Zoonotic: तो जूनोटिक से होगी साल 2050 तक 12 गुना मौतें! जानिए इस गंभीर बीमारी के बारे में सबकुछ
Zoonotic Infections: कोरोना महामारी को याद करके आज भी लोग सिहर उठते हैं। इस वैश्विक बीमारी ने जिस तरह से कहर बरपाया उसे शब्दों में परिभाषित करना बेहद मुश्किल है। इस बीमारी ने ना जाने कितने परिवारों को एक साथ ही खत्म कर दिया। हालांकि अब चीजें नियंत्रित हैं और लोग अब स्वस्थ रूप से आगे बढ़ रहे हैं लेकिन जिन्होंने इस बीमारी के कारण अपनों को खोया है, वो शायद ही इसके दर्द से कभी निकल पाएंगे।

इसी बीच एक ताजा शोध में चौंकाने वाली बात सामने आई है। जिसमें कहा गया है कि साल 2050 तक दुनिया में 12 गुना ज्यादा लोगों की मौतें जूनोटिक संक्रमण की वजह से होगी।
लगातार जूनोटिक संक्रमण में इजाफा हो रहा है
ये शोध प्रकाशित हुआ है ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (बीएमजे) में, जिसमें कहा गया है कि बढ़ती जनसंख्या और क्लाइमेट चेंज की वजह से जूनोटिक संक्रमण में इजाफा हो रहा है, जो कि ये इशारा कर रहा है कि भविष्य में कोरोना जैसी बीमारी फिर से आ सकती है। यहां आपको बता दें कि ये शोध 60 साल के विश्लेषण के आधार पर किया गया है।
तो जूनोटिक से होगी साल 2050 तक होगी 12 गुना मौतें!
स्टडी में साफ किया गया है कि 1963 से 2019 के बीच जुनोटिक इंफेक्शन की वजह से करीब 5 फीसदी मौतों में वृद्धि हुई है और यही स्थिति रही तो 2050 में जूनोटिक संक्रमण से मरने वालों लोगों की संख्या 12 गुना हो जाएगी। अब सवाल ये उठता है कि जुनोटिक महामारी है क्या? और इसके बचने के क्या उपाय हैं?
क्या होते हैं जूनोटिक रोग?
दरअसल जूनोटिक रोग वो होते हैं जो कि जानवरों से इंसानों में फैलते हैं। कोविड 19 भी एक जूनोटिक रोग ही था। इसकी साइकल कुछ इस तरह से है।ये एनीमल से वायरस के रूप में निकलती है और फिर बैक्टीरिया पैरासाइट के रूप में प्रोटोजोआ में जाती है जो कि फंगी फार्म से इंसानों तक पहुंचता है।
6 जुलाई को 'विश्व जूनोज दिवस'
इसलिए हर किसी को इस तरह की बीमारियों के बारे में जागरूक होना चाहिए। बहुत सारे लोगों को इन रोगों के बारे में पता ही नहीं होता है इसलिए लोगों को इसके प्रति जागरुक करने के लिए 6 जुलाई को 'विश्व जूनोज दिवस' मनाया जाता है।
कौन-कौन से रोग हैं जूनोटिक?
- मलेरिया
- डेंगू
- चिकुनगुनिया
- येलो फीवर
- एंसेफ्लाइटिस
- प्लेग
- निपाह वायरस
- इबोला
- जीका वायरस
- कोविड-19
- रेबीज
- बर्ड फ्लू
- स्वाइन फ्लू
- एंसेफ्लाइटिस
किनको ज्यादा खतरा?
- बुजुर्ग
- 5 साल से छोटे बच्चे
- गर्भवती महिला
- कैंसर पीड़ित
- फॉरेस्ट एरिया में रहने वाले लोग
- खेती करने वाले लोग
- वन्य क्षेत्रों में काम करने वाले लोग
कैसे होता है इंफेक्शन ?
- संक्रमित जानवर के संपर्क में आने से
- कहीं-कहीं पानी और हवा से भी
- किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ होने से भी इंसान रोगी हो जाता है।
जानकारी ही बचाव है
इन रोगों से बचने का सही उपाय ये ही है कि आप ज्यादा से ज्यादा जानकारी ग्रहण करें और अगर आपको किसी भी रोग के लक्षण दिखें तो लापरवाही ना करें बल्कि तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।












Click it and Unblock the Notifications