PAK के नापाक इरादों के आगे ढाल बनकर खड़ा S-400 एयर डिफेंस सिस्टम!US की धमकी के बीच कैसे हुई 'सुदर्शन चक्र' डील?

'Sudarshan Chakra' Deal S-400 Air Defence System: भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले को 18 दिन बीत चुके हैं और इसके जवाब में भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' लॉन्च किया। पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के आतंकी ठिकानों को तबाह करने के बाद लगातार दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बरकरार है।

इसी बीच भारत का एयर डिफेन्स सिस्टम लगातार पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को तबाह करने में जुटा हुआ है। सोचिए अगर भारत ने कुछ साल पहले अमेरिका की बात मान ली होती, तो शायद आज हालात कुछ और होते। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सलाह मान ली होती, तो हो सकता है भारत की सुरक्षा कमजोर रह जाती और पाकिस्तान को खुलकर हमला करने का मौका मिल जाता।

Sudarshan Chakra Deal S 400 Air Defence System

लेकिन भारत ने वो रास्ता चुना जो मुश्किल था, पर देश की सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी भी। यह कहानी है एक ऐसे फैसले की, जिसने भारत की सुरक्षा नीति की दिशा ही बदल दी। एक ऐसा निर्णय, जिसमें न अमेरिका की धमकी काम आई, न ही अंतरराष्ट्रीय दबाव।
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क्या है 'सुदर्शन चक्र'?

रूस से 35 हजार करोड़ रुपये की डील कर भारत ने S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा और पूरी दुनिया को दिखा दिया कि भारत अपने हितों के लिए किसी भी बड़े देश से टकरा सकता है। यही सिस्टम आज पाकिस्तान के हमले को नाकाम करने में सबसे बड़ी ढाल बना और भारत ने इस डील को नाम दिया - सुदर्शन चक्र

'सुदर्शन चक्र' का कनेक्शन भारत के इतिहास के जड़ों से जुड़ा हुआ है। श्री कृष्ण के शस्त्र का नाम 'सुदर्शन चक्र' था। यही वजह थी कि भारत ने रूस से खरीदे गए डिफेंस सिस्टम का नाम 'सुदर्शन चक्र' रखा।

अमेरिका ने दी थी धमकी, फिर भी नहीं झुका भारत

साल 2018 में जब भारत ने रूस से S-400 खरीदने का मन बनाया, तो अमेरिका ने इसका कड़ा विरोध किया। उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप थे, जो खुद को भारत का दोस्त कहते थे। लेकिन जब भारत ने रूस के साथ समझौता करने का फैसला किया, तो अमेरिका ने चेतावनी दी कि इसके गंभीर परिणाम होंगे।

अमेरिका चाहता था भारत खरीदे उसका डिफेंस सिस्टम

अमेरिका चाहता था कि भारत उसके बनाए हुए पैट्रियट या थाड डिफेंस सिस्टम खरीदे। अमेरिका ने दावा किया कि रूस का S-400 इतना असरदार नहीं है और इससे भारत को सुरक्षा नहीं मिल पाएगी। लेकिन भारत ने अमेरिका की बात नहीं मानी और रूस के साथ डील आगे बढ़ा दी।

भारत ने अमेरिका के कानून को नकारा

अमेरिका ने भारत को चेतावनी दी थी कि अगर वह रूस से यह डील करता है, तो उस पर CAATSA (Countering America's Adversaries Through Sanctions Act) के तहत प्रतिबंध लगाए जाएंगे। लेकिन भारत ने साफ कह दिया कि किसी दूसरे देश का कानून उस पर लागू नहीं होता। भारत ने डील पूरी की और करीब 35 हजार करोड़ रुपये खर्च कर S-400 को अपने डिफेंस सिस्टम का हिस्सा बना लिया।

भारत ने S-400 को दिया नया नाम - सुदर्शन चक्र

जब पाकिस्तान ने भारत के 15 शहरों को निशाना बनाकर मिसाइलें और ड्रोन भेजे, तो भारत के एयर डिफेंस सिस्टम में तैनात 'सुदर्शन चक्र' पूरी तरह तैयार था। इसने एक-एक मिसाइल और ड्रोन को हवा में ही मार गिराया और दुश्मन को कोई भी नुकसान नहीं पहुंचाने दिया।

अमेरिका का विरोध बेअसर रहा

डील के बाद जब बाइडेन अमेरिका के राष्ट्रपति बने, तो उनके सलाहकारों ने भी माना कि भारत पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। इससे भारत-अमेरिका की दोस्ती बनी रही और रूस से मिली ताकत ने पाकिस्तान की एक नहीं चलने दी।

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