की भावना चाहते हैं उसी तरह दूसरे धर्मों का सम्मान क्यों नहीं करते ? 2019 में संसद में ये मामला उठा था। भाजपा सांसद गोपाल शेट्टी ने लोकसभा में सवाल पूछा था, सरकार बताए कि किन मुस्लिम देशों में हिंदू समुदाय को अंतिम संस्कार और धार्मिक आयोजन की इजाजत नहीं है ? क्या सरकार ने इन देशों के सामने इस मुद्दे को उठाया है ? तब तत्कालीन विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह ने सदन में इस प्रश्न का जवाब दिया था। तब उन्होंने कहा था, सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र, कतर, जॉर्डन जैसे देशों में हिंदुओं को दाह संस्कार की अनुमति नहीं है। सरकार हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए संबंधित देशों के सामने मामला उठाती रही है। लेकिन यह भी ध्यान देने की जरूरत है कि अंतिम संस्कार का विषय स्थानीय़ कानून से संचालित होता है।

कतर ने लाल कृष्ण आडवाणी को दिया था भरोसा

कतर ने लाल कृष्ण आडवाणी को दिया था भरोसा

लालकृष्ण आडवाणी ने अपनी किताब- मेरा देश मेरा जीवन- में लिखा है, जब मैं कतर गया तो वहां आमिर शेख हामिद बिन खलीफा अल-थानी ने मेरा गर्मजोशी से स्वागत किया। लेकिन वहां जब मेरी भारतीय समुदाय से मुलाकात हुई तो उन्होंने एक शिकायत मेरे सामंने रखी। मुझे बताया गया कि अगर कतर में किसी हिंदू व्यक्ति की मौत हो जाए तो उसे दाह संस्कार की अनुमति नहीं मिलती। दफनाने की इजाजत भी बहुत मुश्किल से मिलती है। मैंने कतर के आमीर के साथ बातचीत में इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने मुझे आश्वसान दिया था कि वे इस मांग पर गौर करेंगे। आडवाणी की यह किताब 2008 में प्रकाशित हुई थी। 14 साल हो गये लेकिन कतर ने हिंदुओं को यह अधिकार अभी तक नहीं दिया है। इससे पता चलता है मुस्लिम देश अन्य धर्म के लोगों का कितना आदर करते हैं।

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