Explained: Manipur में ताजा हिंसा की वजह क्या है? क्या है प्रदर्शनकारियों की मांग
Manipur Violence: भारतीय सेना और असम राइफल्स के कर्मियों ने राज्य में कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए रात भर सभी समुदायों के 7,500 से अधिक नागरिकों को निकालने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाए।

Manipur Violence: मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में हिंसा भड़क चुकी है। स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए चप्पे चप्पे पर सेना और असम राइफल्स के जवानों की तैनाती की गई है। वहीं आठ जिलों में धारा 144 लगाने के बाद कर्फ्यू लगा दिया गया है। वहीं इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह से बात कर ताजा हालात की जानकारी ली है। सेना ने पांच दिनों के लिए इंटरनेट सेवा बंद कर दी है। आइए जानते हैं आखिर यह हिंसा क्यों भड़की है। प्रदर्शनकारियों की क्या मांग है?
क्यों भड़की हिंसा?
ऑल ट्राइबल स्टूडेंट यूनियन मणिपुर (एटीएसयूएम) द्वारा चुराचांदपुर जिले के तोरबंग क्षेत्र में बुलाए गए 'आदिवासी एकजुटता मार्च' के दौरान इंफाल घाटी में वर्चस्व रखने वाले गैर-आदिवासी मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग के विरोध में हिंसा भड़क गई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि रैली में हजारों आंदोलनकारियों ने हिस्सा लिया, जिसके दौरान टोरबुंग इलाके में आदिवासियों और गैर-आदिवासियों के बीच हिंसा की खबरें आईं।
Manipur Violence
अधिकारी ने कहा कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कई राउंड आंसू गैस के गोले छोड़े। उन्होंने कहा कि स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है लेकिन कई आंदोलनकारी अब पहाड़ियों के विभिन्न हिस्सों में अपने घरों को लौटने लगे हैं।
अधिकारी ने कहा कि उग्र प्रदर्शनकारियों को इंफाल पश्चिम जिले के कांचीपुर और घाटी के पूर्वी इंफाल में सोइबम लीकाई में जवाबी कार्रवाई के लिए इकट्ठा होते देखा गया, लेकिन भारी पुलिस तैनाती सुनिश्चित की गई है और गैर-आदिवासी आंदोलनकारियों को अपने घर लौटने के लिए कहा गया है।
इन जिलों में लगा कर्फ्यू
स्थिति को देखते हुए, गैर-आदिवासी बहुल इंफाल पश्चिम, काकचिंग, थौबल, जिरिबाम और बिष्णुपुर जिलों और आदिवासी बहुल चुराचांदपुर, कांगपोकपी और तेंगनौपाल जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया है।
4000 ग्रामीणों को सुरक्षित जगहों पर ले जाया गया
4000 ग्रामीणों को सुरक्षित जगहों पर ले जाया गया सेना के अधिकारियों के मुताबिक 4000 ग्रामीणों को सेना और असम रायफल्स की सीओबी और राज्य सरकार के परिसरों में आश्रय दिया गया है। वहीं राज्य में स्थिति पर नियंत्रण के लिए फ्लैग मार्च किया जा रहा है। एहतियातन और भी ग्रामीणों को हिंसा वाले जगहों से दूर सुरक्षित स्थानों पर भेजने का काम जारी है।












Click it and Unblock the Notifications