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पिछले 5 साल में MSP पाने वाले किसानों की संख्या 70 फीसदी बढ़ी, फिर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हंगामा क्यों?

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नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी सरकार (Modi Government) के कार्यकाल में किसानों को उनकी फसलों पर मिलने वाला न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पहले की तुलना में और भी ज्यादा बेहतर हुआ है। नवीनतम सरकारी आंकड़ों के अनुसार, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ उठाने वाले गेहूं किसानों की संख्या पिछले पांच वर्षों में दोगुनी हो गई है, जबकि इसी तरह के धान किसानों की संख्या में 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ये नया डेटा राज्यसभा में शुक्रवार (18 सितंबर) को उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री रावसाहेब पाटिल दानवे द्वारा साझा किया गया। इन सब के बीच अब सवाल ये उठता है कि जब एमएसपी पहले की तुलना में बेहतर हो तो किसान इसको लेकर इतना हंगामा क्यों कर रहे हैं।

गेहूं के किसानों को कितना मिला MSP?

गेहूं के किसानों को कितना मिला MSP?

9 सितंबर तक, रबी विपणन सीजन (RMS) 2020-21 के दौरान एमएसपी (MSP) का लाभ उठाने वाले गेहूं किसानों की संख्या पिछले साल के 35.57 लाख से 22 प्रतिशत बढ़कर 43.33 लाख हो गई।

वहीं, आंकड़ों से पता चलता है कि एमएसपी (MSP) का लाभ उठाने वाले गेहूं किसानों की संख्या आरएमएस (RMS) 2016-17 के मुकाबले दोगुनी हो गई है, जिसमें 112 प्रतिशत वृद्धि हुई है। 2016-17 संख्या 20.46 लाख थी।

धान के किसानों को कितना मिला MSP?

धान के किसानों को कितना मिला MSP?

आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि खरीफ विपणन सीजन (KMS) 2019-20 के दौरान एमएसपी (MSP) का लाभ उठाने वाले धान किसानों की संख्या 1.24 करोड़ हो गई है। यह 96.93 लाख धान किसानों से 28 प्रतिशत अधिक है, जिन्होंने केएमएस (KMS) 2018-19 के दौरान एमएसपी का लाभ उठाया था। KMS 2020-21 के लिए डेटा उपलब्ध नहीं है क्योंकि खरीफ धान की खरीद अभी शुरू नहीं हुई है।

एमएसपी (MSP) का लाभ उठाने वाले धान किसानों की संख्या 2015-16 के बाद से 70 प्रतिशत बढ़ी है जब यह संख्या 73.08 लाख थी।

ये भी पढ़ें- आखिर क्या है कृषि संबंधी विधेयक, क्यों मचा है इस पर बवाल?

किस राज्य के किसानों को MSP का कितना मिला फायदा

किस राज्य के किसानों को MSP का कितना मिला फायदा

आरएमएस (RMS) सीजन के दौरान, एमएसपी (MSP) का लाभ उठाने वाले जिन पांच राज्यों के गेहूं किसानों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है, वो है- मध्य प्रदेश (15.93 लाख), पंजाब (10.49 लाख), हरियाणा (7.80 लाख), उत्तर प्रदेश (6.63 लाख) और राजस्थान हैं (2.19 लाख)।

खरीफ विपणन सीजन (KMS) 2019-20 के दौरान एमएसपी (MSP) का लाभ उठाने वाले जिन पांच राज्यों के धान किसानों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है, वो है- तेलंगाना (19.88 लाख), हरियाणा (18.91 लाख), छत्तीसगढ़ (18.38 लाख), ओडिशा (11.61 लाख) और पंजाब (11.25 लाख)।

क्या है MSP को लेकर किसानों की परेशानी

क्या है MSP को लेकर किसानों की परेशानी

मोदी सरकार के नए कृषि बिल (Agri Bill 2020) को लेकर किसानों में काफी गुस्सा है। केंद्र सरकारा द्वारा लोकसभा में पास कराए गए बिल में से जो सबसे ज्यादा किसानों के लिए चिंता की बात है वो है न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी (MSP- Minimum Support Price)। किसानों को इस बात का डर है कि नए दो कानून आने के बाद एमएसपी की व्यवस्था खत्म हो जाएगी। हालांकि सरकार का कहना है कि ऐसा कुछ भी नहीं होगा। ये नया बिल किसानों को और भी मजबूती देगा।

बता दें कि सरकार एमएसपी (MSP- Minimum Support Price) तय करते वक्त उत्पादक की लागत, मांग-आपूर्ति, इनपुट आउटपुट मूल्य में समानता, दाम में बदलाव जैसी कई बातों को ध्यान रखती है।

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English summary
Why MSP scare farmers when new data show number of wheat farmers who availed the minimum support price (MSP) has doubled in the last five years, while the number of such paddy farmers has increased by 70 per cent.
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