Pegasus Spyware क्या है और इजरायल का यह 'साइबर हथियार' कैसे काम करता है ?
नई दिल्ली, 19 जुलाई: पेगासस एक स्पाइवेयर है, जिसे इजरायली कंपनी एनएसओ ने विकसित किया है। जानकारी के मुताबिक दुनियाभर की कई सरकारें इसका इस्तेमाल कुछ लोगों की जासूसी के लिए करती हैं और वह बाकायदा कंपनी से इसे खरीदती हैं। किसी के स्मार्टफोन को हैक करने के लिए पेगासस का इस्तेमाल हो सकता है और यह व्हाट्सऐप चैट समेत फोन से सारे डीटेल चुरा ले सकता है। पेगासस स्पाइवेयर एकबार फिर से भारत में चर्चा में है। क्योंकि, आरोप लग रहे हैं कि इसके जरिए यहां करीब 300 लोगों के फोन हैक किए गए हैं, जिसमें मंत्री, पत्रकार, सुप्रीम कोर्ट के जज समेत विपक्ष के नेता तक शामिल हैं। हालांकि, सरकार ने इस तरह के दावों का पूरी तरह से खंडन किया है।

पेगासस स्पाइवेयर क्या है और कैसे काम करता है?
पेगासस स्पाइवेयर इजरायल की कंपनी एनएसओ ग्रुप बेचती है। यह एक ऐसा स्पाइवेयर है, जो किसी भी फोन का डेटा चुरा सकता है। स्पाइवेयर के नाम से साफ है कि यह जासूसी की मकसद से तैयार किया गया है। यह टारगेट के मोबाइल की तबतक निगरानी कर सकता जबतक के लिए उसे प्रोग्राम किया गया हो। जैसे ही हैकर ने पेगासस स्पाइवेयर को किसी यूजर के मोबाइल में डाल दिया, उसकी निगरानी शुरू हो जाती है। हैकर यूजर के फोन के डेटा को हजारों किलोमीटर दूर से ऐक्सेस करता रहता है और उसे इस्तेमाल करने वाले को उसकी भनक भी नहीं लग पाती।
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पेगासस स्पाइवेयर फोन में कैसे पहुंचता है ?
एकबार हैकर को टारगेट मिल जाता है कि किस यूजर का फोन हैक करना है, वो उसके फोन पर इसी मकसद से बनाई गई एक वेबसाइट (फर्जी) का लिंक भेजता है। जैसे ही यूजर उस लिंक पर क्लिक कर देता है, पेगासस स्पाइवेयर उसके फोन में खुद से इंस्टॉल हो जाता है। हैकर इसे व्हाट्सऐप जैसे चैटिंग ऐप के जरिए भी सिक्योरिटी बग भेजकर इंस्टॉल कर सकता है। सच्चाई तो यह है कि साइबर जासूसी का यह खेल इतना अत्याधुनिक है कि सिर्फ टारगेट यूजर को एक मिस्ड कॉल देकर भी उसके फोन में पेगासस इंस्टॉल किया जा सकता है। इसे इस तरह से तैयार किया गया है कि मिस्ड कॉल जाने पर भी यूजर के कॉल लॉग से वह मिस्ड कॉल पेगासस के इंस्टॉल होने के बाद गायब हो जाता है और यूजर को उस मिस्ड कॉल के बारे में कभी पता नहीं लग पाता है।

पेगासस स्पाइवेयर क्या कर सकता है ?
गंभीरता समझिए कि पेगासस स्पाइवेयर टारगेट के स्मार्टफोन में इंस्टॉल होते ही उसके फोन पर हैकर का कंट्रोल हो जाता है। यूजर का पासवर्ड, कैमरा, कॉन्टैक्ट लिस्ट, कैलेंडर इवेंट, टेक्स्ट मैसेज, माइक्रोफोन, वॉयस कॉल सबको रिकॉर्ड कर वह हैकर तक भेज सकता है। सिक्योरिटी रिसर्चरों ने पता लगाया है कि पेगासस मैसेज पढ़ सकता है, कॉल को ट्रैक कर सकता है, यूजर विभिन्न ऐप पर जो भी ऐक्टिविटी करता है, उसकी लगातार उसकी निगरानी कर सकता है, उसका लोकेशन डेटा जुटा सकता है और उस फोन के जरिए होने वाली हर बातचीत सुन सकता है।

पेगासस स्पाइवेयर बनाने वाली एनएसओ ग्रुप का क्या कहना है?
इजरायल के एनएसओ ग्रुप का दावा है कि इस साइबर प्रोग्राम को सिर्फ सरकारी एजेंसियों को ही बेचा गया है, जिसका उद्देश्य आतंकवाद और अपराध पर नजर रखना है। इस स्पाइवेयर को लेकर पहले भी विवाद हो चुके हैं। मेक्सिको और सऊदी अरब जैसे देशों की सरकारों पर भी इसके जरिए जासूसी करवाने के आरोप लग चुके हैं। व्हाट्सऐप की स्वामित्व वाली कंपनी फेसबुक और कई दूसरी कंपनियों ने भी उसपर केस कर रखे हैं। बांग्लादेश जैसे कई देशों ने आधिकारिक तौर पर यह स्पाइवेयर खरीद हैं। एनएसओ ग्रुप बार-बार यह दावा करता है कि वह सिर्फ मान्यता प्राप्त सरकारी एजेंसियों को ही यह प्रोग्राम उपलब्ध करवाता है।

पेगासस स्पाइवेयर का ताजा विवाद क्या है ?
भारत में इससे पहले नवंबर, 2019 में भी कई पत्रकारों और ऐक्टिविस्ट के फोन पर इस तरह के साइबर हमले के आरोप लग चुके हैं। इसबार भी कई वेबसाइट ने रविवार को भारत में 300 से ज्यादा मोबाइल नंबरों को इसी स्पाइवेयर से हैक करने के दावे किए हैं। इनमें करीब 40 पत्रकार, 2 कैबिनेट मंत्री, विपक्ष के 3 नेता, सुप्रीम कोर्ट के एक जज समेत कुछ ऐक्टिविस्ट और बिजनेसमैन के भी नंबर हैक होने के दावे किए गए हैं। हालांकि, भारत सरकार ने अनाधिकृत तरीके से इस स्पाइवेयर के जरिए किसी की भी निगरानी के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। बता दें कि पेरिस स्थित मीडिया नॉनप्रौफिट फॉरबिडेन स्टोरीज और एमनिस्टी इंटरनेशनल ने दुनियाभर में हजारों लीक डेटा बेस हाथ लगने के दावे किए हैं, जिसे इस स्पाइवेयर के जरिए निशाना बनाया गया है। रविवार शाम को 16 ग्लोबल मीडिया ऑर्गेनाइजेश के जरिए इस तरह की जासूसी की रिपोर्ट सार्वजनिक की गई है।












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