डेल्टा प्लस वेरिएंट क्या है, वैक्सीन एंटीबॉडी और इम्यूनिटी के भी नाकाम होने की बढ़ी आशंका
नई दिल्ली, 22 जून: कोरोना वायरस की तीसरी लहर के लिए इसका डेल्टा प्लस वेरिएंट जिम्मेदार हो सकता है। क्योंकि, दूसरी लहर के लिए इसी के परिवार के डेल्टा वेरिएंट को जिम्मेदार माना जा रहा है, जिसने देश में बड़ी तबाही मचाई है। डेल्टा प्लस को लेकर चिंता इसलिए बढ़ चुकी है कि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह वायरस इतना खतरनाक शक्ल अख्तियार कर चुका है कि यह न तो वैक्सीन की सुनता है और न ही इंफेक्शन की वजह से पैदा हुई नैचुरल इम्यूनिटी की, यहां तक कि यह कोविड के इलाज में इस्तेमाल हो रही कुछ बेहद ही सफल दवा को भी चकमा देने में सक्षम हो सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि डेल्टा प्लस वेरिएंट क्या है और इसको लेकर चिंता इतनी बढ़ क्यों गई है?

डेल्टा प्लस वेरिएंट को लेकर क्यों है चिंता
भारत में कोरोना के डेल्टा वेरिएंट (बी.1.617.2) को दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार माना जाता है। यह पहली बार पिछले साल अक्टूबर में महाराष्ट्र में मिला था। इसे अबतक का सबसे संक्रामक वेरिएंट माना जा रहा था। अब इसके ही कुछ म्यूटेशन के बारे में चिंता है कि वह कोविड वैक्सीन और उसके खिलाफ इम्यूनिटी को भी नाकाम बना सकता है। ये इसका सबसे ताजा म्यूटेशन है, जिसे डेल्टा प्लस वेरिएंट (बी.1.617.2.1) या एवाई.01. कहा जा रहा है। भारत के बड़े वायरोलॉजिस्ट और आईएनएसएसीओजी के पूर्व सदस्य प्रोफेसर शाहिद जमील ने इंडिया टुडे से बातचीत में चिंता जताई है कि डेल्टा प्लस वेरिएंट कोरोना वैक्सीन से पैदा हुई इम्यूनिटी और इंफेक्शन की वजह से बनी इम्यूनिटी दोनों को नाकाम कर सकता है।
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डेल्टा प्लस वेरिएंट क्या है
कोरोना वायरस के अबतक चार नए वेरिएंट सामने आ चुके हैं और दुनिया में अलग-अलग जगह तबाही मचाने के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। अल्फा (बी.1.1.7), बीटा (बी.1.351), गामा (पी.1) और डेल्टा (बी.1.617.2)। इनमें अल्फा सबसे पहले पिछले साल सितंबर में यूनाइटेड किंग्डम में पाया गया, बीटा पिछले साल मई में दक्षिण अफ्रीका में सामने आया और गामा पिछले साल नवंबर में ब्राजील में पैदा हुआ था। प्रोफेसर जमील के मुताबिक डेल्टा प्लस वेरिएंट (बी.1.617.2.1) इसलिए चिंता की वजह बन रहा है, क्योंकि इसमें मूल डेल्टा वेरिएंट की विशेषताएं तो हैं ही दक्षिण अफ्रीका में पाए गए बीटा वेरिएंट के म्यूटेशन (के417एन) की विशेषता भी मौजूद है। उन्होंने कहा है कि यह पहले से स्थापित है कि अल्फा और डेल्टा वेरिएंट की तुलना में बीटा वेरिएंट वैक्सीन के लिए काफी चिंता की वजह रहा है। गौरतलब है कि दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने एस्ट्राजेनेका (भारत में कोविशील्ड) वैक्सीन की खेप इसलिए लौटा दी थी कि यह वहां फैले वेरिएंट के खिलाफ कारगर साबित नहीं हो पाया।

क्या तीसरी लहर के लिए जिम्मेदार होगा डेल्टा प्लस ?
जमील का यह भी कहना है कि अभी तक इसके सबूत उपलब्ध नहीं है कि डेल्टा प्लस ज्यादा संक्रामक है। उन्होंने ये भी कहा है कि 'हमारे पास ऐसे केस नहीं हैं, जिससे कि यह स्थापित हो सके कि डेल्टा प्लस वेरिएंट भारत की आबादी के लिए चिंता की बात है। भारत में 25,000 सिक्वेंस में से 20 केस कुछ भी नहीं है। तय करने के लिए और सिक्वेंसिंग जरूरी है।' लेकिन, चिंता इस बात को लेकर है कि वैज्ञानिकों के सामने यह मानने पर्याप्त कारण मौजूद हैं कि डेल्टा प्लस न केवल एंटीबॉडी और वैक्सीन इम्यूनिटी को नाकाम कर सकता है, बल्कि कोविड के मोनोक्लोनल एंटीबॉडी इलाज को भी फेल कर सकता है, जिसे कि काफी कारगर माना जा रहा है। भारत में संभावित कोरोना की तीसरी लहर और डेल्टा प्लस वेरिएंट में कोई संबंध हो सकता है क्या? इसपर वायरोलॉजिस्ट ने कहा, 'इस समय ऐसा कोई सबूत नहीं है, लेकिन मैं पिछला उदाहरण देखूंगा। जिसे हम आज डेल्टा वेरिएंट के रूप में जानते हैं, दिसंबर 2020 में उसके कुछ ही सिक्वेंस थे। हालांकि, इसने दूसरी लहर में बहुत बड़ी भूमिका निभाई, इसलिए हमें काफी सावधानी से काम लेना होगा।' हालांकि, एम्स के बायोकेमिस्ट्री विभाग के डॉक्टर सुभ्रदीप कर्मकार ने जो कहा है उससे इसको लेकर चिंता और बढ़ गई है। उनके मुताबिक, 'ऐसा माना जा रहा है कि यह म्यूटेंट अधिक संक्रामक है और अल्फा वेरिएंट की तुलना में 35 से 60% ज्यादा संक्रामक है। यह संभावित तौर पर अधिक संक्रमण फैला सकता है।'

डेल्टा प्लस वेरिएंट भारत में कहा मिला ?
मध्य प्रदेश के शिवपुरी में कोविड-19 से 6 युवाओं की मौत हो गई। इनमें से एक की मौत डेल्टा वेरिएंट की वजह से हुई और उसे दोनों वैक्सीन लग चुकी थी। बाकी को सिर्फ एक लग पाई थी। अब इस बात की पड़ताल हो रही है कि क्या वो डेल्टा प्लस स्ट्रेन से पीड़ित थे ? सोमवार को महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा था कि प्रदेश में डेल्टा प्लस वेरिएंट के 21 केस मिले हैं- 9 रत्नागिरि में, 7 जलगाव में, 2 मुंबई मे और एक-एक पालघर, ठाणे और सिंधुदुर्ग में।












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