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FCRA क्या है ? मदर टेरेसा की संस्था मिशनरीज ऑफ चैरिटी से जुड़ा पूरा मामला समझिए

नई दिल्ली, 28 दिसंबर: सोमवार को मदर टेरेसा की संस्था मिशनरीज ऑफ चैरिटी के बैंक अकाउंट फ्रीज किए जाने के ममता बनर्जी के दावे से एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था, लेकिन बाद में यह पूरा मामला अलग ही दिशा में घूम गया। दरअसल, इस साल 13 एनजीओ (गैर-सरकारी संस्था) के लाइसेंस विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 (एफसीआरए) के तहत रद्द किए गए हैं। इनके एफसीआरए सर्टिफिकेट निलंबित करके बैंक खाते फ्रीज भी किए जा चुके हैं। गृहमंत्रालय के मुताबिक जनजातीय इलाकों में काम करने वाले कई एनजीओ के खिलाफ उसे 'गंभीर प्रतिकूल इनपुट' मिलने थे। झारखंड में काम करने वाले कम से कम दो एनजीओ के भी लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। लेकिन, मिशनरीज ऑफ चैरिटी का मामला पूरी तरह से अलग है और उसके कोई खाते फ्रीज नहीं हुए हैं। लेकिन, उसका एफसीआरए लाइसेंस रिन्यू नहीं किया गया है।

एफसीआरए (विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम) क्या है ?

एफसीआरए (विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम) क्या है ?

एफसीआरए के जरिए विदेशों से मिलने वाले दान को नियंत्रित किया जाता है, ताकि इससे देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए किसी तरह की चुनौती न पैदा हो। इसे पहले 1976 में बनाया गया था और 2010 में इसे संशोधित किया गया। एफसीआरए विदेशी दान लेने वाले सभी संगठनों, समूहों और गैर-सरकारी संस्थाओं पर लागू होता है। इन संस्थाओं के लिए एफसीआरए के तहत पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। शुरुआत में यह पंजीकरण पांच वर्षों के लिए होता है, जिसे सभी मानदंडों को पूरा करने पर रिन्यू करवाए जाने का प्रावधान है। पंजीकृत संस्थाएं सामाजिक, शैक्षिक, धार्मिक,आर्थिक और सांस्कृतिक प्रयोजनों के लिए विदेशों से योगदान ले सकते हैं। इनके लिए सालाना आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य है। 2015 में गृह मंत्रालय ने नए नियम जारी किए जिसके तहत एनजीओ को वचन देना होता है कि विदेशी फंड से भारत की संप्रभुता और अखंडता या किसी भी देश के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों पर किसी भी तरह से प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा और सांप्रदायिक सौहार्द नहीं बिगड़ेगा। ये संस्था ऐसे राष्ट्रीयकृत या निजी बैंकों में खाते रखेंगे,जिसपर सुरक्षा एजेंसिया किसी भी समय पर नजर डाल सकती हैं।

विदेशी चंदा कौन नहीं ले सकता ?

विदेशी चंदा कौन नहीं ले सकता ?

विधानमंडलों के सदस्य, राजनीतिक दल, सरकारी अधिकारी, जज और मीडिया के लोगों को विदेशों से चंदा उगाही पर पाबंदी है। हालांकि, 2017 में गृह मंत्रालय ने वित्त विधेयक के जरिए इस नियम में थोड़ा सा संशोधन किया। इसके बाद राजनीतिक दलों के लिए किसी विदेशी कंपनी की भारतीय सहायक कंपनियों या ऐसी विदेशी कंपनियां, जिसमें भारतीयों का शेयर 50% या उससे अधिक हो, उनसे फंड लेने का रास्ता साफ हो गया।

विदेशों से चंदा लेने के और भी हैं रास्ते

विदेशों से चंदा लेने के और भी हैं रास्ते

विदेशों से अनुदान लेने का एक रास्ता यह भी है कि इसके लिए पहले से आवेदन देकर अनुमति ली जाए। यह खास गतिविधियों या परियोजनाओं को पूरा करने के लिए एक विशेष डोनर से एक खास धनराशि की प्राप्ति के लिए दिया जाता है। लेकिन इसके लिए यह जरूरी है कि संबंधित संस्था सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन ऐक्ट, 1860, इंडियन ट्रस्ट ऐक्ट, 1882 या कंपनी ऐक्ट,1956 के सेक्शन 25 के तहत रजिस्टर्ड हो। इसमें दानदाता को भी रकम और प्रयोजन की जानकारी लिखित में देनी होती है। 2017 में गृह मंत्रालय ने पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया का एफसीआरए इसलिए रद्द कर दिया था, क्योंकि वह विदेशी धन का इस्तेमाल तंबाकू नियंत्रण गतिविधियों को लेकर सांसदों की लॉबिंग के लिए करता था। बाद में सरकार ने इसे पहले से इजाजत लेकर फंड लेने वाली श्रेणी में डाल दिया।

एफसीआरए कब रद्द या निलंबित होता है ?

एफसीआरए कब रद्द या निलंबित होता है ?

जब गृह मंत्रालय को किसी संगठन की गतिविधियों के बारे में प्रतिकूल जानकारी मिलती है तो शुरू में 180 दिनों के लिए उसका एफसीआरए निलंबित किया जा सकता है। जबतक अंतिम फैसला नहीं लिया जाता, संस्था कोई भी विदेशी चंदा नहीं ले सकता और बैंक में पड़े 25% से ज्यादा रकम बिना गृह मंत्रालय की इजाजत से इस्तेमाल नहीं कर सकता। गृह मंत्रालय किसी भी संगठन का रजिस्ट्रेशन या 'पूर्व अनुमति' लेने की सुविधा को तीन साल तक के लिए रद्द कर सकता है।

एफसीआरए के तहत हुआ निलंबन

एफसीआरए के तहत हुआ निलंबन

गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2011 से 20,664 संगठनों का लाइसेंस रद्द किया जा चुका है। इनपर जिन मामलों में कार्रवाई हुई है, वे हैं- विदेशी योगदान का गलत इस्तेमाल, सालाना अनिवार्य रिटर्न नहीं दाखिल करना और फंड को दूसरे काम के लिए इस्तेमाल करना। 11 सितंबर तक एफसीआरए के तहत 49,843 संगठन रजिस्टर्ड थे।

अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं पर भी नजर

अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं पर भी नजर

सरकार ने कुछ दानदाता विदेशी संस्थानों पर भी शिकंजा कसा है। इनमें अमेरिका स्थित कंपैशन इंटरनेशनल, फोर्ड फाउंडेशन, वर्ल्ड मूवमेंट फॉर डेमोक्रेसी, ओपन सोसाइटी फाउंडेशन और द नेशनल एंडावमेंट फॉर डेमोक्रेसी जैसे संगठन शामिल हैं। इन विदेशी दानदाताओं को सरकार ने 'वॉच लिस्ट' या 'प्रियर परमिशन' की श्रेणी में डाल दिया है। यानी ये बिना गृह मंत्रालय से मंजूरी लिए किसी भी भारतीय संस्था को पैसे नहीं भेज सकते।

मिशनरीज ऑफ चैरिटी के मामले में क्या हुआ ?

मिशनरीज ऑफ चैरिटी के मामले में क्या हुआ ?

मिशनरीज ऑफ चैरिटी को एफसीआरए की मंजूरी नहीं दी गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को कहा है कि इसने मिशनरीज ऑफ चैरिटी का रजिस्ट्रेशन एफसीआरए के तहत रिन्यू करने से इनकार कर दिया है। एमएचए के मुताबिक नोबल पुरस्कार विजेता मदर टेरेसा के इस कैथोलिक धार्मिक मंडली से संबंधित 'कुछ प्रतिकूल इनपुट पाए गए थे।' मिशनरीज ऑफ चैरिटी ने भी कहा है कि उसका एफसीआरए आवेदन मंजूर नहीं किया गया है और उन्होंने अपने केंद्रों से कहा है कि इससे जुड़े बैंक खातों का इस्तेमाल ना करें।

मिशनरीज ऑफ चैरिटी की बैलेंस शीट

मिशनरीज ऑफ चैरिटी की बैलेंस शीट

साल 2020-21 के लिए संस्थान ने 13 दिसंबर को जब अपना रिटर्न फाइल किया है, उसके मुताबिक उसे 347 विदेशी व्यक्तियों और 59 संस्थागत दाताओं से 75 करोड़ रुपये से ज्यादा दान के रूप में मिले। उसके एफसीआरए खातों में पिछले साल के 27.3 करोड़ रुपये बचे हुए थे और इस तरह से कुल जमा 103.76 रुपये खाते में बचे हुए हैं। कोलकाता में रजिस्टर्ड इस एनजीओ के पास विदेशी फंडों के इस्तेमाल के लिए देशभर में 250 से ज्यादा बैंक अकाउंट हैं। इसके सबसे बड़े दान दाताओं में अमेरिकी और यूके की मिशनरीज ऑफ चैरिटी हैं, जिन्होंने भारत में 'प्राथमिक स्वास्थ्य, शिक्षा में सहयोग, कुष्ठ रोगियों के उपचार' के नाम पर 15 करोड़ रुपये से ज्यादा दिए हैं।

केंद्र सरकार ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी पर क्या कहा है ?

केंद्र सरकार ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी पर क्या कहा है ?

गृह मंत्रालय ने बयान में कहा कि पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करने के चलते 25 दिसंबर को रिन्यूअल से इनकार कर दिया गया था और 'नवीकरण के इस इनकार की समीक्षा के लिए मिशनरीज ऑफ चैरिटी की ओर से कोई अनुरोध / संशोधन आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है।' इसने कहा है कि इसका लाइसेंस 31 अक्टूबर तक ही वैध था, लेकिन इसके साथ ही जिनका भी रिन्यूअल लंबित है, उसे 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया गया है।

मिशनरीज ऑफ चैरिटी का पक्ष क्या है ?

मिशनरीज ऑफ चैरिटी का पक्ष क्या है ?

मिशनरीज ऑफ चैरिटी की सुपिरियर जनरल सिस्टर एम प्रेरणा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि 'हमें बताया गया है कि हमारा एफसीआरए रिन्यूअल आवेदन मंजूर नहीं हुआ है। इसलिए कोई चूक ना हो यह सुनिश्चित करने के लिए हमनें अपने केंद्रों से कहा है कि विदेशी सहयोग खातों को मामला सुलझने तक ऑपरेट ना करें।' मिशनरीज ऑफ चैरिटी ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया है कि 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी का एफसीआरए रजिस्ट्रेशन ना ही निलंबित हुआ है और ना ही रद्द हुआ है। यही नहीं गृह मंत्रालय की ओर से हमारे किसी भी बैंक खातों को फ्रीज करने का कोई आदेश नहीं दिया गया है।'(कुछ तस्वीरें-सांकेतिक)

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