#Kashmir के हालात पर क्या लिख रहे हैं वहां रहने वाले लोग: सोशल
"मैं पिछले सात महीने से अपने माता-पिता से नहीं मिली हूं. आज मैं दो हफ़्ते के लिए घर जाने वाली थी क्योंकि ईद आने वाली है और मैंने पिछले दो साल से अपने परिवार के साथ ईद नहीं मनाई है. लेकिन ईद की ये छुट्टी मेरे लिए एक बुरे सपने में बदल गई..."
कश्मीर की रहने वाली रज़िया रशीद ने ये फ़ेसबुक स्टेटस इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से पोस्ट किया है.
कश्मीर की फ़िज़ा में इस वक़्त बेचैनी ही बेचैनी भरी है और वो बेचैनी रज़िया के इस फ़ेसबुक पोस्ट से महसूस की जा सकती है.
श्रीनगर में धारा-144 लगी हुई तो जम्मू में कर्फ़्यू. नेता नज़रबंद हैं और घाटी में मोबाइल इंटरनेट सेवा ठप.
ऐसे में जम्मू-कश्मीर के स्थानीय लोग तो घबराए हुए हैं ही, वो लोग भी घबराए हैं जो अपने घरों से दूर हैं. वो सभी लोग घबराए हुए हैं जिनका परिवार उनसे दूर कश्मीर में है और वो लोग भी परेशान हैं जो ख़ुद तो कश्मीर में है लेकिन उनका परिवार उनसे दूर है.
इन हालात में कश्मीरी सोशल मीडिया के जरिए अपने दिल की बात अपने करीबियों से साझा कर रहे हैं.
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सोबिया भट फ़ेसबुक पर लिखती हैं, "मेरे दो दोस्तों की आज सुबह फ़्लाइट थी और वो मानसिक रूप से लगभग टूट चुके हैं. उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि एयरपोर्ट पहुंचने के बाद वो क्या करें. उनकी अपने माता-पिता से बात भी नहीं हो पा रही है, वो समझ नहीं पा रहे हैं कि घर कैसे पहुंचें."
श्रीनगर के रहने वाले क़ैसर मिर्ज़ा ने लिखा है, "यहां इंटरनेट धीरे-धीरे खत्म हो रहा है. इंशा अल्ला, मिलते हैं."
सना फ़ाज़ली लिखती हैं, "मौजूदा हालात में आपमें से बहुत का आपका अपने परिवार से संपर्क नहीं हो पा रहा होगा. कृपया किसी भी तरह की मदद के लिए पूछने में न हिचकिचाएं."
सदफ़ वानी ने फ़ेसबुक पर लिखा है, "कश्मीर में 'कम्युनिकेशन ब्लैकआउट' स्थिति है. हमें नहीं मालूम कि वहां क्या हो रहा है. हम नहीं जानते कि कौन ज़िंदा है और किस पर जुल्म ढाए जा रहे हैं. हम कश्मीर के साथ खड़े हैं."












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