ब्लैक वाटर में ऐसा क्या ख़ास है कि श्रुति हासन, पायल अग्रवाल, मलाइका अरोड़ा जैसे सितारे इसे पीते हैं...

ब्लैक वाटर
BBC
ब्लैक वाटर

ऐक्ट्रेस काजल अग्रवाल हाल ही में मुंबई एयरपोर्ट पर 'ब्लैक वाटर' की एक बॉटल के साथ दिखी थीं. पत्रकारों ने उनसे पूछ ही लिया कि बॉटल के पानी में क्या ख़ास बात है?

उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "ये भी पीने का पानी है. आप भी एक बार पीकर देखें. आपको ये भी अच्छा लगेगा."

जब उनसे ये पूछा गया कि वे कब से ब्लैक वाटर पी रही हैं तो उन्होंने जवाब दिया- काफी दिनों से.

कुछ दिनों पहले श्रुति हासन ने भी सोशल मीडिया पर ये एलान किया कि वो भी ब्लैक वाटर पी रही हैं. उन्होंने एक वीडियो रिकॉर्ड किया जिसमें एक ग्लास ब्लैक वाटर दिख रहा था.

श्रुति ने इस वीडियो में कहा, "जब मैंने पहली बार ब्लैक वाटर के बारे में सुना तो ये नई चीज़ लगी. दरअसल, ये कोई ब्लैक वाटर नहीं है. ये अल्केलाइन वाटर है. ये स्वाद में वैसा ही लगता है जैसा पीने का नॉर्मल पानी लगता है."

अतीत में मीडिया में ऐसी रिपोर्टें आती रही हैं कि मलाइका अरोड़ा, उर्वशी रॉतेला और कई फ़िल्मी सितारे भी ब्लैक वाटर का इस्तेमाल करते हैं.

https://www.instagram.com/p/ChNK-QMFyGu/

ब्लैक वाटर क्या है?

Banner
BBC
Banner
  • 'ब्लैक वाटर' को 'अल्केलाइन वाटर' या 'अल्केलाइन आयोनाइज़्ड वाटर' भी कहते हैं.
  • मेडिकल जर्नल 'एविडेंस बेस्ड कॉम्प्लिमेंटरी एंड अल्टर्नेटिव मेडिसीन' (ईबीसीएएम) के अनुसार, जिम या फिजिकल एक्सरसाइज के बाद या फिर शरीर से काफी पसीना बह गया हो तो ब्लैक वाटर के इस्तेमाल से कुछ मदद मिलती है. दरअसल, ये शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की सप्लाई बढ़ा देता है.
  • ईबीसीएएम के मुताबिक़, लैब में चूहों पर किए गए परीक्षण से ये बात सामने आई है कि अल्केलाइन वाटर शरीर के वजन को मेनटेन रखने में मदद करता है. इसके इस्तेमाल से मेटाबॉलिज़्म (उपापचय) की प्रक्रिया भी तेज़ होती है.
  • दूसरी तरफ़, कुछ कंपनियां अपने विज्ञापनों में ये दावा करती रही हैं कि पीएच लेवल 7 से ऊपर के स्तर के अल्केलाइन वाटर से बढ़ती उम्र के निशान कम होने लगते हैं.
  • हालांकि ईबीसीएएम की रिपोर्ट में शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसे दावों के पीछे कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं है.

ये भी पढ़ें-

पानी की कमी के चलते महाराष्ट्र के इस गांव में टूट रही हैं शादियां

पानी को तरसते महाराष्ट्र के कई गाँव

ब्लैक वाटर
Evocus
ब्लैक वाटर

ब्लैक वाटर में क्या होता है?

Banner
BBC
Banner

हमारे शरीर का 70 फ़ीसदी हिस्सा पानी है. इसलिए ये ज़रूरी हो जाता है कि हम पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें ताकि ये शरीर के सभी हिस्सों तक समुचित मात्रा में पहुंचती रही और सब कुछ ठीक से चलता रहे.

हमारे शरीर से अवांछित चीज़ों को बाहर निकालने में भी पानी मददगार होता है. दूसरी तरफ़, इससे शरीर का टेम्प्रेचर मेनटेन रहता है और शरीर के विभिन्न हिस्सों में खनिज-लवणों की आपूर्ति में इसकी भूमिका रहती है. भोजन ठीक से पचे, पानी की इस प्रक्रिया में भी अहम भूमिका है.

ब्लैक वाटर बेचने वाली कंपनियों का कहना है कि वे अपने प्रोडक्ट में 70 से अधिक मिनरल्स मिला रही हैं ताकि ऊपर जो चीज़ें बताई गई हैं, वो बेहतर तरीके से हो सकें.

ब्लैक वाटर में मैग्नेशियम और कैल्शियम जैसे मिनरल्स होते हैं. अलग-अलग कंपनियों के उत्पादों में मिनरल्स का अनुपात अलग होता है.

कंपनियों का दावा है कि ब्लैक वाटर से शरीर में मेटाबॉलिज़्म की प्रक्रिया तेज़ होती है, पाचन सुधरता है, एसिडिटी कम होती है और इम्युनिटी बढ़ती है.

ये भी पढ़ें-

ब्लैक वाटर
Evocus
ब्लैक वाटर

नॉर्मल पानी और ब्लैक वाटर में क्या अंतर होता है?

Banner
BBC
Banner

डायटीशियन डॉक्टर रूथ जयशीला कहती हैं, "पीने का जो पानी हम सामान्य तौर पर इस्तेमाल करते हैं, उसमें कुछ मिनरल्स अपेक्षाकृत कम मात्रा में होते हैं. ये खनिज पदार्थ हमारे शरीर के लिए अनिवार्य हैं. कुछ मामलों में इन खनिज लवणों की कमी की सूरत में इंसान बीमार भी पड़ सकता है."

उन्होंने बताया, "आरओ फिल्टर के पानी में पीएच का स्तर कम होता है. दूसरी तरफ़ इसमें अम्लीयता अधिक होती है. इसलिए कभी-कभी शरीर को आरओ के पानी के साथ दिक्कत पेश आती है. इसका नतीजा ये होता है कि कभी-कभी हमें विटामिंस और सप्लिमेंट्स अलग से लेने होते हैं. ऐसे लोगों के लिए ब्लैक वाटर से कुछ हद तक मदद मिलती है. लेकिन हमें ये भी याद रखना चाहिए कि इन चीज़ों की तुलना में प्राकृतिक विकल्प हमेशा अधिक कारगर होते हैं."

तरल रूप में मौजूद किसी खाद्य पदार्थ की एसिडिक (अम्लीयता) और उसके अल्केलाइन (क्षारीय) तत्वों को पीएच से मापा जाता है. इसे शून्य से 14 अंकों के एक स्केल पर मापा जाता है. अगर किसी पानी का पीएच लेवल 1 हो तो ये माना जाएगा कि वो अधिक अम्लीय है, दूसरी तरफ़ अगर पीएच लेवल 13 हो तो कहा जाएगा कि उसमें क्षारीय तत्वों की मात्रा अधिक है.

सामान्य तौर पर जो पानी हम पीते हैं, उसका पीएच लेवल 6 और 7 के बीच रहता है. लेकिन अल्केलाइन वाटर का पीएच लेवल 7 से अधिक होता है. इसका मतलब हुआ कि पीने के सामान्य पानी की तुलना में ब्लैक वाटर अधिक क्षारीय होता है.

डॉक्टर रूथ जयशीला कहती हैं, "हालांकि हम ये नहीं कह सकते हैं कि अल्कालाइन वाटर स्वास्थ्य के लिए सिर्फ़ इसलिए अधिक फ़ायदेमंद है क्योंकि इसका पीएच स्तर अधिक होता है. ये पानी में मौजूद मिनरल्स पर निर्भर करता है. साथ ही ये बात भी मायने रखती है कि ये मिनरल्स शरीर के विभिन्न हिस्सों में किस तरह से पहुंच रहे हैं."

ये भी पढ़ें-

पानी
Getty Images
पानी

ब्लैक वाटर से किन्हें मदद मिलती है?

Banner
BBC
Banner

रिसर्चर्स का कहना है कि अल्केलाइन वाटर से उन लोगों को मदद मिलती है जिन्हें कुछ ख़ास किस्म की स्वास्थ्य समस्याएं हैं.

उदाहरण के लिए पेप्सिन नाम के एक एंज़ाइम की वजह से पेट में एसिडिटी महसूस होती है.

अमेरिकी की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ़ मेडिसीन की रिसर्च के अनुसार, अल्कालाइन मिनरल वाटर का पीएच अगर 8.8 हो तो इससे इस एंज़ाइम के प्रभाव को कम किया जा सकता है.

ठीक इसी तरह जापान की ओसाका यूनिवर्सिटी के ग्रैजुएट स्कूल ऑफ़ मेडिसीन के विशेषज्ञों के साल 2018 के एक रिसर्च में ये बात सामने आई कि अल्केलाइन इलेक्ट्रोलाइज़्ड पानी से पाचन क्षमता सुधारने में मदद मिलती है और कब्ज़ की शिकायत दूर होती है.

अमेरिका के थॉमस जेफ़रसन यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों का कहना है कि नॉर्मल पानी पीने की तुलना में अधिक पीएच लेवल वाला अल्केलाइन पानी पीने से रक्त प्रवाह बेहतर होता है.

मेडिकल न्यूज़ वेबसाइट 'द हेल्थलाइन' का कहना है कि ऊपर जिन तीन रिसर्च प्रोजेक्ट्स का ज़िक्र किया गया है, उनका स्केल बहुत सीमित था और ऐसे दावों की पुष्टि के लिए व्यापक शोध की आवश्यकता है.

ये भी पढ़ें-

पानी
CHOKSAWATDIKORN / SCIENCE PHOTO LIBRARY
पानी

क्या इसका कोई साइड इफेक्ट भी है?

Banner
BBC
Banner

ऐसा नहीं है कि ब्लैक वाटर के साथ सब कुछ अच्छा ही है. कुछ रिसर्च में ये भी संकेत दिए गए हैं कि लंबे समय तक ब्लैक वाटर का इस्तेमाल करने के कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं.

फिनलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ़ तुर्कु के प्रोफ़ेसर मरीना मर्न की रिसर्च में ये कहा गया है कि ब्लैक वाटर के अधिक इस्तेमाल से उल्टी की समस्या और शरीर के भीतर मौजूद तरल पदार्थों के पीएच स्तर में बदलाव हो सकते हैं.

डायटीशियन नीता दिलीप भी कहती हैं कि मिनरल्स का अधिक इस्तेमाल सेहत के लिए ठीक नहीं है. उन्होंने बताया, "मिनरल्स सेहत के लिए अच्छे माने जाते हैं. लेकिन मिनरल्स का अधिक इस्तेमाल शरीर के लिए ज़हरीला बन सकता है. दूसरी तरफ़, मिनरल्स की कमी से बीमारियां भी हो सकती हैं."

"कैल्शियम की अधिक मात्रा लेने से हायपरकैल्शियम हो सकता है. ठीक इसी तरह से आयरन अधिक हो जाए तो हैमोक्रोमैटोसिस हो सकता है. इसलिए कोई भी मिनरल हमें ज़रूरी मात्रा में ही लेना चाहिए. ओवरडोज़ जानलेवा हो सकता है."

नीता दिलीप कहती हैं, "ये सच है कि सिलेब्रिटीज़ इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. हालांकि वे ज़रूरी एहतियात भी बरतते हैं. उनके पास पर्सनल हेल्थ एक्सपर्ट और डायटीशियन की टीम होती है. सिर्फ़ इसलिए कि कोई ब्लैक वाटर का इस्तेमाल कर रहा है तो हम भी यही करने लग जाएं, ये ज़रूरी नहीं है. हर इंसान का शरीर अलग होता है. हमें हरेक पहलू का ख़्याल रखना चाहिए."

ये भी पढ़ें-

ब्लैक वाटर की कीमत क्या है?

Banner
BBC
Banner

भारत में कई ब्रैंड्स ब्लैक वाटर बेच रहे हैं. इनमें इवोकस भी एक है. मलाइका अरोड़ा के हाथों में जो बॉटल दिखती है, वो इसी ब्रैंड का होता है.

इसके छह बॉटल का पैक 600 रुपये में खरीदा जा सकता है. हरेक बॉटल में आधा लीटर पानी रहता है.

गुजरात से कारोबार करने वाली इवोकस का कहना है कि उसकी हरे एक बॉटल में 32 मिलिग्राम कैल्सियम, 21 मिलिग्राम मैग्नीशियम और 8 मिलिग्राम सोडियम होता है.

'वैद्य ऋषि' ब्लैक वाटर बेचने वाली एक और कंपनी है जिसके छह बॉटल (500 मिली) का सेट 594 रुपये में मिलता है.

यानी ब्लैक वाटर के आधे लीटर की एक बॉटल की कीमत बाज़ार में 100 रुपये के करीब पड़ती है.

ये भी पढ़ें:-

क्या हम इसका इस्तेमाल कर सकते हैं?

Banner
BBC
Banner

विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लैक वाटर का संतुलित इस्तेमाल ख़तरनाक नहीं है. लेकिन उनका कहना है कि सबसे अहम बात ये है कि हमारा शरीर ब्लैक वाटर में मौजूद मिनरल्स को पचाने में कितना सक्षम है.

नीता दिलीप बताती हैं, "अगर आपका शरीर ब्लैक वाटर में मौजूद मिनरल्स पचा नहीं सकता तो इसके इस्तेमाल का कोई मतलब नहीं है. ऐसा इसलिए है क्योंकि हरे एक इंसान का शरीर अलग होता है."

वो सुझाव देती हैं कि अगर आप अपने शरीर को मिनरल्स देना चाहते हैं तो बेहतर है कि आप कुदरती तरीके ही इस्तेमाल करें.

उन्होंने बताया, "उदाहरण के लिए अंकुरित अनाज, ताज़े फल और सब्ज़ियां खाएं. इनमें मौजूद एंज़ाइम्स बेहतर होते हैं. शरीर उन्हें आसानी से स्वीकार कर सकता है. आपने कभी अपने पूर्वजों को ब्लैक वाटर जैसी कोई चीज़ इस्तेमाल करते देखी थी. वे हमारी तुलना में अधिक स्वस्थ थे. अगर आप ये समझ सकते हैं तो मानेंगे कि सब कुछ प्रकृति ही है."

डॉक्टर रूथ जयशीला कहती हैं, "ब्लैक वाटर के कई प्राकृतिक विकल्प हैं. नींबू का पानी, ग्रीन टी, बासिल सीड वाटर, नारियल का पानी वगैरह. ये सब प्राकृतिक विकल्प हैं. अगर आप खीरा और दूसरे फल पानी में डुबो कर पूरी रात रखें और सुबह इसका सेवन करें तो आपको ज़रूरत के मुताबिक़ सभी मिनरल्स मिल जाएंगे."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+