Coronavirus पर चीन की घेराबंदी से क्या सीख सकती है दुनिया, प्वाइंट्स में जानिए

नई दिल्ली- चीन में कोरोना वायरस के प्रकोप का असर धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, लेकिन वहां से निकलने के बाद इस वायरस ने यूरोप समेत दुनिया भर के करीब डेढ़ सौ देशों में कहर बरपा रहा है। कहा जा रहा है कि चीन संक्रमण के सबसे बुरे दौर से उबर चुका है, लेकिन बाकी देशों में इसका संकट कब खत्म होगा कहना मुश्किल है। शुरू से इस वायरस को लेकर चीन दुनिया भर के लोगों की आलोचनाओं का शिकार बन रहा था। लेकिन, अब चीन का कहना है कि उसने तो इस अपने दम पर काबू पा लिया और अगर दुनिया इतने दिनों तक इस वायरस से लड़ने की तैयारी कर चुकी होती तो आज स्थिति इतनी खराब नहीं होती। बहरहाल चीन अब दुनिया को इसके लिए कुछ नसीहतें दे रहा है।

सकारात्मक कदम उठाने की सलाह

सकारात्मक कदम उठाने की सलाह

चीन के सरकारी अखबार ने मंगलवार को अपने संपादकीय में दावा किया है कि कोरोना वायरस का समय रहते पता लगाने, जल्द से जल्द क्वारंटाइन और जल्द से जल्द इलाज के तरीकों पर दुनिया को चीन से सीख लेनी चाहिए, जिससे कि इसके वैश्विक प्रकोप को कम किया जा सके। अखबार ने माना है कि हालांकि, पिछले साल कोरोना वायरस की शुरुआत चीन के ही वुहान शहर से हुई, जहां पहले तो अधिकारियों ने तो इसके प्रकोप को छिपाने की कोशिश की थी। लेकिन, उसके बाद चीन ने इस बीमारी को नियंत्रित करने और वैश्विक प्रकोप को रोकने के लिए जो सकारात्मक कदम उठाए उसमें उसे बहुत ही अच्छी कामयाबी मिली।

सिंगापुर, जापान और दक्षिण कोरिया का उदाहरण

सिंगापुर, जापान और दक्षिण कोरिया का उदाहरण

चीन में नए घरेलू मरीजों की संख्या लगातार घटती जा रही है। चीन का दावा है कि अब नए मामले विदेशों से ही उसके यहां आ रहे हैं और उसने अपना ज्यादा ध्यान उसे नियंत्रित करने पर ही लगा दिया है। ये मामले उन जगहों से आ रहे हैं, जहां यह महामारी का शक्ल अख्तियार कर चुकी है। चीनी अखबार के मुताबिक सिंगापुर, जापान और दक्षिण कोरिया ने चीन के 'अनुभवों और वायरस से सफलतापूर्वक निपटने में उससे मिली सीख पर अमल किया।' चीन उन्हें खुद से आगे बढ़कर अपने यहां अपनाई गई प्रक्रियाओं की जानकारी दे रहा है, जिसका उन्हें लाभ मिला है।

कुछ देशों ने जोखिम को नहीं समझा- चीन

कुछ देशों ने जोखिम को नहीं समझा- चीन

लेकिन, चीन के अखबार ने इस बात पर चिंता जताई है कि सभी देश उसकी ओर से अपनाई गई प्रक्रियाओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे महामारी से हालात और गंभीर होने की आशंका बढ़ गई है। अखबार ने लिखा है, 'परिस्थितियों की गंभीरता को समझते हुए भी कुछ देशों ने जोखिम को कमतर आंका और उन्होंने ऐसे कदम उठाए जो उनके अपने यहां महामारी को नियंत्रित करने के लिए तो नाकाफी थे ही, बल्कि वो खुद को दूसरे देशों में वायरस के पहुंचने का स्रोत बनने से रोकने के लिए भी पर्याप्त कदम नहीं उठा सके।'

सहयोग और समन्वय जरूरी- चीन

सहयोग और समन्वय जरूरी- चीन

कुछ देशों में हालात बद से बदतर होने के बारे में अखबार ने लिखा है कि उन देशों ने अब इस संक्रमण की रोकथाम के लिए क्वारंटाइन और इलाज के लिए जरूरी कदम उठाने के महत्त्व को समझा है। अपने अखबार के जरिए चीन ने ऐसे देशों को सलाह दी है कि उन्हें संचार के साधनों को भी मजबूत करना चाहिए और अपने प्रयासों के बीच बेहतर सहयोग और समन्वय भी स्थापित करने की कोशिश करनी चाहिए। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पिछले हफ्ते यूनाइटेड नेशन के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से कहा था कि जब इस वायरस के प्रकोप को रोकने के लिए चीन कोशिशें कर रहा था तो दुनिया ने अपने पास मौजूद 'बहुमूल्य समय' को यूं ही गंवा दिया, जिस दौरान वो खुद अपने लिए भी बेहतर तैयारियां कर सकते थे।

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