जानिए क्या है जैन तीर्थस्थल सम्मेद शिखर विवाद, जिसकी वजह से 4 दिन में 2 जैन संतों ने त्यागे अपने प्राण
देशभर के जैनियों ने पारसनाथ हिल और श्री सम्मेद शिखरजी तीर्थस्थल को पर्यटक हब में बदलने के झारखंड सरकार के फैसले और गुजरात में पलिताना पहाड़ी पर जैन मंदिरों में तोड़फोड़ के हमले का विरोध किया।

Shri Sammed Shikharji controversy: झारखंडे में स्थित जैन तीर्थस्थल सम्मेद शिखर पर्यटन स्थल घोषित होने का मुद्दा बढ़ता ही जा रहा है। देशभर में इसको लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है। कई जैन मुनि अनशन पर बैठे हैं। जैन तीर्थस्थल सम्मेद शिखर के लिए एक और जैन मुनि ने अपने प्राण त्याग दिए हैं। गुरुवार देर रात एक बजे मुनि समर्थ सागर का निधन हो गया। चार दिन में ये दूसरी बार है, जब दो जैन संतों ने अपने प्राण त्याग दिए हैं। जयपुर में अनशन पर बैठे मुनि समर्थ सागर ने अपने प्राण त्याग दिए हैं। मुनि समर्थ सागर से पहले जैन मुनि सुज्ञेय सागर ने अपने प्राण त्याग दिए थे। जैन समुदाय का कहना है कि इस कदम से सम्मेद शिखरजी की पवित्रता को खतरा है।

सम्मेद शिखर विवाद क्यो हो रहा है?
-असल में अगस्त 2019 में में केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय ने सम्मेद शिखर और पारसनाथ पहाड़ी को एक सेंसेटिव जोन घोषित किया था।
-अब हाल ही में झारखंड सरकार द्वारा इसे पर्यटन स्थल घोषित कर दिया गया है। जिसके बाद तीर्थस्थल सम्मेद शिखर को अब पर्यटन के हिसाब से बदलना है।
- तीर्थस्थल को पर्यटन के हिसाब से बदलना पर देशभर के जैन समुदायों में गुस्सा है। जैन समुदाय के लोगों का कहना है कि ये एक पवित्र धर्मस्थल है और पर्यटकों के आने से यहां अपवित्रता फैलेगी।
-जैन समुदायों का कहना है कि पर्यटन स्थल बनने से यहां मांस और शराब का सेवन किया जाएगा, जो जैन धर्म के लोगों को मंजूर नहीं है।

सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल बनाने के फैसले पर केंद्र ने लगाई रोक
इस विवाद को बढ़ता देख हाल ही में केंद्र सरकार ने सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल बनाने के फैसले पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। वहीं इसके लिए एक और कमेटी भी बनाई है। केंद्र सरकार ने झारखंड सरकार से इस मुद्दे पर जरूरी कदम उठाने को भी कहा है। सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल बनाने से काफी नाराज हैं। रांची से लेकर दिल्ली तक इसको लेकर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

सम्मेद शिखर जैन समुदाय के लिए क्यों है अहम
-सम्मेद शिखर झारखंड के गिरिडीह जिले में पारसनाथ की पहाड़ी पर स्थित है। यह जैन धर्म का तीर्थस्थल है। इस पहाड़ी का नाम जैनों के 23वें तीर्थांकर पारसनाथ के नाम पर पड़ा रखा गया है। ये झारखंड की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित मंदिर है।
-ऐसी मान्यता है कि जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थांकरों ने यहीं निर्वाण लिया था। इसलिए जैन धर्म के लोगों के लिए ये सबसे पवित्र स्थल में से एक है।












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