#JNURow सिर्फ पांच रुपए में मिलता जेएनयू में एडमिशन
नई दिल्ली। एक हफ्ते पहले जेएनयू में जो आग लगी थी वह शांत होने की जगह और बढती जा रही है। जेएनयू में भड़़की चिंगारी अब कश्मीर तक पहुंच चुकी है। यहां के नागरिक उमर खालिद के रवैये के बाद अब लोग जेएनयू के छात्रों के
तरीकों और उनकी ओर से इस संस्थान को दी जा रही फीस पर भी दबी जुबान से चर्चा करने लगे हैं। लोग कह रहे हैं कि जब फीस इतनी कम होगी तो फिर हर तरीके के लोग जेएनयू में ही पढ़ने के लिए आएंगे।
कौन है जेएनयू का असली गुनाहगार उमर खालिद
जी हां, जेएनयू की फीस कम जरूर है लेकिन यह भी सच है कि यहां पर रिसर्च स्कॉलर्स को जो एलाउंस मिलते हैं, वह नाकाफी हैं।
जेएनयू से जुड़े कुछ चौंकाने वाले आंकड़ें
इन सबके बावजूद हमने भी सोचा कि क्यों न इस बात का पता लगाया जाए कि आखिर जेएनयू में छात्रों की फीस क्या है और कितनी रकम इस संस्थान में पढ़ते समय छात्रों को खर्च करनी पड़ती है। फीस के ये आंकड़ें हमने यूनिवर्सिटी की वेबसाइट से लिए हैं।

बीए ऑनर्स, एमए, एमएससी, एमसीए
अगर आप भारतीय छात्र हैं तो फिर आपको साल भर के लिए 216 रुपए देने पड़ेंगे। इस 216 रुपए में एडमिशन फीस सिर्फ पांच रुपए है।

हॉस्टल की फीस
अगर आप हॉस्टल में रहना चाहते है तो फिर आपको सिर्फ15 रुपए ही अदा करने होगे।

एमफिल, प्री-पीएचडी, पीएचडी, एमटेक
इन कोर्सेज के लिए आपको साल भर की फीस मात्र 240 रुपए अदा करनी होगी।

हॉस्टल की कोई फीस नहीं
इन कोर्सेज में भी एडमिशन फीस सिर्फ पांच रुपए है और हॉस्टल के लिए आपको कोई फीस नहीं देनी पड़ती है।

क्या है विदेशी छात्रों के लिए फीस
विदेशी छात्र अगर जेएनयू में पढना चाहते हैं और विज्ञान विषयों में एडमिशन चाहते हैं तो फिर उन्हें 750 अमेरिकी डॉलर प्रति समेस्टर के हिसाब से देने होते हैं।

साइंस से अलग विषय
इससे अलग अगर उन्हें ह्यूमैनिटीज और सोशल साइंस जैसे विषयों में एडमिशन लेना है तो फिर उन्हें 500 अमेरिकी डॉलर बतौर ट्यूशन फीस अदा करने होंगे।

विदेशी छात्रों से ‘इंसीडेंटल चार्ज’ भी
जेएनयू में ऊपर बताई हुई दोनों ही कैटेगरीज में विदेशी छात्रों को एडमिशन लेने पर उन्हें पर सेमेस्टर के हिसाब से इंसीडेंटल चार्जेज भी अदा करना पड़ता है जो कि 100 अमेरिकी डॉलर है।

कैसे होती है फीस की अदायगी
करीब 300 रुपए की फीस को छात्र अगर चाहें तो इंस्टॉलमेंट्स में अदा कर सकते हैं। पहला इंस्टॉलमेंट उन्हें एडमिशन के समय देना होगा तो दूसरा विंटर सेशन रजिस्ट्रेशन के समय देना होगा जो कि जनवरी में शुरू होता है।

लेप्रोसी के मरीज को छूट
यूनिवर्सिटी की ओर से उन छात्रों को छूट दी जाती है जो लैप्रोसी से ग्रसित है।












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