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क्या है सलवा जुडूम? जिसे लेकर अमित शाह ने विपक्ष के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार को बताया 'वामपंथी'

Sudershan Reddy Salwa Judum: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इंडिया अलायंस के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी पर तीखा हमला किया। शाह ने आरोप लगाया कि रेड्डी ने सलवा जुडूम पहल को अस्वीकार किया और आदिवासी समुदायों के आत्मरक्षा अधिकार को छीन लिया, जिससे देश में नक्सलवाद दो दशकों से अधिक समय तक बना रहा।

उन्होंने कहा कि रेड्डी के चयन में वामपंथी विचारधारा एक मापदंड रही होगी। सुदर्शन रेड्डी ने गृह मंत्री अमित शाह के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह उनका व्यक्तिगत फैसला नहीं था, बल्कि सुप्रीम कोर्ट का सामूहिक निर्णय था।

Sudershan Reddy Salwa Judum

सलवा जुडूम क्या था और कैसे काम करता था

सलवा जुडूम छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 2005 में माओवादियों (नक्सलियों) से निपटने के लिए शुरू किया गया एक ग्रामीण आंदोलन था। 'सलवा जुडूम' का अर्थ गौंड भाषा में "शांति यात्रा" है। इसका उद्देश्य नक्सली हिंसा को रोककर राज्य में शांति स्थापित करना था।

काम करने का तरीका

आदिवासी मिलिशिया का गठन

आंदोलन में शामिल ग्रामीण आदिवासियों को नक्सलियों से लड़ने के लिए हथियार और रसद प्रदान की जाती थी। शुरुआत में उनके पास कुल्हाड़ी, टांगिया, तीर-धनुष जैसे पारंपरिक हथियार थे, लेकिन बाद में उन्हें आधुनिक हथियार भी दिए गए।

सरकारी समर्थन

छत्तीसगढ़ की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने आंदोलन को राजनीतिक और प्रशासनिक समर्थन दिया। ग्रामीणों को विशेष पुलिस अधिकारी का दर्जा भी दिया गया।

हिंसा और जवाबी कार्रवाई

आंदोलन के बढ़ते प्रभाव के कारण नक्सलियों और आदिवासियों के बीच हिंसा बढ़ी। इसके चलते ग्रामीणों को अपने गांव छोड़कर सीमापार पड़ोसी राज्यों (आंध्र प्रदेश और तेलंगाना) में शरण लेनी पड़ी।

महत्वपूर्ण घटनाएं

सलवा जुडूम से नाराज माओवादियों ने 25 मई 2013 को कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा की हत्या कर दी।

सलवा जुडूम को सुप्रीम कोर्ट ने किया था असंवैधानिक घोषित

साल 2011 में भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने सलवा जुडूम आंदोलन (गोंडी में 'शांति सेना') को असंवैधानिक घोषित कर दिया। न्यायालय ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि नागरिकों को हथियारबंद करना और उन्हें प्रतिरोधी विद्रोह से निपटने के लिए इस्तेमाल करना संवैधानिक रूप से गलत है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी सशस्त्र नागरिक समूह को समर्थन देना कानून के खिलाफ है और इससे मानवाधिकार उल्लंघन और हिंसा का खतरा बढ़ता है। विपक्ष के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार न्यायमूर्ति बी सुदर्शन रेड्डी, न्यायमूर्ति एस एस निज्जर के साथ सर्वोच्च न्यायालय की उस पीठ का हिस्सा थे जिसने ये फैसला सुनाया था।

अमित शाह ने क्या कहा था?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इंडिया अलायंस के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी ने सलवा जुडूम को अस्वीकार किया और इस वजह से आदिवासी समुदायों के आत्मरक्षा के अधिकार को रोक दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस निर्णय के कारण देश में नक्सलवाद दो दशकों से अधिक समय तक बना रहा। अमित शाह ने यह भी कहा कि रेड्डी के चयन में वामपंथी विचारधारा का प्रभाव रहा होगा और यही शायद उनके प्रशासनिक फैसलों और उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के चयन में मापदंड बनी। उन्होंने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय हित और सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

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सुदर्शन रेड्डी ने दी सफाई

सुदर्शन रेड्डी ने गृह मंत्री अमित शाह के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह उनका व्यक्तिगत फैसला नहीं था, बल्कि सुप्रीम कोर्ट का सामूहिक निर्णय था। उन्होंने कहा कि अगर अमित शाह ने वह 40 पन्नों का फैसला पढ़ा होता, तो शायद वह इस तरह का बयान नहीं देते। रेड्डी ने स्पष्ट किया कि उनके निर्णय का आधार न्यायालयिक आदेश और कानून था, न कि किसी विचारधारा या राजनीतिक दृष्टिकोण।

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