क्या थे CDS Bipin Rawat के आखिरी शब्द? बचावकर्मी ने बताया- हिंदी में कही थी कुछ बात

नई दिल्ली, 09 दिसंबर। बुधवार, 8 दिसंबर का दिन देश के लिए सबसे दुख भरा रहा। भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका और 11 अन्य सैन्य अधिकारियों की तमिलनाडु में कुन्नूर के पास एक हेलिकॉप्टर हादसे में मृत्यु हो गई। दुर्घटना के बाद से देश शोक में डूबा हुआ है, आज संसद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने घटना को लेकर कई अहम जानकारियां दी। इस बीच हेलिकॉप्टर हादसे के दौरान राहत बचाव कार्य में लगे एक कर्मी ने बताया कि निधन से पहले बिपिन रावत का आखिरी शब्द क्या थे?

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    CDS Bipin Rawat Death: जिंदा निकाले गए थे Bipin Rawat, जानें क्या थे आखिरी शब्द ? | वनइंडिया हिंदी
    दोपहर 12.08 बजे के बाद हुआ क्रैश

    दोपहर 12.08 बजे के बाद हुआ क्रैश

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मुताबिक हादसा दोपहर 12.08 बजे के बाद हुआ, इसके बाद से एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने हेलिकॉप्टर से अपने संपर्क खो दिया था। राजनाथ सिंह ने कहा, 'जनरल विपिन बिपिन रावत अपने दौरे के लिए तमिलनाडु के वेलिंग्टन जा रहे थे। वायु सेना के Mi-17 V5 हेलिकॉप्टर कल 11:48 AM बजे सुलूर एयर बेस से अपनी उड़ान भरी और इसे 12:15 बजे वेलिंग्टन लैंड करना था लेकिन सुलूर एयर बेस के एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने 12:08 बजे अपना संपर्क खो दिया।'

    हादसे के बाद जिंदा थे बिपिन रावत

    हादसे के बाद जिंदा थे बिपिन रावत

    वहीं, राहत बचाव कार्य में लगे वरिष्ठ फायरमैन एनसी मुरली ने बताया कि हेलिकॉप्टर के मलबे से दो लोगों को जिंदा निकाला गया, जिसमें से एक जनरल बिपिन रावत थे। उनका निधन अस्पताल ले जाते समय बीच रास्ते में हुई। एनसी मुरली के मुताबिक घटनास्थल से जिंदा निकाले गए दूसरे शख्स ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह थे, हालांकि उनकी पहचान बाद में की गई। बता दें कि इस हादसे में जिंदा बचने वाले ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह एकमात्र व्यक्ति हैं, फिलहाल उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।

    हिंदी में कहे थे ये आखिरी शब्द

    हिंदी में कहे थे ये आखिरी शब्द

    चॉपर क्रैश के बाद दुर्घटनास्थल पर पहुंचे फायरमैन और बचावकर्मी एनसी मुरली ने बताया कि निधन से पहले बिपिन रावत ने रक्षा कर्मियों से हिंदी में धीरे से कुछ बात की और अपना नाम बताया था। सीडीएस बिपिन रावत ने बताया कि उनके शरीर के निचले हिस्से बुरी तरह झुलस गए हैं, और गंभीर चोटें आई हैं। इसके बाद बचावकर्मियों ने उन्हें चादर में लपेटर एंबुलेंस में ले गया। घना जंगल होने की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी दिक्कतें आ रही थीं।

    घना जंगल बना मुसीबत

    घना जंगल बना मुसीबत

    एनसी मुरली ने आगे बताया कि घने पेड़ होने की वजह से घटनास्थल तक आग बुझाने के लिए दमकल वाहनों को ले जाना नामुमकिन था। ऐसे में पास की नदी से लोगों के घरों से बर्तन लाकर आग बुझाने की कोशिश की गई। हेलिकॉप्टर के परखच्चे उड़ गए थे और उसके नुकीले टुकड़ों की वजह से शवों को निकाल पाना मुश्किल हो रहा था। इस बीच राहत बचाव कार्य में टूटा हुआ पेड़ भी बाधा बन रहा था, जिसे बाद में काटा गया।

    मलबे के बीच पड़े थे हथियार

    मलबे के बीच पड़े थे हथियार

    इन सब के बीच मलबे में कई हथियार भी पड़े थे जिसकी वजह से सावधानी पूर्वक काम करना पड़ा रहा था। ऐसे में रेस्क्यू ऑपरेशन में और समय लगा। एनसी मुरली ने दावा किया कि दुर्घटनास्थल से 12 शव निकाले गए, जबकि दो लोगों को जिंदा निकाला गया था, जिसमें से एक जनरल बिपिन रावत थे। इस बीच भारतीय वायुसेना के जवान आधे रास्ते में बचाव अभियान में शामिल हो गए। हालांकि सीडीएस को बचाया नहीं जा सका।

    कल होगा अंतिम संस्कार

    कल होगा अंतिम संस्कार

    बता दें कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मुताबिक आज शाम हेलिकॉप्टर क्रैश के सभी पार्थिव शवों को दिल्ली लाया जाएगा। इसके बाद कल (शुक्रवार) दिल्ली में बिपिन रावत और अन्य अधिकारियों का पूरे सैन्य सम्मान के साथ छावनी इलाके में अंतिम संस्कार किया जाएगा। कन्नूर हेलिकॉप्टर हादसे में सीडीएस बिपिन रावत समेत 13 लोगों का निधन हुआ जिसमें उनकी पत्नी मधुलिका रावत भी शामिल थीं। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए वायुसेना ने जांच के आदेश दिए हैं।

    यह भी पढ़ें: Bipin Rawat : 'माचिस की डिब्बी' के कारण हुआ था बिपिन रावत का NDA में सेलेक्शन, खुद ही शेयर किया था किस्सा

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