'AFSPA ने हमारे जीवन को नरक बना दिया', नागालैंड में प्रदर्शनकारियों ने की कानून रद्द करने की मांग
कोहिमा, 12 दिसंबर। नागालैंड में सुरक्षाबलों की गोली का निशाना बने 14 स्थानीय लोगों की मौत के बाद से पूरे प्रदेश में तनाव की स्थिति है। इस बीच केंद्र सरकार के खिलाफ लोगों ने कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन किया, इसके अलावा उन्होंने सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम (एएफएसपीए), 1958 को निरस्त किए जाने की मांग की। जिले के प्रमुख कोन्याक नागा समुदाय के शीर्ष निकाय कोन्याक यूनियन के नेतृत्व में सैकड़ों लोगों ने मोन तिजित में एक विरोध रैली निकाली और सशस्त्र बलों द्वारा एक घात लगाकर की गई हत्याओं के लिए माफी नहीं मांगने के लिए केंद्र को निशाने पर लिया।

विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांग है कि मृतकों के परिवार वालों को न्याय मिले और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। जब तक ऐसा नहीं किया जाता वह चुप नहीं बैठेंग। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, अब तक केंद्र सरकार ने 14 निर्दोष लोगों की जान लेने को लेकर माफी नहीं मांगी है। इसके बजाय उन्होंने सुरक्षा बलों के झूठ को हवा दी है, जिसमें दावा किया गया था कि पीड़ित जो एक वाहन में यात्रा कर रहे थे और सुरक्षा बलों द्वारा रोके जाने पर भी नहीं रुके। प्रदर्शनकारियों ने 'अफस्पा' को निरस्त करने की भी मांग करते हुए कहा, इसने 'हमारे जीवन को नरक बना दिया है'।
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बता दें कि नागालैंड, मेघालय और मिजोरम के मुख्यमंत्रियों ने 'अफस्पा' कानून को निरस्त करने की मांग कर चुके हैं। नागालैंड विधानसभा ने भी केंद्र से राज्य से अधिनियम को वापस लेने के लिए कहने का संकल्प लिया। बता दें कि अफस्पा को निरस्त करने की मांग के बीच कांग्रेस ने पहले ही कह दिया है कि अगर प्रदेश में उनकी सरकार बनती है तो यह विवादास्पद कानून रद्द कर दिया जाएगा। कांग्रेस ने ऐलान किया कि अगर 2022 के मणिपुर विधानसभा चुनावों में वह सत्ता में वापसी करते हैं तो पूरे राज्य से "आफस्पा को तत्काल और पूर्ण रूप से हटाने" की कसम खाई है। बता दें कि अगल साल मणिपुर सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं।












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