शादी की उम्र को लेकर केंद्र सरकार से अलग है RSS की राय, संघ ने बोली ये बात
नई दिल्ली, 24 फरवरी। केंद्र सरकार लड़कियों की शादी की उम्र 18 साल से बढ़ाकर 21 साल करना चाहती है लेकिन इ मुद्दे पर आरएसएस ने स्पष्ठ कर दिया है कि उसका इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से अलग सोच है।

आरएसएस ने अपने सर्वोच्च निर्णय लेने वाले निकाय की वार्षिक बैठक से पहले स्पष्ट कर दिया है कि लड़कियों के लिए शादी की उम्र पर सरकार द्वारा प्रस्तावित कानून पर उसका मतभेद है और उनका मानना है कि ऐसे मुद्दों का निर्णय समाज पर छोड़ दिया जाना चाहिए।। उसका यह भी मानना है कि हिजाब विवाद को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है और इसे स्थानीय स्तर पर ही सुलझाया जाना चाहिए था ।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार आरएसएस के सूत्रों ने कहा कि इन दोनों मुद्दों पर अन्य समसामयिक मुद्दों पर 11-13 मार्च को अहमदाबाद में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (एबीपीएस) बैठक के दौरान चर्चा होने की संभावना है।
बता दें एबीपीएस संगठन और उसके काम का जायजा लेने के लिए हर साल एक बैठक आयोजित होती और भविष्य की कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की जाती है। बैठक में आरएसएस के सभी शीर्ष नेता, देश भर के क्षेत्रों के प्रतिनिधि और 30 से अधिक संबद्ध संगठनों ने भाग लिया । जिसमें विवाह योग्य उम्र के मुद्दे पर चर्चा होगी और कई मत सामने आएंगे ।
आरएसएस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा आदिवासियों में या ग्रामीण क्षेत्रों में शादियां जल्दी हो जाती हैं। जिसके कारण लड़कियों की शिक्षा और कम उम्र में गर्भवती होने के कारण उकने स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है । सरकार भी इसे आगे बढ़ाने की जल्दी में नहीं दिख रही है। सवाल यह है कि सरकार को ऐसे मामलों में कितना दखल देना चाहिए। कुछ चीजें समाज पर छोड़ दी जानी चाहिए।
सूत्रों ने कहा कि सभी की विवाह योग्य आयु को 18 वर्ष से कम करने के लिए सरकार के साथ भी राय साझा की गई थी, लेकिन कुछ सामाजिक संगठनों ने इसका विरोध किया।आरएसएस नेता ने कहा इन पर राजनीतिक चर्चा नहीं होनी चाहिए, बल्कि सामाजिक चर्चा होनी चाहिए। असहाय समाज हर चीज के लिए कानून की मांग करते हैं। एक मजबूत समाज को अपने दम पर समाधान खोजना चाहिए। अगर कम सरकार से शासन में सुधार होता है, तो समाज में भी सुधार होता है।
बता दें दिसंबर 2022 में सरकार एक विधेयक पेश किया था जिसमें महिलाओं की शादी की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 साल करने का प्रावधान करने की बात कही गई थी । विपक्ष की आलोचना के बीच विधेयक को आगे की चर्चा के लिए संसदीय स्थायी समिति के पास भेजा गया।
बाल विवाह निषेध संशोधन बिल, 2021 में महिलाओं की शादी की उम्र 18 साल से बढ़ाकर 21 साल करने का प्रस्ताव है।
सूत्रों ने कहा कि वैवाहिक बलात्कार के मुद्दे पर संघ की भी ऐसी ही राय है और उनका मानना है कि इससे निपटने का फैसला परिवार पर छोड़ देना चाहिए।
आरएसएस का मानना है कि दो मुद्दे, पारिवारिक बंधन की संस्कृति को पुनर्जीवित करने के उसके राष्ट्रव्यापी अभियान के खिलाफ जाते हैं, जो आधुनिक आर्थिक मजबूरियों और पश्चिमी प्रभाव के कारण तनाव में आ गया है । आरएसएस कुटुम्ब प्रबोधन नामक एक कार्यक्रम चलाता है जिसमें परिवार समाज की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है और लोगों को अपने बड़े परिवार के साथ सप्ताह में कम से कम एक दिन बिताने और एक साथ खाने के लिए प्रेरित करता है।












Click it and Unblock the Notifications