पश्चिम बंगाल के वित्तमंत्री अमित मित्रा बोले, अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए केंद्र को 'लक्ष्मण रेखा' लांघ लेने होंगे बड़े फैसले

कैसे संभलेंगी अर्थव्यवस्था, पश्चिम बंगाल के वित्तमंत्री अमित मित्रा ने दिए ये सुझाव

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के वित्तमंत्री अमित मित्रा ने कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए केंद्र को बड़े कदम उठाने होंगे। देश के बड़े अर्थशास्त्रियों में शुमार मित्रा ने कहा है कि कोरोना वायरस और लॉकडाउन के चलते जो हालात बन रहे हैं, उसमें बहुत बड़ा नुकसान देश की अर्थव्यवस्था को हो रहा है और होगा। ऐसे में 'लक्ष्मण रेखा' के पार जाकर सरकार को सोचना होगा। सरकार को इस समय राजकोषीय घाटा और दूसरी फिक्र ना करते हुए कुछ बड़े कदम उठाने होंगे और बड़ी घोषणाएं करनी होंगी। मित्रा ने हिन्दुस्तान टाईम्स को दिए इंटरव्यू में ये बातें कही हैं।

10 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा करे सरकार

10 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा करे सरकार

आईएमएफ के इस साल भारत की अर्थव्यवस्था के 1.9 फीसदी रहने के अनुमान को लेकर मित्रा ने कहा यह एक अभूतपूर्व स्थिति है। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार को अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक योजना के साथ आना चाहिए। जिससे बढ़ती बेरोजगारी, गरीबी और भुखमरी पर काबू पाया जा सके। केंद्र को जरूरत है कि वो जीडीपी के 6 प्रतिशत के बराबर के पैकेज की घोषणा करे। यह करीब 10 लाख करोड़ रुपए है। केंद्र सरकार और आरबीआई इस समय खानापूर्ति ना करे। वो अपनी लक्ष्मण रेखा को पार कर साहसिक फैसले करें। मित्रा ने कहा कि कई चीजें भारत के पक्ष में हैं कई दूसरे विकासशील देशों के मुकाबले भारत का कर्ज और जीडीपी का प्रतिशत 70 फीसदी से कम है। वहीं दुनिया में कच्चे तेल की कीमतें गिरने का भी भारत पर बुरा असर नहीं है। इनका चीजों का भारत को फायदा लेना चाहिए।

गरीब के हाथ तक पैसा पहुंचे

गरीब के हाथ तक पैसा पहुंचे

मित्रा ने कहा, सबसे जरूरी है कि सरकार गरीबों के हाथ में पैसा दे, जो एक तरह से जिंदगी के लिए लड़ रहे हैं। कम से कम 4 लाख करोड़ रुपए उन राज्यों को ट्रांसफर किए जा सकते हैं, जो गरीबों के बैंक खातों में इस पैसा को भेज सकते हैं। जैसे पश्चिम बंगाल में, सभी ट्रांसफर डिजिटल रूप में होते हैं। साथ ही गरीबों को मुफ्त में राशन दिया जाना चाहिए, जैसा कि हमने पश्चिम बंगाल में किया है, राशन की दुकानों पर फ्री में चावल और गेहूं उपलब्ध कराया जा रहा है। मित्रा ने कहा कि डिमांड और सप्लाई की चेन टूटी है। छोटे उद्योग को भारी नुकसान पहुंचा है। इन उद्योगों को कर्ज और किश्तों में छूट की बहुत जरूरत है।

कोरोना के बाद अर्थव्यवस्था

कोरोना के बाद अर्थव्यवस्था

कोरोना वायरस के बाद अर्थव्यवस्था की क्या स्थिति होगी। इस पर मित्रा ने कहा कि विकास दर को लेकर कोई अनुमान लगाना अभी मुश्किल है। अभी ये कहना मुश्किल है कि कितने दिन में हम इससे निकल पाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर अक्टूबर से आगे ये जाता है तो फिर विकास दर नराकात्मक हो सकती है। जिसकेे बाद हालात काफी मुश्किल हो जाएंगे।

सीतारमण ने नहीं दिया मेरे खत का जवाब

सीतारमण ने नहीं दिया मेरे खत का जवाब

मित्रा ने कहा कि ये वक्त केंद्र और राज्य के साथ मिलकर लड़ने का है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को मैंने आठ चिच्ठियां लिखीं लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। एक बार ही उनसे मेरी बात हुई, कुछ सुझाव उन्होंने माने भी लेकिन केंद्र और राज्यों के बीच लगातार समन्वय की जरूरत है। केंद्र की और से कोरोना से जुड़ी जानकारी के लिए टीम भेजे जाने को लेकर हुए विवाद पर अमित मित्रा ने कहा कि बिना राज्य से पूछे इस तरह टीम का भेजा जाना समझ से परे है। गुजरात राज्य पश्चिम बंगाल से ज्यादा कोरोना से प्रभावित है और टीम पश्चिम बंगाल में। इसमें राजनीति ज्यादा है।

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