क्या होता है ब्लैक बॉक्स, जिससे होगा हेलिकॉप्टर क्रैश की असल वजह का खुलासा?
बड़े से बड़े विमान हादसे में भी ये ब्लैक बॉक्स सुरक्षित बच जाता है और इसमें कई अहम जानकारियां होती हैं।
नई दिल्ली, 9 दिसंबर: तमिलनाडु के कुन्नूर में हुए हेलिकॉप्टर हादसे में भारतीय वायु सेना के अधिकारियों ने फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, जिसे ब्लैक बॉक्स भी कहा जाता है, बरामद कर लिया है। बुधवार को हुए इस हादसे में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी सहित 13 लोगों की जान चली गई थी। इस मामले में भारतीय वायु सेना ने जांच के आदेश भी दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, वायु सेना के तकनीकी अधिकारियों ने दुर्घटनास्थल पर 300 मीटर से लेकर करीब 1 किलोमीटर तक के दायरे में तलाशी ली, जिसके बाद ब्लैक बॉक्स बरामद किया गया। आइए जानते हैं कि क्या होता है ब्लैक बॉक्स, जिससे हेलिकॉप्टर हादसे की असल वजह का पता चल सकता है।

क्या होता है ब्लैक बॉक्स?
आपको नाम से भले ही ब्लैक बॉक्स, काले रंग का कोई बॉक्स लगे, लेकिन ना तो इसका रंग काला होता है और ना ही ये बॉक्स जैसा दिखता है। दरअसल, ब्लैक बॉक्स कंप्रेसर के आकार में बनी संतरी रंग की एक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होती है, जिसमें किसी भी विमान का अहम डेटा रिकॉर्ड होता है। ब्लैक बॉक्स एक तरह से हार्ड डिस्क की तरह होता है। ब्लैक बॉक्स इतना मजबूत होता है कि बड़े से बड़े हादसे में भी सुरक्षित बच जाता है। इसका अविष्कार ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक डेविड वारेन ने 1950 में किया था, लेकिन इस डिवाइस का नाम ब्लैक बॉक्स रखने को लेकर विशेषज्ञों में आज भी असहमति है।

ब्लैक बॉक्स से कौन सी जानकारी मिलती है?
जी न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लैक बॉक्स के डेटा में एयरस्पीड, ऊंचाई और कॉकपिट में हुई बातचीत सहित कुल 88 अहम जानकारियां शामिल होती हैं। करीब 4.5 किलो वजन के इस ब्लैक बॉक्स में दो रिकॉर्डर होते हैं। पहला- कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर), जिसमें पायलट और कॉकपिट की आवाज रिकॉर्ड होती है। दूसरा- फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (एफडीआर), जो विमान में बैठे बाकी लोगों की आवाज रिकॉर्ड की जाती है। कमर्शियल हो या लड़ाकू, ब्लैक बॉक्स यानी फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर हर तरह के विमान में लगा होता है। जब कोई हवाई दुर्घटना होती है, तो ब्लैक बॉक्स शुरुआती तौर पर यह समझने में मदद करता है कि आखिर विमान क्रैश होने का कारण क्या था।

ब्लैक बॉक्स मिलने के बाद कैसे निकाला जाता है डेटा
किसी दुर्घटनाग्रस्त विमान का ब्लैक बॉक्स मिलने के बाद टेक्निकल एक्सपर्ट सबसे पहले सुरक्षात्मक मटेरियल को हटाकर बेहद सावधानी से कनेक्शन क्लीन करते हैं, ताकि गलती से कोई भी जरूरी डेटा ना मिटे। इसके बाद ऑडियो या डेटा फाइल को डाउनलोड और कॉपी किया जाता है। हालांकि इस डेटा से पहली बार में ही कोई जानकारी नहीं मिलती, बल्कि इसके लिए रॉ फाइल्स को डीकोड करके एक ग्राफ तैयार किया जाता है।

ब्लैक बॉक्स का डेटा मिलने के बाद क्या होता है?
ब्लैक बॉक्स के डेटा की जांच के लिए अधिकारियों के पास एक ऐसा कमरा होता है, जो बिल्कुल रिकॉर्डिंग स्टूडियो की तरह बना होता है। यहां चार चैनलों के जरिए शोर को हटाते हुए आवाज को अलग-अलग किया जाता है। केवल मुख्य जांच अधिकारी और उन चंद लोगों को ही आवाज के सभी टेप सुनने की इजाजत होती है, जो जांच में शामिल हैं। टेप सुनने के बाद इन्हें सील कर दिया जाता है। आपको बता दें, चूंकि डेटा में मौजूद आवाज काफी विचलित करने वाले होती है, इसीलिए फ्रांस में आवाज सुनने वाले स्टाफ की ट्रॉमा काउंसलिंग भी कराई जाती है।

कब तक मिलता है ब्लैक बॉक्स के डेटा से रिजल्ट?
अगर ब्लैक बॉक्स को कोई ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा है तो जांच अधिकारी कुछ दिनों में ही हादसे को लेकर बेसिक जानकारी हासिल कर लेते हैं। हालांकि हर केस में हमेशा ऐसा नहीं होता और शायद ही पूरी कहानी पता चल पाती है। ब्लैक बॉक्स मिलने के करीब एक महीने बाद एक अंतरिम रिपोर्ट जारी की जाती है, लेकिन वो एक कंपलीट रिपोर्ट नहीं होती। मामले की पूरी तरह से जांच करने में करीब एक साल या उससे ज्यादा का भी वक्त लग जाता है।
ये भी पढ़ें- क्या थे CDS Bipin Rawat के आखिरी शब्द? बचावकर्मी ने बताया- हिंदी में कही थी कुछ बात











Click it and Unblock the Notifications