'किसी ने सरकार बनाने का दावा नहीं किया', 'मणिपुर में राष्ट्रपति शासन' पर राज्यसभा में क्या हुआ, 5 बड़ी बातें

Manipur President rule : मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने के वैधानिक प्रस्ताव को राज्यसभा से मंजूरी मिल गई है। वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 पर 12 घंटे से अधिक चर्चा के बाद गुरुवार (3 अप्रैल, 2025) को देर रात 2 बजकर 36 मिनट पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने को लेकर राज्यसभा में वैधानिक प्रस्ताव पेश किया। अमित शाह समेत 11 सांसदों की की चर्चा के बाद इसे सुबह 3 बजकर 58 मिनट पर मंजूरी दी गई।

इसे पहले ही लोकसभा में पास करा लिया गया था। हालांकि राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने अध्यक्ष से मणिपुर पर चर्चा अगले दिन के लिए निर्धारित करने का अनुरोध किया था क्योंकि वक्फ विधेयक पर चर्चा देर रात तक जारी रहेगी और मणिपुर के लिए बहुत कम समय बचेगा। लेकिन अध्यक्ष ने सदन को सूचित किया कि यह मामला आज गुरुवार (3 अप्रैल) के लिए एजेंडे में सूचीबद्ध है।

President rule in Manipur

बाद में जब अन्य विपक्षी नेताओं ने भी इसी तरह का अनुरोध किया तो अमित शाह ने जवाब दिया, "मणिपुर एक अहम मुद्दा है। आप आज रात एक बार देर रात तक काम क्यों नहीं करते?" ऐसे में आइए जानें राज्यसभा में कल बीती रात 'मणिपुर में राष्ट्रपति शासन' लगाने की प्रस्ताव को लेकर क्या-क्या हुआ?

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन' पर राज्यसभा में क्या-क्या हुआ, 5 बड़ी बातें

🔴 अमित शाह बोले- ना किसी ने सरकार बनाने का दावा किया, ना कोई अविश्वास प्रस्ताव आया

अमित शाह ने कहा, ''मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद, कांग्रेस सहित किसी भी पार्टी ने सरकार बनाने का दावा नहीं किया, जिसके कारण वर्तमान राष्ट्रपति शासन लगा।''

अमित शाह ने कहा कि हमनें कोई सरकार गिराने के लिए राष्ट्रपति शासन नहीं लगाया है...जैसा हमेशा से कांग्रेस करती आई है। 11 फरवरी 2025 को सीएम बीरेन सिंह से इस्तीफा दिया और सभी ने दावा किया कि ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव लाने जा रही थी। लेकिन अब तक किसी ने सरकार बनाने का दावा नहीं किया है और ना ही उस सरकार के खिलाफ कोई अविश्वास प्रस्ताव आया है।

उन्होंने कहा,

"नवंबर, दिसंबर और अब तक कोई हिंसा नहीं हुई। मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दे दिया था, जिससे राष्ट्रपति शासन का रास्ता साफ हो गया। कांग्रेस द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाने का दावा गलत है। उनके पास संख्याबल नहीं था। राज्यपाल द्वारा सभी दलों से परामर्श करने और किसी भी विधायक के दावा करने के बाद ही राष्ट्रपति शासन लगाया गया।"

🔴 अमित शाह बोले- मणिपुर में शांति वापस लाने की कोशिश में सरकार लगी है

अमित शाह ने कहा कि शांति स्थापित करने के लिए मैतेई और कुकी समुदायों के बीच नई दिल्ली में आगे की चर्चा की योजना बनाई गई है। जल्द ही नई दिल्ली में इसको लेकर बैठक की जाएगी।

अमित शाह ने कहा,

"हम मणिपुर में शांति वापस लाने के लिए अपने प्रयास कर रहे हैं। तेरह बैठकें हो चुकी हैं। हमने इस विषय को देर से उठाया क्योंकि बैठकें चल रही थीं। अगली बैठक होने वाली है और इस मुद्दे का जल्द ही समाधान हो जाएगा।"

अमित शाह ने आगे जोर दिया कि संचार चैनल खुले हैं। शाह ने राजनीतिक लाभ के लिए स्थिति का इस्तेमाल करने के किसी भी कोशिश को खारिज कर दिया।

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🔴 मणिपुर हिंसा में मारे गए लोगों पर क्या बोले अमित शाह

अमित शाह ने माना कि मणिपुर हिंसा के शुरुआती दौर में 260 लोगों की जान चली गई थी। लेकिन इसमें से 70 प्रतिशत लोग पहले 15 दिन में ही मारे गए थे। पहले 15 दिनों में इसपर कंट्रोल करना मुश्किल था। और ये पहली बार मणिपुर में नस्ली हिंसा नहीं हुई। अब तक मणिपुर में 11 बार राष्ट्रपित शासन लगाया गया है। हमने तो सिर्फ एक बार लगाया है। नॉर्थ ईस्ट में पिछले 10 सालों सुरक्षा घटनाओं में 70 फीसदी कमी है।

अमित शाह विपक्ष पर इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाय। अमित शाह ने मणिपुर में जातीय संघर्ष और भारत के अन्य हिस्सों में नक्सलवाद के अलग-अलग मुद्दों को एक साथ जोड़ने का भी आरोप लगाया है।

🔴 मणिपुर को लेकर राज्यसभा में क्या बोले मल्लिकार्जुन खड़गे?

चर्चा की शुरुआत करते हुए ल्लिकार्जुन खड़गे ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दो सालों में मणिपुर का दौरा क्यों नहीं किया। उन्होंने सरकार से जातीय संघर्ष के तथ्यों को बताते हुए मणिपुर पर एक श्वेत पत्र पेश करने की भी मांग की।

उन्होंने कहा, "मैं जांच की मांग करता हूं और सदन में एक श्वेत पत्र पेश किया जाना चाहिए। तब सभी को पता चल जाएगा कि राज्य में क्या हो रहा है...भाजपा के पास शांति बहाल करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने संघर्ष को और गहरा होने दिया है।"

खड़गे ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार के पास शांति बहाल करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि वहां हर दिन एक नया प्रयोग कर रहे हैं।

केंद्र द्वारा राष्ट्रपति शासन लगाए जाने का जिक्र करते हुए खड़गे ने कहा,

"मुख्यमंत्री को जिम्मेदारी लेनी चाहिए थी और इस्तीफा दे देना चाहिए था। भाजपा मणिपुर को नहीं बल्कि मुख्यमंत्री को बचाने के लिए काम कर रही थी। राष्ट्रपति शासन मणिपुर को बचाने के लिए नहीं बल्कि वहां पार्टी की संभावनाओं को बचाने के लिए लगाया गया है।"

🔴 मणिपुर में शांति बहाल कब तक होगी? क्या कोई समय सीमा है? अमित शाह ने इसपर क्या कहा?

क्या सरकार के पास शांति बहाल करने के लिए कोई समय सीमा है, जैसा कि उन्होंने नक्सलवाद को खत्म करने के लिए तय किया है? एक सांसद के सवाल का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा,

"नक्सलवाद और जातीय हिंसा में अंतर है। मैं स्पष्ट कर दूं कि मणिपुर में क्या हो रहा है। यह आतंकवाद या सांप्रदायिक झड़प नहीं है। जातीय झड़पों से निपटना अलग है। कैसे अतीत में मणिपुर में जातीय झड़पें सात महीने से लेकर 10 साल तक चली थीं।''

अमित शाह ने कहा कि इन सभी जातीय झड़पों में, जो सालों तक चली थीं...उस वक्त की सरकार के पीएम ने मणिपुर का दौरा नहीं किया था। शाह ने कहा, "मई 2023 से पहले 7 वर्षों में मणिपुर में कोई हड़ताल, नाकाबंदी या कर्फ्यू नहीं था। आदिवासी आबादी में अशांति केवल HC के आदेश के बाद ही फैली थी। असुरक्षा की भावना थी जो HC के आदेश के बाद फैल गई। स्थिति अस्थिर थी। SC ने पहले ही आदेश को खारिज कर दिया है।"

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