Chandipura virus: क्या है चांदीपुरा वायरस, क्या है इसके लक्षण, कैसे फैलता है, इलाज क्या है? जानिए सबकुछ
Chandipura virus Lakshan: राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) के मुताबिक देशभर में चांदीपुरा वायरस की वजह से 15 बच्चों की मौत हो गई है। देशभर में अब तक चांदीपुरा वायरस के 29 मामले सामने आए हैं, इसमें से 26 गुजरात से और 2 राजस्थान और एक मध्य प्रदेश में पाए गए हैं। इसे CHPV वायरस भी कहा जाता है।
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा, "17 जुलाई तक 15 मौतें हुई हैं, जिनमें से एक की पुष्टि चांदीपुरा वायरस के कारण हुई है, जबकि अन्य संदिग्ध हैं, लेकिन सभी मामलों में लक्षण एक जैसे हैं, इसलिए यह माना जा रहा है कि सभी मामले एक जैसे हैं।"

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों का मानना है कि आने वाले दिनों में मामले बढ़ेंगे, क्योंकि वायरस अधिक जिलों और यहां तक कि अहमदाबाद जैसे शहरों में भी फैल गया है, जहां बुधवार (17 जुलाई) को सिविल अस्पताल में एक बच्चे की मौत हो गई।
🔴 What is the Chandipura virus: क्या है चांदीपुरा वायरस?
- चांदीपुरा वायरस, सबसे पहले 1965 में महाराष्ट्र में रिपोर्ट हुआ था। नागपुर के चांदीपुर में इस वायरस की पहचान हुई थी, इसलिए इसका नाम चांदीपुरा वायरस पड़ा है।
- इसके बाद चांदीपुरा वायरस 2004 से 2006 और 2019 में आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में पाया गया है। चांदीपुरा वायरस एक RNA वायरस है, जो सबसे ज्यादा मादा फ्लेबोटोमाइन मक्खी से फैलता है। इसके फैलने के पीछे मच्छर में पाए जाने वाले एडीज जिम्मेदार हैं।
- इससे बच्चों को इस वायरस से संक्रमित होने का अधिक खतरा होता है। चांदीपुरा वायरस से ज्याजातर 15 साल से कम उम्र के बच्चे पीड़ित होते हैं। इस उम्र के बच्चों में ही सबसे ज्यादा मृत्यु दर अबतक पाई गई है।

🔴 Symptoms of Chandipura virus: चांदीपुरा वायरस लक्षण
- चांदीपुरा वायरस बुखार का कारण बनता है, जिसके लक्षण फ्लू जैसे होते हैं। इसमें तीव्र एन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क की सूजन) होता है। यह रोगजनक रैबडोविरिडे परिवार के वेसिकुलोवायरस जीनस का सदस्य है।
- यह मच्छरों, टिक्स और सैंडफ्लाइज जैसे वैक्टर द्वारा फैलता है। इसके प्रमुख लक्षण तेज बुखार, दस्त-उल्टी, सिरदर्द, ऐंठन, दिमागी बुखार है।
- जब चांदीपुरा वायरस शरीर में फैल जाता है तो, रिसर्च के मुताबिक सांस लेने में दिक्क, रक्तस्राव की प्रवृत्ति या एनीमिया जैसे अन्य लक्षण भी देखे जाते हैं।
- अध्ययनों के अनुसार, एन्सेफलाइटिस के बाद संक्रमण अक्सर तेजी से बढ़ता है, जिसके कारण अस्पताल में भर्ती होने के 24-48 घंटों के भीतर मौत तक हो सकती है।
🔴 What is the vector of the Chandipura virus? चांदीपुरा वायरस कैसे फैलता है?
चांदीपुरा वायरस मच्छरों, टिक्स और सैंडफ्लाइज जैसे वैक्टर से फैलता है। फ्लेबोटोमाइन सैंडफ्लाई और फ्लेबोटोमस पापाटासी जैसी कई सैंडफ्लाई प्रजातियां हैं, एडीज एजिप्टी जैसी कुछ मच्छर प्रजातियां हैं, जो चांदीपुरा वायरस को फैलाने का काम करता है। एडीज एजिप्टी जैसी कुछ मच्छर की प्रजातियां डेंगू भी फैलाती है।
🔴 How do you treat chandipura disease: चांदीपुरा वायरस का इलाज क्या है?
- चांदीपुरा के इलाज के लिए अभी तक कोई भी एंटी वायरल दवा नहीं बनाई जा सकी है।
- इसके वायरस का केवल लक्षणों के आधार पर इलाज किया जा सकता है। क्योंकि उपचार के लिए कोई विशिष्ट एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी या वैक्सीन नहीं है।
- इससे होने वाले मृत्यु दर को रोकने के लिए मस्तिष्क की सूजन का प्रबंधन करना सबसे अहम है।

🔴 देश में अभी कहां-कहां फैला है चांदीपुरा वायरस?
देश में फिलहाल चांदीपुरा वायरस के 29 मामले हैं। 29 मामलों में से 26 गुजरात से, दो राजस्थान से और एक मामला मध्य प्रदेश से है। इसमें से 15 मौतों में से 13 मौत गुजरात से है। जबकि एक-एक मध्य प्रदेश और राजस्थान से हैं। गुजरात में साबरकांठा, अरावली, मेहसाणा, राजकोट, अहमदाबाद शहर, मोरबी, पंचमहल और अन्य जगहों से मामले सामने आए हैं।
🔴 Chandipura Prevention: चांदीपुरा वायरस के रोकथाम?
- चांदीपुरा वायरस से बचाव का पहला चरण, रेत में पाई जाने वाली मक्खियों से बचाव है। इसके लिए कीटनाशक का इस्तेमाल किया जा सकता है।
- मक्खी और मच्छरों से बचने के लिए फुल कपड़े पहनें और मच्छरदानी के बिना ना सोए।
- स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से कच्चे घरों की दरारों में पाया जाता है। इसलिए निगरानी, धूल झाड़ना और दवा का छिड़काव महामारी को रोकने के उपाय हैं।
- अब तक गुजरात भर में प्रभावित क्षेत्रों में 10,181 घरों में 51,724 व्यक्तियों की निगरानी की गई है और उन्हें जागरूक करने के उद्देश्य से बचाव के उपाय बताए गए हैं।
- इसके अलावा 3741 मिट्टी के घरों की दीवारों की सफाई कर मैलाथियान पाउडर का छिड़काव किया गया है।

Chandipura Virus worst affected regions in India: चांदीपुरा वायरस के भारत में सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र कौन से हैं?
- भारत में चांदीपुरा वायरस बीमारी का सबसे बड़ा प्रकोप 2003-04 में महाराष्ट्र, उत्तरी गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में देखा गया था, जिसमें तीन राज्यों में 300 से अधिक बच्चों की मौत की सूचना मिली थी।
- गुजरात में 2004 के प्रकोप के दौरान मृत्यु दर (CFR) लगभग 78% थी, जबकि आंध्र प्रदेश में 2003 के प्रकोप के दौरान मृत्यु दर लगभग 55% थी।
- यह संक्रमण मुख्यत भारत के मध्य भाग तक ही सीमित है, जहां सीएचपीवी संक्रमण फैलाने वाले बालू मक्खियों और मच्छरों की संख्या अधिक है।
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