Air India crash: क्या होता है Black box? जो खोलेगा एयर इंडिया प्लेन क्रैश का राज, कैसे करता है काम, हर डिटेल
Air India crash (Black box DVR): अहमदाबाद में कैसे टेक ऑफ करते ही एयर इंडिया फ्लाइट AI171 हादसे का शिकार हो गई? इसका खुलासा अब जल्द होने वाला है क्योंकि ब्लैक बॉक्स मिल गया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा है कि ब्लैक बॉक्स छत पर पाया गया। AAIB ने तुरंत पूरी ताकत से काम शुरू कर दिया। जब भी कोई विमान हादसा होता है, तो उसकी जांच के दौरान ब्लैक बॉक्स की चर्चा सबसे पहले होती है। ब्लैक बॉक्स विमान हादसे की जांच में मदद करता है।
गुजरात ATS ने इससे पहले 13 एयर इंडिया के विमान के मलबे से एक डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR) बरामद किया था। यहां आपका जान लेना जरूरी है कि डीवीआर और ब्लैक बॉक्स में अंतर होता है। इन दोनों का काम विमान का डेटा रिकॉर्ड करना होता है, लेकिन DVR आमतौर पर सिक्योरिटी कैमरों से फ्लाइट का वीडियो रिकॉर्ड करता है। वहीं ब्लैक बॉक्स फ्लाइट डेटा और कॉकपिट का डेटा रिकॉर्ड करता है। ऐसे में आइए जानें ये ''ब्लैक बॉक्स'' क्या होता है?

🔴 What is Black box: ब्लैक बॉक्स क्या होता है?
ब्लैक बॉक्स विमान का एक खास डिवाइस होता है, जो हर फ्लाइट में लगाया जाता है। इसका काम होता है फ्लाइट से जुड़ी जरूरी जानकारी को रिकॉर्ड करना। ये उड़ान के दौरान की हर जानकारी को रिकॉर्ड करता है। इसका इस्तेमाल विमान हादसों की जांच में होता है।
इसे 1950 के दशक में ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक डेविड रोनाल्ड डी मे वॉरेन ने बनाया था। यह आमतौर पर नारंगी या पीले रंग का होता है और विस्फोट, आग, पानी और टक्कर जैसे हालात झेल सकता है।
🔴 ब्लैक बॉक्स के दो मुख्य हिस्से होते हैं...
- फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) - यह विमान की गति, ऊंचाई, दिशा, इंजन की स्थिति जैसी तकनीकी जानकारियों को रिकॉर्ड करता है। से
- कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) - इसमें पायलटों की बातचीत, अलार्म और कॉकपिट की अन्य आवाजें रिकॉर्ड होती हैं
विमान हादसे के बाद जांचकर्ता ब्लैक बॉक्स के डेटा की मदद से यह पता लगाते हैं कि दुर्घटना से पहले क्या हुआ था, ताकि कारणों का पता चल सके और भविष्य में ऐसे हादसे रोके जा सकें।
🔴 ब्लैक बॉक्स विमान दुर्घटना में कैसे सुरक्षित रहता है?
- ब्लैक बॉक्स को बहुत ही मजबूत धातुओं जैसे स्टील या टाइटेनियम से बनाया जाता है। यह भीषण गर्मी और ठंड जैसे हालातों से बचने के लिए स्पेशल इन्सुलेशन (परतों) से लैस होता है।
- इसे विमान के पीछले हिस्से (tail section) में लगाया जाता है, क्योंकि आमतौर पर विमान हादसों में इसी हिस्से पर सबसे कम प्रभाव पड़ता है।
🔴 ब्लैक बॉक्स विमान जांच में कैसे मदद करता है?
किसी भी विमान में ब्लैक बॉक्स के दो हिस्से होते हैं... फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR)। जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि CVR पायलटों की बातचीत, रेडियो ट्रांसमिशन, इंजन की आवाज और अन्य कॉकपिट साउंड को रिकॉर्ड करता है। वहीं FDR 80 से ज्यादा तरह की तकनीकी जानकारी रिकॉर्ड करता है जैसे, विमान की ऊंचाई (altitude), गति (airspeed), दिशा (flight heading), ऊर्ध्वाधर गति (vertical acceleration), झुकाव (pitch) और झटके (roll) और ऑटोपायलट की स्थिति जैसे।
इन दोनों रिकॉर्डरों की मदद से जांचकर्ता विमान हादसा से पहले के हर तकनीकी और मानवीय पहलू को फिर से रिप्ले और एनालिसिस कर सकते हैं।
🔴 ब्लैक बॉक्स के डेटा एनालिसिस में कितना समय लगता है?
आमतौर पर ब्लैक बॉक्स से मिले डेटा को समझने और जांचने में 10 से 15 दिन का समय लगता है। अगर डिवाइस को नुकसान न पहुंचा हो तो जांच प्रक्रिया और भी तेज हो सकती है।
असल में ब्लैक बॉक्स किसी भी विमान हादसे के रहस्य को सुलझाने की चाबी होता है। इसकी मजबूती और तकनीकी क्षमता जांच अधिकारियों को यह समझने में मदद करती है कि आखिर दुर्घटना कैसे और क्यों हुई।












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