सेना को मिली वो शक्तियां जिसे हटाने के लिए निर्वस्त्र हो गई थीं महिलाएं, जानिए AFSPA कानून की पूरी कहानी
नई दिल्ली, 12 दिसंबर। जम्मू-कश्मीर और भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य देश के कुछ अशांत स्टेट्स में गिने जाते हैं। इन राज्यों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष सुरक्षाबलों की तैनाती की जाती है, जिन्हें कुछ स्पेशल अधिकार प्राप्त हैं। इस माह की शुरुआत में 4 दिसंबर को नागालैंड में कुछ स्थानीय लोग सुरक्षाबलों की गोली का निशाना बन गए। इसके बाद प्रदेश में उग्र भीड़ पर भी गोलीबारी की गई जिसमें कई लोगों की जान गई। संसद के शीतकालीन सत्र के बीच नागालैंड में हुई इस घटना को लेकर केंद्र सरकार सवालों के घेरे में है, वहीं मणिपुर और नागालैंड के मुख्यमंत्री पहले ही राज्य से आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर एक्ट यानि अफस्पा (एएफएसपीए) हटाने की मांग कर चुके हैं।

क्या है अफस्पा कानून?
नागालैंड में करीब 14 स्थानीय लोगों की मौत के बाद से एक बार फिर विवादित कानून अफस्पा के निरस्त करने की मांग उठने लगी है। आज हम आपको इस कानून से जुड़ी पूरी कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं, इसकी जरूरत क्यों पड़ी, इसे कब और क्यों लागू किया जाता है? इस कानून से भारतीय सेना को कौन सी विशेष शक्तियां मिलती हैं? तो आपको बता दें कि सबसे पहले अफस्पा या एएफएसपीए को अंग्रेजों ने 'भारत छोड़ो आंदोलन' के खत्म करने के लिए लागू किया था।

अंग्रेजों द्वारा बनाया गया था कानून
आजादी के बाद तत्कालीन भारत सरकार ने इस एक्ट को जारी रखने का फैसला किया। 11 सितंबर, 1958 को अफस्पा एक कानून के रूप में लागू हो गया। आसान शब्दों में कहें तो ये कानून देश के अशांत क्षेत्रों में लागू किया जाता है, इसके तहत भारतीय सेना के जवानों को कुछ विशेष अधिकार मिलते हैं। ये वहां लागू किया जाता है, जहां राज्य सरकार और पुलिस-प्रशासन कानून-व्यवस्था संभालने में नाकाम रहती है। इसके अलावा उन इलाकों में भी लगाया जाता है जहां पुलिस और अर्द्धसैनिक बल आतंकवाद, उग्रवाद या फिर बाहरी ताकतों से लड़ने में नाकाम साबित होती हैं।

सेना को मिलने वाली विशेष शक्तियां
इस कानून के तहत सैनिकों को कई अधिकार प्राप्त होते हैं, जैसे- किसी को बिना वॉरेंट गिरफ्तार करना और उसके घर में घसुने का अधिकार, पहली चेतावनी के बाद गोली चलाना, गोली चलाने के लिए किसी भी आदेश का इंतजार न करना, उस गोली से किसी की मौत होती है तो सैनिक पर हत्या का मुकदमा भी नहीं चलाया जा सकता। अगर राज्य सरकार या पुलिस प्रशासन, किसी सौनिक या सेना की टुकड़ी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करती है तो कोर्ट में उसके अभियोग के लिए केंद्र सरकार की इजाजत जरूरी होती है।

इन राज्यों में लागू है अफस्पा
वर्तमान में अफस्पा कानून जम्मू-कश्मीर, असम, मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में लागू है। नागालैंड जैसे कई मामलों को लेकर यह कानून विवादों में भी रहा, जिसके समय-समय पर हटाए जाने की मांग भी उठती रही है। नागालैंड के मोल जिले में 4 दिसंबर को सेना ने चरमपंथी समझकर स्थानीय लोगों पर ही गोली चला दी, जिसमें 6 लोगों की मौत हुई। इसके बाद भड़की भीड़ ने सेना के कैंप पर हमला कर दिया जिसमें एक जवान और 7 लोगों की जान चली गई।

नग्न होकर महिलाओं ने किया था प्रदर्शन
अफस्पा को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन होता रहा है। इस कानून के खिलाफ सबसे बड़ा प्रदर्शन मणिपुर की मानवाधिकार कार्यकर्ता 29 वर्षीय इरोम शर्मिला की 16 साल (4 नवंबर 2000 से 9 अगस्त 2016 तक) लंबी भूख हड़ताल थी। इसके अलावा साल 2004 में 30 मणिपुरी महिलाओं ने निर्वस्त्र होकर इस कानून के खिलाफ अपना कड़ा विरोध जताया था। इस कानून के विरोध की वजह इसका गलत इस्तेमाल है। आरोप है कि इस कानून का फायदा उठाकर फेक एनकाउंटर, टॉर्चर और रेप तक किया जाता है। वहीं, माना जाता है कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए ये कानून जरूरी है।
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