PLGA Army Naxal Hidma: क्या है पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी? कैसे काम करती है हिडमा की खूंखार टुकड़ी
PLGA Army Naxal Hidma: देश के सुरक्षा बलों को सोमवार, 18 नवंबर को मिली बड़ी सफलता ने नक्सल मोर्चे पर नया प्रहार किया है। बस्तर के सबसे कुख्यात माओवादी कमांडर माडवी हिडमा (Naxal Madvi Hidma) को आंध्र प्रदेश के मारेदुमिल्ली क्षेत्र में एक खास ऑपरेशन के दौरान मार गिराया गया।
हिडमा वही नाम है जिस पर पिछले डेढ़ दशक में 26 से अधिक बड़े घातक नक्सली हमले किए थे। पिछले 15 सालो में 26 से अधिक बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड रहा हिडमा, पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) का सबसे घातक कमांडर और बटालियन नंबर 1 का मुखिया था।

माओवादी कमांडर हिडमा के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) पर बड़ा असर पड़ा है। जानें PLGA क्या है और कैसे काम करती थी हिडमा की घातक टुकड़ी? आइए जानते हैं कैसे काम करती है हिडमा की खुंखार सेना...
कौन था माडवी हिडमा?
माडवी हिडमा, जिसका जन्म 1981 में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुवर्ती गांव में हुआ था, नक्सल संगठन CPI (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सबसे युवा सदस्य था। वह पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की बटालियन नंबर 1 का प्रमुख कमांडर था और दंतेवाड़ा, बीजापुर व दक्षिण सुकमा के घने जंगलों में सक्रिय रहता था।
हिडमा को कुख्यात माओवादी नेता रमन्ना का सबसे भरोसेमंद और दाहिना हाथ माना जाता था। दंडकारन्य क्षेत्र में नक्सलियों की सबसे घातक और रणनीतिक कार्रवाइयों की कमान अक्सर उसके हाथों में होती थी, जिसके कारण वह वर्षों तक सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण और खतरनाक माओवादी बनकर उभरा।
क्या है पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA)?
पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (Peoples Liberation Guerilla Army), जिसकी स्थापना वर्ष 2000 में CPI (माओवादी) ने की थी, नक्सलियों की प्रमुख सशस्त्र लड़ाकू शाखा है, जिसके जरिए वे सुरक्षा बलों और सरकार के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध रणनीति अपनाते हैं। हिडमा इसी PLGA की बटालियन नंबर 1 का कमांडर था, जिसमें करीब 250 प्रशिक्षित माओवादी शामिल थे।
इस टुकड़ी की संरचना बेहद संगठित थी-हिडमा शीर्ष कमांडर, उसके बाद सेकेंड-इन-कमांड सीतू, फिर फर्स्ट कमांडर सोनू और सेकेंड कमांडर नागेश। हर कमांडर के साथ हमेशा 40-50 सशस्त्र लड़ाके चलते थे, जिससे उनकी ताकत कई गुना बढ़ जाती थी। हिडमा की रणनीति भी बेहद अनोखी थी-कमांडर एक स्थान पर नहीं टिकते थे, बल्कि अलग-अलग यूनिट्स अलग क्षेत्रों में गश्त करती थीं। जैसे ही एक यूनिट हमला करती, दूसरी यूनिट तुरंत वहां सपोर्ट में पहुंच जाती, जिससे यह "गुरिल्ला-सपोर्ट मॉडल" सुरक्षाबलों के लिए अचानक और घातक खतरा बन जाता था।
कैसे काम करती है PLGA?
हिडमा की माओवादी टुकड़ी के बारे में सुरक्षा एजेंसियों को पहली बार यह अहम जानकारी मिली कि वे जंगलों में व्यवस्थित रूप से बंकरों का जाल बिछाकर काम करते थे। ये बंकर लगभग 5 फीट गहरे, 5 फीट लंबे और 5 फीट चौड़े बनाए जाते थे और घने जंगलों में हर कुछ मीटर की दूरी पर स्थापित होते थे। इनका उपयोग न सिर्फ हवाई हमलों से बचने के लिए किया जाता था, बल्कि अचानक चलाए जाने वाले सर्च ऑपरेशन से छिपने के लिए भी किया जाता था।
इतनी घनी बंकर प्रणाली होने के कारण सुरक्षा बलों के लिए नक्सलियों की सही लोकेशन ट्रैक करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता था, जिससे हिडमा की टुकड़ी को रणनीतिक बढ़त मिलती थी। शीर्ष कमांडर और केंद्रीय समिति के नेता गुप्त बैठकें करते हैं, जिसमें लेवी संग्रह, हथियारों की उपलब्धता, पूरे साल के नुकसान व लाभ की समीक्षा शामिल होती है। इसी दौरान निचले स्तर के कैडरों को नई भूमिकाएँ और जिम्मेदारियाँ सौंपी जाती हैं, ताकि संगठन की गतिविधियाँ और मजबूत की जा सकें।
किन हमलों का मास्टरमाइंड था हिडमा?
हिडमा पिछले दो दशकों में नक्सली हिंसा का सबसे कुख्यात चेहरा रहा है और उस पर कई बड़े हमलों की साजिश का आरोप है। 2010 में दंतेवाड़ा में हुए भीषण नक्सली हमले में CRPF के 76 जवान शहीद हुए थे, जिसे नक्सल इतिहास की सबसे भयावह घटनाओं में गिना जाता है।
इसके बाद 2012 में सुकमा कलेक्टर एलेक्स पाल मेनन का अपहरण और 2013 में कांग्रेस नेताओं के काफिले पर झीरम घाटी में हुए नरसंहार में 27 लोगों की मौत हुई, जिसमें कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। 2017 में सुकमा में मात्र डेढ़ महीने के भीतर दो हमलों में 37 CRPF जवान शहीद हुए, जबकि 2021 में सुकमा-बीजापुर मुठभेड़ में 22 सुरक्षाबल जवानों ने अपनी जान गंवाई।
हिडमा की मौत: माओवादी नेटवर्क को सबसे बड़ा झटका
हिडमा का मारा जाना माओवादी नेटवर्क को अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। उसकी मौत से न सिर्फ PLGA की बटालियन नंबर 1 कमजोर पड़ेगी, बल्कि दंडकारन्य विशेष जोन और दक्षिण बस्तर का पूरा माओवादी ढांचा भी हिल गया है।












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