कोरोना के खिलाफ जंग में भारत के सामने क्या है सबसे बड़ा संकट ? हार्वर्ड के एक्सपर्ट ने बताया
नई दिल्ली, 6 मई: भारत के लिए अच्छी खबर ये है कि देश में फैले कोविड के नए स्ट्रेन के खिलाफ अबतक की वैक्सीन कारगर है, जो स्ट्रेन दुनिया के कई और देशों तक भी पहुंच चुका है। लेकिन, चिंता की बात ये है कि भारत में इस समय कोरोना की दूसरी लहर में जिस स्तर पर संक्रमण फैल चुका है, अगर इसकी वजह से कोई और नए स्ट्रेन पैदा हुए तो उसपर लगाम लगाना मुश्किल हो सकता है। क्योंकि, करीब 140 करोड़ की आबादी के बीच पैदा होने वाले सभी तरह के वेरिएंट पर वैज्ञानिकों के लिए नजर रखना संभव नहीं है। खासकर तब जब लगातार 15 दिनों से रोज 3 लाख से ज्यादा नए केस सामने आ रहे हैं और 2.10 करोड़ से ज्यादा लोग अबतक इसकी चपेट में आ चुके हैं। गुरुवार को भी देश में नए मामलों का रिकॉर्ड टूटा है और 24 घंटे में 4,12,262 नए मामले और 3,980 लोगों की मौत हुई है।

संभावित नए वेरिएंट को लेकर चिंता
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के पूर्व प्रोफेसर विलियम हेसेलटाइन ने कहा है कि बी.1.617 नाम से जाने जाने वाले भारतीय वेरिएंट की शायद दूसरी या तीसरी पीढ़ी भी फैल रही है और उनमें से कुछ बहुत ही ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं। उनके मुताबिक, 'भारत के पास जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए जरूरी क्षमता तो है, लेकिन इसके लिए मास सर्विलांस प्रोग्राम की आवश्यकता है।' उन्होंने कहा, 'इसके लिए ज्यादा से ज्यादा और नए वेरिएंट पर नजर रखना होगा, क्योंकि बड़े पैमाने पर संक्रमण फैलने के कारण वायरस को बहुत ज्यादा मौका मिल गया है।' कोरोना वायरस के कई कई वेरिएंट पहले से ही दुनिया के कई हिस्सों में वैक्सीनेशन प्रक्रिया में खलल डाल रहे है, क्योंकि ज्यादा पैमाने पर संक्रमण से इसे तेजी से फैलने का मौका मिल रहा है। अमीर देशों ने जल्दी से वैक्सीनेशन करके अपने यहां महामारी को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया है, लेकिन विकासशील देशों में यह जंगल की आग की तरह फैल रही है, जिससे यह खत्म होने का नाम नहीं ले रही है।

अभी भारतीय डबल म्यूटेंट वेरिएंट पर कारगर हैं वैक्सीन
भारतीय स्ट्रेन को डबल म्यूटेंट कहा जा रहा है, क्योंकि इसमें वायरस के जीनोम में दो बदलाव हुए हैं, जिसे ई484क्यू और एल452आर कहा जा रहा है। दोनों वायरस की स्पाइक प्रोटीन पर असर डालते हैं, जिसके सहारे वह इंसान के शरीर में दाखिल होता है। कुछ शोधकर्ताओं का अनुमान है कि भारतीय वेरिएंट यूके के वेरिएंट (बी.1.1.7)की तरह ही संक्रामक है, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह शुरुआती वायरस से 70 फीसदी ज्यादा संक्रामक है। हालांकि, शुरुआती विश्लेषण से यह संकेत मिले हैं कि भारतीय वेरिएंट ज्यादा खतरनाक नहीं है। अभी तक के अध्ययन में यह बात सामने आई है कि भारत में दी जा रही दोनों वैक्सीन- कोवैक्सिन और कोविशील्ड इस स्ट्रेन के खिलाफ भी कारगर हैं। स्पूतनिक वी के भी इसपर प्रभावी होने की उम्मीद है। फाइजर के भारतीय सहयोगी भी अपनी वैक्सीन को लेकर ऐसी ही उम्मीद कर रहे हैं।

अगले वेरिएंट को लेकर बढ़ गई है चिंता
लेकिन, शोधकर्ताओं की चिंता उन अगले वेरिएंट को लेकर है, जो भारत में फैले मौजूदा संक्रमण की वजह से पैदा हो सकते हैं। अपना स्वरूप बदलने में माहिर इस वायरस के बारे में जानकारी जुटाने के लिए उसकी जीनोमिक सर्विलांस जरूरी है, जिससे महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई जा सकती हैं। जिनकी मदद से अगली लहरों को रोकने और अगले जैनरेशन की वैक्सीन विकसित करने में मदद मिल सकती है। लेकिन,भारत में जितने बड़े पैमाने पर इसबार संक्रमण हुआ है, इस तरह का पूरा डेटा जुटा पाना बहुत बड़ी चुनौती है।

कैलिफॉर्निया वाला म्यूटेंट दे रहा है टेंशन
कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन की चुनौतियों को इस तरह से समझा जा सकता है। अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने हाल ही में एक स्टडी पब्लिश की है, जिसमें बताया गया है कि न्यूयॉर्क में जब नया वेरिएंट सामने आया था तो उसको लेकर यह चिंता थी कि वह पहले वाले स्ट्रेन से ज्यादा खतरनाक हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। लेकिन, दक्षिणी कैलिफॉर्निया में एक जोड़ा म्यूटेंट शायद 'पूरे अमेरिका में फैले वायरस से ज्यादा तेजी से संक्रमण करने और गंभीर बीमारी देने वाला साबित हुआ है।' ऐसे में भारत में जिस बड़े पैमाने पर इसबार संक्रमण हुआ है, वह वैज्ञानिकों को काफी आशंकित कर रहा है।












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