Sickle Cell Anemia: क्या है सिकल सेल एनीमिया मिशन, जिसके लिए PM मोदी ने शुरू किया अभियान
National Sickle Cell Anaemia Elimination Mission: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जुलाई 2023 को मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में स्थित लालपुर गांव में राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन 2047 की शुरुआत की थी।
इस कार्यक्रम के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि पूरी दुनिया में 'सिकल सेल एनीमिया' के जितने मामले होते हैं, उनमें से आधे अकेले हमारे देश में होते हैं। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि पिछले 70 वर्षों में कभी इसकी चिंता नहीं हुई। पीएम मोदी ने कहा है कि सिकल सेल एनीमिया से मुक्ति का ये अभियान अमृत काल का प्रमुख मिशन बनेगा।

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा है कि हम सब मिलकर इससे अपने आदिवासियों और देश को मुक्ति दिलाएंगे। पीएम मोदी ने कहा, ''मुझे पूर्ण विश्वास है कि जब देश आजादी के 100 साल मनाएगा यानी 2047 तक हम सब मिलकर एक मिशन मोड में अभियान चलाकर इस सिकल सेल एनीमिया से अपने आदिवासियों और देश को मुक्ति दिलाएंगे।''
क्या है सिकल सेल एनीमिया?
सिकल सेल एनीमिया एक आनुवंशिक रक्त रोग (Blood Disorder) है जो रोगी के पूरे जीवन को प्रभावित करता है। ये ब्लड डिसऑर्डर पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता रहता है। यह बीमारी पिता-माता से बच्चों में आती है।
सिकल सेल एनीमिया रोग यह भारत की जनजातीय आबादी में ज्यादा होता है लेकिन ये गैर आदिवासियों में भी होता है। ये ब्लड डिसऑर्डर पूरे शरीर में ऑक्सीजन ले जाने के लिए जिम्मेदार लाल रक्त कोशिकाओं को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।
सिकल सेल एनीमिया से पीड़ितों में रक्त प्रवाह में कमी या रुकावट का सामना करना होता है। जिसके बाद कई लक्षण दिखाई देते हैं जो आम तौर पर छह महीने की उम्र के आसपास नजर आते हैं।
यह सिर्फ एनीमिया के कारण नहीं बनता है। इसमें दर्द, विकास में कमी और फेफड़े, हृदय, गुर्दे, आंखों, हड्डियों और मस्तिष्क जैसे कई अंगों को प्रभावित करता है।
विश्व स्तर पर भारत में जनजातीय आबादी का घनत्व सबसे अधिक है। 2011 की जनगणना मुताबिक भारत में 8.6% आदिवासी आबादी है, जो भारतीय राज्यों में 67.8 मिलियन है।
MoHFW जनजातीय स्वास्थ्य विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में सिकल सेल रोग को जनजातीय स्वास्थ्य की 10 विशेष समस्याओं में से एक के रूप में जिक्र किया गया है। इसमें बताया गया है ये कि ये बीमारी आदिवासियों के लिए बड़ी समस्या है।
एनएचएम के तहत स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2016 में हीमोग्लोबिनोपैथी (थैलेसीमिया और सिकल सेल रोग) पर काम शुरू किया था जिसमें हीमोग्लोबिनोपैथी की रोकथाम और प्रबंधन पर व्यापक दिशानिर्देश जारी किए गए थे।












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