क्या है अगले 15 से 20 दिनों में किसान आंदोलन की सूरत बदलने का भाजपा का मेगा प्लान ?
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों तक पहुंचने के लिए एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है। मंगलवार को इसको लेकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह ने किसान आंदोलन से प्रभावित इलाकों के पार्टी नेताओं के साथ मंथन किया है। इस बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेद्र सिंह तोमर और केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री संजीव बालियान भी मौजूद थे, जो पश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर से सांसद हैं। भाजपा नेताओं की यह बड़ी बैठक किसान नेताओं की ओर से हरियाणा, पश्चिमी यूपी और राजस्थान के कुछ इलाकों में की गई किसान महापंचायतों के बाद हुई है। इस बैठक में मोटे तौर पर पार्टी की भावना यह बनी है जाटों का साथ नहीं छोड़ सकते, इसलिए खापों से मिलकर जो भी 'गलतफहमियां' हैं, उसे फौरन दूर किया जाए।

नेताओं को किसानों से संपर्क करने का निर्देश
जानकारी के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी ने अपने सांसदों, मंत्रियों, विधायकों और तमाम आला नेताओं से कहा है कि वह कृषि कानून का विरोध कर रहे अपने इलाके के किसानों तक जाएं। खासकर जाट समुदाय के बीच जरूर पहुंचें और उनतक कृषि कानूनों को लेकर पार्टी के नजरिए को साफ करें और उन्हें समझाएं कि उनकी चिंताओं को दूर किया जाएगा। दी प्रिंट के मुताबिक उससे एक भाजपा नेता ने इसके बारे में कहा है, 'हमें विशेषण निर्देश दिए गए हैं कि खापों और पंचायतों तक पहुंचें और उन्हें तीनों कृषि कानूनों की जानकारी दें कि सरकार और पार्टी क्या कर रही है और तथ्य ये है कि सरकार अभी भी बातचीत के लिए तैयार है।' जानकारी के मुताबिक भाजपा किसान मोर्चा भी किसानों तक पहुंचने और जिला और गांव स्तर पर बैठकें आयोजित करने की विशेष योजना बना रहा है।

'अगले 15-20 दिनों में सभी को खापों और किसानों से संपर्क करना है'
भाजपा नेताओं के मुताबिक इसलिए बैठक में उन्हीं इलाकों के बड़े नेताओं को बुलाया गया था, जहां के लोग किसानों के विरोध में ज्यादा सक्रिय हैं। पार्टी के एक और नेता के मुताबिक, 'अमित शाह जी ने कहा है कि विपक्ष देश को पीछे धकेलना चाहता है और इसलिए राष्ट्रहित को दिमाग में रखकर जमीन पर काम करना होगा, ताकि गांव और जाट समाज अलग-थलग ना रहें, हमारे साथ रहें। अगले 15-20 दिनों में सभी को खापों और किसानों से संपर्क करना है......।' इसमें भाजपा के वरिष्ठ नेता और बागपत के सांसद सतपाल सिंह, हरियाण से कृष्ण पाल और ओम प्रकाश धनकड़ और इन इलाकों के कई सांसद और विधायक भी पहुंचे थे।

'आंदोलन पूरी तरह से राजनीतिक प्रकृति का है'
भाजपा सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में अमित शाह ने पार्टी नेताओं से कहा है कि यह आंदोलन पूरी तरह से राजनीतिक प्रकृति का है और इसका किसानों से कोई लेना-देना नहीं है। पार्टी के एक नेता ने उनके हवाले से कहा, 'अमित शाह जी ने कहा कि आंदोलन पूरी तरह से राजनीतिक है। इसका किसानों से कोई लिंक नहीं है। किसानों तक पहुंचने की जरूरत है, खासकर जाट समुदाय के पास और उन्हें पार्टी का स्टैंड और यह तथ्य बताना होगा कि हम इसे (कृषि कानूनों को) निलंबित रखने के लिए तैयार हैं। 3-4 दिनों में योजना बना ली जाएगी। अधिकतम लोगों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए खापों को विश्वास में लेना होगा।'

'यूपी में भाजपा की बढ़त में जाटों की अहम भूमिका'
असल में अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर बीजेपी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। खासकर तब जब आंदोलन वाली जगहों से अलग-अलग सूचनाएं मिल रही हैं। पार्टी के एक पदाधिकारी के मुताबिक, 'टिकैत का प्रभाव बढ़ रहा है और निश्चित तौर पर यह चिंता की बात है। ठीक इसी समय किसानों और सरकार के बीच बातचीत रुक गई है। अगर यह जारी रहा तो निश्चित तौर पर विपक्ष इसे उन्हें गुमराह करने के मौके के तौर पर भुनाने की कोशिश करेगा। यूपी में हमारी बढ़त में जाटों ने बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और हम उन्हें यूं ही जाने नहीं दे सकते।' पार्टी नेतृत्व को यह भी फीडबैक मिल रहा है कि अब अगर आंदोलन जल्द खत्म नहीं हुआ तो यह दूसरा मोड़ भी ले सकता है। गौरतलब है कि जाटों को बहलाने के लिए पहले से ही समाजवादी पार्टी,कांग्रेस, आरएलडी और यहां तक कि आम आदमी पार्टी भी लग चुकी है।
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